Bilaspur News:- साइबर ठगी के पीड़ितों को राहत दिलाने की नई पहल, ‘मनी रेस्टोरेशन’ पर बिलासपुर रेंज के अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण

Bilaspur News:-बिलासपुर रेंज में साइबर ठगी के पीड़ितों को जल्द पैसा वापस दिलाने के लिए ‘मनी रेस्टोरेशन’ पर विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया। ACCU ने अब तक 2.36 लाख रुपये पीड़ितों को लौटाए हैं और 60 मामले प्रक्रियाधीन हैं। अधिकारियों ने 1930 हेल्पलाइन और NCRP पोर्टल का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की।
Bilaspur बिलासपुर। साइबर ठगी के शिकार लोगों को उनकी गाढ़ी कमाई जल्द वापस दिलाने के उद्देश्य से बिलासपुर रेंज में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) बिलासपुर रेंज राम गोपाल गर्ग, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली भोजराम पटेल की मौजूदगी में रेंज के सभी साइबर थाना प्रभारियों को मनी रेस्टोरेशन (Money Restoration) और ग्रीवांस रिड्रेसल (Grievance Redressal) मॉड्यूल की विस्तृत जानकारी दी गई।
आईजी राम गोपाल गर्ग ने कहा कि साइबर अपराध के मामलों में केवल बैंक खाताधारकों या निचले स्तर के आरोपियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है। पुलिस की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब पीड़ित की ठगी गई रकम कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस उसके खाते में पहुंच सके।
प्रशिक्षण के दौरान भारत सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) के Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) के अंतर्गत संचालित NCRP पोर्टल के दो प्रमुख मॉड्यूल पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। अधिकारियों को बताया गया कि फ्रीज किए गए खातों से कानूनी प्रक्रिया और बैंकों के समन्वय के जरिए पीड़ितों की राशि कैसे वापस कराई जाए। साथ ही ऐसे निर्दोष खाताधारकों के खाते भी पोर्टल के माध्यम से डी-फ्रीज करने की प्रक्रिया समझाई गई, जिनके खाते जांच के दौरान गलती से फ्रीज हो जाते हैं।
बैठक में बताया गया कि बिलासपुर ACCU टीम ने मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल के माध्यम से अब तक 2 लाख 36 हजार रुपये साइबर ठगी के पीड़ितों को वापस दिलाए हैं, जबकि 60 प्रकरणों में प्रक्रिया जारी है। इस उल्लेखनीय कार्य के लिए आईजी राम गोपाल गर्ग और एसएसपी रजनेश सिंह ने ACCU प्रभारी गोपाल सतपति एवं उनकी टीम की सराहना करते हुए उन्हें पुरस्कृत करने की घोषणा की।
कार्यक्रम में एसएसपी मुंगेली भोजराम पटेल ने मनी रेस्टोरेशन के सफल प्रयोग को केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने पूरी प्रक्रिया को सरल तरीके से समझाया, जिससे अन्य जिलों के अधिकारी भी इसे प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।
इस दौरान ICICI बैंक के विशेषज्ञ कमलेश वाल्दे ने बताया कि ठगी की रकम वापस कराने के लिए बैंकों को किन कानूनी दस्तावेजों और न्यायालय के आदेशों की आवश्यकता होती है।
बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि साइबर अपराध में शामिल आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ उनकी चल एवं अचल संपत्तियों का विवरण तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए, ताकि वे संपत्ति बेचकर जांच या पीड़ितों के मुआवजे को प्रभावित न कर सकें।
वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि साइबर ठगी का शिकार होने वाले किसी भी व्यक्ति को थाने और साइबर सेल के बीच भटकाया न जाए। आम नागरिक साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। यदि राशि फ्रीज हो चुकी है तो Money Restoration Module के माध्यम से उसे वापस प्राप्त करने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।

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