
CG News:- सरकारी निर्माण की गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बिलासपुर जिले के कोटा जनपद क्षेत्र के कोनचरा गांव में प्राथमिक शाला अखराडांड की बाउंड्री वॉल निर्माण के कुछ ही दिनों बाद दरारों से भर गई। मामला सिर्फ घटिया निर्माण का नहीं, बल्कि उन मासूम बच्चों की सुरक्षा का भी है, जो रोज इसी स्कूल में पढ़ने आते हैं। अब ग्रामीण तकनीकी जांच और शेष भुगतान रोकने की मांग कर रहे हैं।
बिलासपुर। जनपद पंचायत कोटा के अंतर्गत ग्राम कोनचरा स्थित प्राथमिक शाला अखराडांड में जनपद निधि से जून-जुलाई के दौरान बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया गया था। लेकिन निर्माण पूरा होने के कुछ ही समय बाद दीवार में कई जगह दरारें दिखाई देने लगीं। इतनी जल्दी आई दरारों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस बाउंड्री वॉल का निर्माण हुआ है, वह जनपद सदस्य के निवास के समीप ही स्थित है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि जब निर्माण की खामियां साफ नजर आ रही हैं तो अब तक जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
बरसात में बढ़ा खतरा, बच्चों की सुरक्षा पर चिंता
सबसे गंभीर बात यह है कि यह बाउंड्री वॉल प्राथमिक शाला परिसर की है। यहां रोज छोटे-छोटे बच्चे पढ़ने आते हैं। बरसात के मौसम में यदि दीवार का कोई हिस्सा गिरता है और कोई हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? यही सवाल अब ग्रामीणों के साथ-साथ अभिभावकों को भी परेशान कर रहा है।
ग्रामीणों की मांग—जांच पूरी होने तक भुगतान रोका जाए
ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए। जब तक गुणवत्ता की जांच पूरी न हो जाए और आवश्यक सुधार नहीं कर दिए जाएं, तब तक निर्माण कार्य का शेष भुगतान, यदि लंबित हो, रोक दिया जाए। साथ ही यदि जांच में लापरवाही या वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
उप सरपंच ने भी उठाए भ्रष्टाचार पर सवाल
ग्राम पंचायत कोनचरा के उप सरपंच शेखर गुप्ता ने कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों की देखरेख में ही भ्रष्टाचार पनपने लगे तो विकास की उम्मीद करना बेकार है। उनका कहना है कि ऐसे जनप्रतिनिधियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए और यदि दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब प्रशासन की परीक्षा
अब निगाहें जनपद पंचायत कोटा और संबंधित अधिकारियों पर हैं। क्या बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मामले में तत्काल तकनीकी जांच होगी? क्या गुणवत्ता से समझौता करने वालों पर कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा? फिलहाल ग्रामीण जवाब का इंतजार कर रहे हैं।


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