
रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक ढांचे में महिला अधिकारियों की भागीदारी लगातार मजबूत हो रही है। राज्य के कई जिलों में महिला IAS अधिकारी बतौर कलेक्टर प्रशासन की कमान संभाल रही हैं। ये अधिकारी कानून-व्यवस्था, जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, विकास कार्यों की निगरानी और आम लोगों की समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
कई जिलों की जिम्मेदारी महिला अधिकारियों के हाथों में
छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में महिला अधिकारियों को कलेक्टर की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें सूरजपुर की रेना जमील, बलरामपुर-रामानुजगंज की चंदन संजय त्रिपाठी, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) की संतन देवी जांगड़े, सारंगढ़-बिलाईगढ़ की पद्मिनी भोई साहू, कोरिया की रोक्तिमा यादव, नारायणपुर की नम्रता जैन और कोंडागांव की नूपुर राशि पन्ना शामिल हैं।
इसी तरह बेमेतरा की प्रतिष्ठा ममगाईं, बालोद की दिव्या उमेश मिश्रा, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की तुलिका प्रजापति और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की लीना कमलेश मंडावी भी जिला प्रशासन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
चुनौतीपूर्ण इलाकों में नेतृत्व
इन महिला अधिकारियों के सामने जिलों की भौगोलिक और प्रशासनिक चुनौतियां भी अलग-अलग हैं। वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक प्रशासन को जन अपेक्षाओं के अनुरूप संचालित करना बड़ी जिम्मेदारी है। विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ विकास योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
महिला कलेक्टरों की सक्रियता से जिला प्रशासन में संवेदनशीलता और जवाबदेही को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। जनसमस्याओं की सुनवाई, योजनाओं की मॉनिटरिंग और विभागीय समन्वय के जरिए ये अधिकारी प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही हैं।
महिला नेतृत्व को मिल रहा बढ़ावा
प्रशासन के शीर्ष जिलास्तरीय पदों पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी महिला सशक्तिकरण का भी महत्वपूर्ण उदाहरण है। कलेक्टर के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहीं ये अधिकारी न केवल प्रशासनिक निर्णय ले रही हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, ग्रामीण विकास और अन्य जनहितकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी निगरानी रख रही हैं।

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