देशभर के लाखों वरिष्ठ शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, वरिष्ठता, पदोन्नति और वेतन पर संकट की आशंका; 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से स्थायी छूट देने की मांग

देश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लाखों सेवारत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और वरिष्ठता पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के कारण गंभीर संकट उत्पन्न होने की आशंका जताई गई है। इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ से संबद्ध भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ के अखिल भारतीय महामंत्री राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के बाद कक्षा 1 से 8 तक के कार्यरत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से देशभर के उन लाखों वरिष्ठ शिक्षकों के सामने सेवा समाप्ति, पदोन्नति, पदावनति और वेतन विसंगति जैसी गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं, जिनकी नियुक्ति शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2010 लागू होने से काफी पहले तत्कालीन वैध राज्य नियमों के तहत हुई थी।
राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि 15 से 25 वर्षों तक शिक्षण कार्य कर चुके अनुभवी शिक्षकों को करियर के अंतिम दौर में TET परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न तो व्यावहारिक है और न ही न्यायसंगत। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति के समय TET का कोई नियम अस्तित्व में नहीं था, उन पर दशकों बाद नए नियम को भूतलक्षी प्रभाव से लागू करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
उन्होंने केंद्र सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि RTE अधिनियम में आवश्यक विधायी संशोधन कर वर्ष 2011 से पहले नियुक्त सभी सेवारत शिक्षकों को TET से स्थायी छूट प्रदान की जानी चाहिए। उनका कहना है कि पुराने नियमों के तहत वैध रूप से नियुक्त शिक्षकों के सेवा अधिकारों और वरिष्ठता की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी आवश्यक है।
राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि इस गंभीर विषय पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मुलाकात के लिए समय मांगा गया है। राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ (BMS) का एक केंद्रीय शिष्टमंडल शीघ्र ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री से भेंट कर देशभर के प्रभावित शिक्षकों का पक्ष रखेगा और समाधानपरक ज्ञापन सौंपेगा।
उन्होंने मांग की कि जब तक इस संबंध में कोई स्थायी नीतिगत समाधान नहीं निकलता, तब तक किसी भी सेवारत शिक्षक के खिलाफ सेवा समाप्ति, पदावनति अथवा अन्य दंडात्मक कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए।
महासंघ का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार को शीघ्र स्पष्ट और स्थायी नीति बनानी चाहिए, ताकि देशभर के लाखों शिक्षकों में व्याप्त असमंजस और चिंता को समाप्त किया जा सके।
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