CG News:- SDM से भी ‘पावरफुल’ तहसीलदार! स्टे ऑर्डर के बाद भी चला नामांतरण का खेल, अवैध प्लाटिंग की ‘जुगलबंदी’ में कौन-कौन?

CG News:- एक तरफ SDM कोर्ट का आदेश—जमीन बेचने, नामांतरण करने और निर्माण पर रोक। दूसरी तरफ उसी जमीन के नामांतरण की कार्रवाई। सवाल बहुत सीधा है—जब रोक लगी थी तो फाइल चली कैसे? बिलासपुर के तखतपुर क्षेत्र में ग्राम मेंड्रा के खसरा नंबर 154/1 से जुड़ा मामला अब सिर्फ जमीन के विवाद तक सीमित नहीं रहा। यह मामला राजस्व विभाग में आदेशों के पालन और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रहा है।
बिलासपुर। तखतपुर और आसपास के गांवों में अवैध प्लाटिंग और जमीन के नामांतरण को लेकर पहले से शिकायतों का दौर चल रहा है। इसी बीच ग्राम मेंड्रा के खसरा नंबर 154/1 का मामला सामने आया है, जिसने राजस्व महकमे की कार्यप्रणाली पर ही सवालिया निशान लगा दिया है।
आरोप है कि SDM कोर्ट के स्टे ऑर्डर के बावजूद सकरी तहसीलदार कार्यालय से नामांतरण आदेश पारित कर दिया गया। यानी जिस जमीन पर अदालत ने आगामी आदेश तक बिक्री, नामांतरण और निर्माण पर ब्रेक लगा रखा था, वहां नामांतरण की फाइल आगे बढ़ गई।
अब सवाल है—स्टे किसके लिए था? और अगर स्टे था तो फाइल चली कैसे?
SDM ने लगाया ब्रेक, फिर किसने हटा दिया?
न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के ज्ञापन क्रमांक 610/अ.वि.अ./2026, दिनांक 8 जून 2026 के तहत ग्राम मेंड्रा के खसरा नंबर 154/1 में आगामी आदेश तक विक्रय, नामांतरण और निर्माण कार्य पर रोक लगाई गई थी।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस आदेश के बावजूद सकरी तहसीलदार ने विवादित भूमि का नामांतरण आदेश पारित कर दिया।
यानी SDM कोर्ट का आदेश फाइल में था, स्टे प्रभावी था और फिर भी नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ी। अब जांच में यही पता लगाना बाकी है कि किस नियम और किस अधिकार के तहत यह कदम उठाया गया?
आदेश एक तरफ, नामांतरण दूसरी तरफ!
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक संबंधित पटवारी के प्रतिवेदन और SDM के आदेश को दरकिनार करते हुए नामांतरण की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
अब फाइल खुलेगी तो कई सवालों के जवाब मिलेंगे—पटवारी ने क्या रिपोर्ट दी? तहसीलदार के सामने SDM का स्टे था या नहीं? अगर था तो फिर आदेश किस आधार पर हुआ?
नाम चढ़ा नहीं तो ‘त्रुटिवश’ हो गया आदेश?
मामला यहीं खत्म नहीं होता। आरोप है कि नामांतरण आदेश के बाद राजस्व रिकॉर्ड में क्रेता का नाम दर्ज कराने के लिए कर्मचारी पर दबाव बनाया गया।
जब बात नहीं बनी तो कथित तौर पर आदेश को ‘त्रुटिवश पारित’ बताते हुए पुनर्विलोकन की प्रक्रिया अपनाए जाने की चर्चा सामने आई।
अब सवाल और तीखा है—अगर आदेश गलती से हुआ था तो स्टे के बावजूद फाइल खोलने की जरूरत ही क्यों पड़ी?
0 अवैध प्लाटिंग का बड़ा खेल, ‘रेट’ की भी चर्चा!
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि मामला सिर्फ मेंड्रा के एक खसरे का नहीं है। पांड, सैदा, मेंड्रा समेत निगम सीमा से बाहर के कई गांवों में अवैध प्लाटिंग और नामांतरण को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिल रही हैं।
आरोप है कि अवैध प्लाटिंग वाली जमीनों के नामांतरण के लिए भारी-भरकम रकम की डिमांड किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
राजस्व कार्यालय से जुड़े कुछ लोगों और निचले स्तर के कर्मचारियों पर पक्षकारों पर दबाव बनाने के आरोप हैं। वहीं CT सीरीज में आवेदन समय-सीमा में आगे नहीं बढ़ने पर अपूर्ण दस्तावेजों का हवाला देकर प्रकरण खारिज करने के आरोप भी लगाए गए हैं।
इन आरोपों की सच्चाई अब जांच के बाद ही सामने आएगी।
0 फाइल खुली तो ‘जुगलबंदी’ का राज भी खुलेगा?
ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। मांग है कि नामांतरण की पूरी फाइल, आदेश-पत्र, पटवारी प्रतिवेदन और अभिलेख दुरुस्ती की प्रक्रिया खंगाली जाए।
क्योंकि अगर SDM के स्टे के बावजूद नामांतरण हुआ है, तो मामला सिर्फ एक जमीन का नहीं है। सवाल यह है कि सरकारी आदेश की धज्जियां उड़ाने की हिम्मत आखिर आई कहां से?
0 SDM बोले- स्टे के बाद नामांतरण हुआ तो कार्रवाई होगी
तखतपुर SDM नितिन तिवारी ने कहा कि यदि स्थगन आदेश जारी होने के बाद भी संबंधित भूमि का नामांतरण किया गया है तो यह नियमों के विरुद्ध है।
उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में नामांतरण की कार्रवाई नियम विरुद्ध या गलत पाई जाती है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ राजस्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी।
अब असली सवाल यही है—SDM का स्टे भारी पड़ेगा या नामांतरण की फाइल चलाने वाले हाथ? जांच खुलेगी तो शायद राजस्व विभाग के इस ‘खेल’ के कई पत्ते भी खुल जाएं।

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