CG News:- सर्पदंश मुआवजा घोटाला: लिपिक तो मोहरा है, बिना उच्चाधिकारी के सह और मीलीभगत के ऐसा कृत्य करने का दुस्साहस छोटा कर्मचारी नहीं कर सकता, भ्रष्टाचार का जाल बहुत विस्तृत,भ्रष्टाचार के संयुक्त षड्यंत्र का पर्दाफाश जरूरी,

CG News:- सर्पदंश मुआवजा मामले में छत्तीसगढ़ की कहानी अब दो जिलों में दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाई दे रही है। एक तरफ बिलासपुर में कार्रवाई के विरोध में कर्मचारी संघ मंगलवार को आईजी कार्यालय पहुंचा और अपनी सफाई रखी। दूसरी तरफ उसी समय रायगढ़ से ऐसी खबर आई, जिसने पूरे मामले को फिर सवालों के घेरे में ला खड़ा किया। बिलासपुर में दलील थी कि कर्मचारी बेवजह निशाने पर हैं, तो रायगढ़ में एसीबी की कार्रवाई ने मुआवजा प्रक्रिया पर एक और सवाल खड़ा कर दिया। आरोप है कि सर्पदंश मुआवजा दिलाने के नाम पर ₹50 हजार की रिश्वत मांगी गई और रकम बाद में लेने की गारंटी के तौर पर आरोपी ने ₹50 हजार का हस्ताक्षरित चेक तक ले लिया। एसीबी की कार्रवाई के बाद आरोपी बाबू की गिरफ्तारी हुई।अब सवाल यही है कि एक तरफ कर्मचारी संगठन कार्रवाई को लेकर अपनी बात रख रहे हैं, तो दूसरी तरफ मुआवजा जैसे संवेदनशील मामले में रिश्वतखोरी के आरोप क्यों सामने आ रहे हैं? क्या जांच सिर्फ निलंबित कर्मचारियों और गिरफ्तार आरोपियों तक ही सीमित रहेगी या फिर उस पूरी व्यवस्था की पड़ताल होगी, जहां आवेदन से लेकर मुआवजा स्वीकृति तक कई स्तरों से फाइल गुजरती है? कहीं ऐसा तो नहीं कि हर कार्रवाई के बाद विरोध की ढाल खड़ी हो जाती है, लेकिन सिस्टम की उन कमजोर कड़ियों पर सवाल पीछे छूट जाते हैं, जहां गड़बड़ी की गुंजाइश बनती है। क्योंकि सर्पदंश पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजा एक सहारा है, कोई सौदेबाजी का जरिया नहीं। अब देखना होगा कि जांच सिर्फ छोटे चेहरों तक पहुंचती है या फिर इस पूरी व्यवस्था की असली परतें भी खुलती हैं।
बिलासपुर। बहुचर्चित सर्पदंश मुआवजा घोटाला मामले में गिरफ्तार तहसील कार्यालय के तीनों लिपिक नरेंद्र कौशिक, गरीबराम बिंझवार और हरिशंकर राठौर को निलंबित कर दिया गया है। दूसरी ओर पुलिस की कार्रवाई और पूछताछ के दौरान कर्मचारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के विरोध में सोमवार को जिलेभर के राजस्व लिपिकों ने काम बंद कर दिया। इससे सभी तहसीलों में दिनभर कामकाज प्रभावित रहा। बाद में कलेक्टर द्वारा निष्पक्ष विभागीय जांच समिति गठित करने का आश्वासन दिए जाने के बाद कर्मचारियों ने प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल वापस ले ली। दूसरी ओर रायगढ़ कलेक्टोरेट में भी सर्पदंश मुआवजा प्रकरण में रिश्वत की गारंटी के तौर पर चेक लेने के आरोप में एसीबी द्वारा एक लिपिक की गिरफ्तारी के बाद पूरे प्रदेश में मुआवजा प्रकरणों में लिपिकों की भूमिका फिर चर्चा में आ गई है। चर्चा है कि जांच प्रभावित करने दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
मुआवजा घोटाला सामने आने के बाद तीन लिपिकों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। इसके बाद छत्तीसगढ़ प्रदेश राजस्व लिपिक संघ, राजस्व पटवारी संघ और अधिकारी–कर्मचारी फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्ष जांच की मांग की। संघ का कहना है कि राजस्व न्यायालयों में तहसीलदार पीठासीन अधिकारी होते हैं और रीडर अथवा वाचक का दायित्व केवल आवेदन प्रस्तुत कर फाइल नस्तीबद्ध करना है। दस्तावेजों की सत्यता जांचना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। ऐसे में फर्जी सील और हस्ताक्षर के मामलों में केवल लिपिकों को आरोपी बनाकर गिरफ्तारी और हथकड़ी लगाना अनुचित है। उधर, रायगढ़ कलेक्टोरेट में भी सर्पदंश मुआवजा प्रकरण में रिश्वत की गारंटी के तौर पर चेक लेने के आरोप में एसीबी द्वारा एक लिपिक की गिरफ्तारी के बाद पूरे प्रदेश में मुआवजा प्रकरणों में लिपिकों की भूमिका फिर चर्चा में आ गई है।
बिलासपुर में पुलिस जांच के अनुसार एक संगठित गिरोह आरटीआई के माध्यम से सामान्य मौत के मामलों की मर्ग फाइलें प्राप्त करता था। इसके बाद फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जाली सील और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर मौत का कारण सर्पदंश दर्शाया जाता था। चार लाख रुपये का मुआवजा स्वीकृत होने के बाद आवेदकों को गुमराह कर 1.70 से 1.75 लाख रुपये तक की राशि गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे। मामले में अब तक डॉक्टर, पुलिसकर्मी, अधिवक्ता, तहसील कार्यालय के लिपिक, चालक समेत कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस सरकंडा सहित सिविल लाइन, कोनी, सिरगिट्टी और तोरवा थाना क्षेत्रों में दर्ज मामलों की जांच करते हुए बैंक खातों के लेनदेन और कॉल डिटेल के आधार पर गिरोह की अन्य कड़ियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
कलेक्टर के आश्वासन पर वापस ली हड़ताल
पुलिस की कार्रवाई और कर्मचारियों के साथ कथित अभद्र व्यवहार के विरोध में राजस्व लिपिक संघ ने तीन दिवसीय हड़ताल का एलान किया था। सोमवार को जिलेभर के लिपिकों ने काम बंद रखा, जिससे तहसीलों में राजस्व संबंधी कार्य पूरी तरह प्रभावित रहे। दोपहर बाद संघ के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर से मुलाकात कर विभागीय स्तर पर निष्पक्ष जांच समिति गठित करने की मांग रखी। कलेक्टर ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कर्मचारियों की शिकायतों पर विचार करने का आश्वासन दिया। इसके बाद संघ ने जनहित को देखते हुए प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल वापस लेने की घोषणा कर दी। हालांकि सोमवार को पूरे दिन कामकाज बंद रहने से आम लोगों को नामांतरण, बंटवारा, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र और अन्य राजस्व कार्यों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा।
मर्ग फाइलों में फर्जीवाड़ा कर निकालते थे मुआवजा
पुलिस जांच में सामने आया है कि सर्पदंश मुआवजा घोटाले के पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय था। गिरोह के सदस्य आरटीआई के जरिए सामान्य मौत के मामलों की मर्ग फाइलें हासिल करते थे। इसके बाद फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जाली सील और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर मौत का कारण सर्पदंश दर्शाया जाता था। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर चार लाख रुपये तक का मुआवजा स्वीकृत कराया जाता था। जांच एजेंसियों का दावा है कि मुआवजा मिलने के बाद आवेदकों को झांसा देकर 1.70 से 1.75 लाख रुपये तक की राशि गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे। पुलिस अब बैंक खातों के लेनदेन, कॉल डिटेल और दस्तावेजों की कड़ी जोड़कर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। कई मामलों में विभिन्न थानों में अलग-अलग अपराध दर्ज किए जा चुके हैं।
अब तक कई विभागों के 20 से अधिक आरोपी गिरफ्तार
सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच में अब तक कई विभागों से जुड़े 20 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें सिम्स चौकी के नगर सैनिक आरक्षक रामकुमार पाटनवार और आरक्षक रामेश्वर भास्कर, चिकित्सक डॉ. प्रियंका सोनी, तहसील कार्यालय के लिपिक नरेंद्र कौशिक, गरीबराम बिंझवार और हरिशंकर राठौर, अधिवक्ता कामता साहू, महेंद्र मनहर और हीराप्रसाद खांडेकर तथा तहसीलदार का चालक गोविंद विश्वकर्मा शामिल हैं। इसके अलावा कुश कुमार गुप्ता, भगत सिंह ठाकुर, शंकू सिंह, धर्मेंद्र यादव, विजय जांगड़े, आकाश साहू, केशव कश्यप, शिवकुमारी यादव, दामिनी यादव, सफीना बानो, संतोष सूर्यवंशी, रंजित चतुर्वेदी और सुनीता सोनवानी को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और साक्ष्यों के आधार पर अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
इधर चर्चा है कि जांजगीर–चांपा जिले में भी सर्पदंश मुआवजा प्रकरण से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों की जांच की मांग उठ रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या कार्रवाई सामने नहीं आई है। यदि इस मामले में कोई तथ्यात्मक जानकारी या आधिकारिक दस्तावेज सामने आते हैं, तो उसका विस्तृत समाचार जल्द प्रकाशित किया जाएगा।

Live Cricket Info
