CG News:— अंग्रेजों के मुखबिर” बयान से भड़का बवाल: BJP पार्षदों ने छीना माइक, VIDEO: बैठक में धक्का-मुक्की और नारेबाजी

CG News:— महिला सशक्तिकरण पर चर्चा के लिए बुलाई गई रायपुर नगर निगम की बैठक, सियासी शोर–शराबे में दब गई। एक बयान—“अंग्रेजों के मुखबिर”—ने ऐसा बवाल खड़ा किया कि पार्षद अपनी सीट छोड़कर आमने–सामने आ गए, माइक छीने गए और धक्का–मुक्की तक नौबत पहुंच गई। इससे पहले ‘परिसीमन’ को ‘परमिशन’ कहने पर भी सदन में तकरार हो चुकी थी। सभापति की समझाइश से किसी तरह मामला शांत हुआ, लेकिन जल संकट जैसे अहम मुद्दे पर चर्चा टल गई—और सवाल वही रह गया, क्या ऐसे ही चलेगी शहर की राजनीति?
Raipur। रायपुर नगर निगम की विशेष सामान्य सभा—जिसे महिलाओं के सशक्तिकरण जैसे गंभीर मुद्दे पर मंथन का मंच होना था—कुछ ही देर में राजनीतिक टकराव का अखाड़ा बन गई। शब्दों की तल्खी इतनी बढ़ी कि लोकतांत्रिक मर्यादाएं किनारे लग गईं और सदन में हंगामा, नारेबाजी और धक्का–मुक्की का दृश्य सामने आया।
अंग्रेजों के मुखबिर” बयान से भड़की आग
चर्चा के बीच नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी का एक वाक्य चिंगारी साबित हुआ। भाजपा पार्षदों को “अंग्रेजों के मुखबिर” कहे जाने पर सत्ता पक्ष भड़क उठा। पार्षद अपनी कुर्सियां छोड़कर सीधे नेता प्रतिपक्ष के पास पहुंच गए। नारे गूंजे, माइक छीने गए और हालात हाथापाई के करीब पहुंच गए। हालात बेकाबू होते देख कार्यवाही को बीच में ही रोकना पड़ा।

‘परिसीमन’ बनाम ‘परमिशन’—सदन में शब्दों से शुरू हुआ टकराव
हंगामे की पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी। कांग्रेस पार्षद अर्जुमन एजाज ढेबर के भाषण में ‘परिसीमन’ की जगह ‘परमिशन’ शब्द का इस्तेमाल हुआ, जिस पर भाजपा पार्षद कृतिका जैन ने तीखा तंज कसा। बात इतनी बढ़ी कि दोनों महिला पार्षद आमने–सामने आ गईं और सदन का तापमान अचानक चढ़ गया।
सभापति की नसीहत—‘यह सदन, पहली पाठशाला भी है’
बिगड़ती स्थिति को थामने के लिए सभापति सूर्यकांत राठौड़ को बीच में उतरना पड़ा। उन्होंने संयम की अपील करते हुए कहा—“हम यहां सिर्फ बहस करने नहीं, सीखने भी आए हैं।” उनकी समझाइश के बाद किसी तरह माहौल काबू में आया और कार्यवाही दोबारा शुरू हो सकी।

बैठक से पहले ही बिछ चुकी थी टकराव की बिसात
सभा शुरू होने से पहले ही सियासी तल्खी साफ नजर आ रही थी। भाजपा पार्षद ‘कांग्रेस शर्म करो’ के नारे लगाते हुए पहुंचे और महिला विरोधी होने के आरोप लगाए। विरोध को प्रतीकात्मक धार देने के लिए महापौर समेत कई पार्षद काले कपड़ों में नजर आए। हालात की गंभीरता भांपते हुए नगर निगम परिसर में सुरक्षा बल तैनात करना पड़ा।
जल संकट पर चुप्पी, विपक्ष का वार
विपक्ष ने शहर के बढ़ते जल संकट पर चर्चा की मांग रखी, लेकिन सभापति ने सहमति न बनने का हवाला देकर इसे खारिज कर दिया। इससे विपक्ष का तेवर और आक्रामक हो गया—सवाल उठे कि जब शहर प्यासा है, तो सदन क्यों खामोश है?
पिछली बैठक भी रही थी विवादों में
9 अप्रैल की सामान्य सभा भी कम उथल–पुथल भरी नहीं थी। सिटी कोतवाली चौक का नाम ‘जैन स्तंभ’ करने के प्रस्ताव पर तीखी बहस हुई और अंततः विपक्ष के विरोध के चलते इसे रद्द करना पड़ा। अन्य प्रस्ताव बहुमत से पारित हुए, जबकि किरण बिल्डिंग परिसर से जुड़े मुद्दे पर शासन से मार्गदर्शन लेने का फैसला किया गया।

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