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“सेहत के नाम पर जेब पर वार: छत्तीसगढ़ में सिगरेट के बहाने खुली लूट?”

बिलासपुर।जनता की सेहत सुधारनेके नाम पर बढ़ाए गए सिगरेट के दाम अब आम लोगों की जेब पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। ज़मीनी हकीकत यह है कि कीमतों में बढ़ोतरी के बाद बाजार में खुलेआम MRP से अधिक वसूली का खेल चल रहा है, और जिम्मेदार तंत्र इस पर चुप्पी साधे हुए है।

शहर हो या ग्रामीण इलाकापान ठेले, किराना दुकानें और रिटेल आउटलेट्स पर सिगरेट तय दर से कहीं अधिक कीमत पर बेची जा रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि जहां एक ओर सरकार टैक्स और नियमों के जरिएस्वास्थ्य सुधारका दावा करती है, वहीं दूसरी ओर उसी के नाम पर बाजार में मनमानी वसूली को खुली छूट मिल गई है।

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ब्लैक फिल्टर जैसी सिगरेट, जिसकी MRP करीब ₹165 बताई जा रही है, वही पैकेट ₹230 से ₹250 तक में बेचा जा रहा है। यानी एक पैकेट पर सीधे ₹60 से ₹80 तक का अतिरिक्त बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है। सवाल यह है कि अगर MRP तय है, तो फिर यह अतिरिक्त वसूली किसके संरक्षण में हो रही है?

स्थिति और भी गंभीर तब हो जाती है जब दुकानों पर तो स्पष्ट रेट लिस्ट मिलती है और ही ग्राहकों को पक्का बिल दिया जाता है। कई जगहों पर अलगअलग ग्राहकों से अलगअलग कीमत वसूलने की शिकायतें भी सामने रही हैं, जिससे यह मामला सिर्फ महंगाई नहीं बल्कि सुनियोजित मुनाफाखोरी का रूप लेता दिख रहा है।

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स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार कीसेहत सुधारनीति अब राजस्व बढ़ाने का जरिया बन चुकी है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई निगरानी नहीं है। अगर वास्तव में लोगों की सेहत चिंता का विषय होती, तो अवैध बिक्री और ओवरचार्जिंग पर सख्त कार्रवाई दिखती।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या छत्तीसगढ़ मेंसेहतसिर्फ एक बहाना बनकर रह गया है, और असल में आम जनता की जेब से अतिरिक्त पैसा निकालने का खेल चल रहा है? या फिर जिम्मेदार विभाग इस पर कार्रवाई कर यह साबित करेंगे कि नियम सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं हैं?

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Kanha Tiwari

छत्तीसगढ़ के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्होंने पिछले 10 वर्षों से लोक जन-आवाज को सशक्त बनाते हुए पत्रकारिता की अगुआई की है।

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