बिलासपुर में आबकारी विभाग पर गंभीर आरोप, अवैध वसूली और संरक्षण का मामला गरमाया
बिलासपुर में आबकारी विभाग पर गंभीर आरोप, अवैध वसूली और संरक्षण का मामला गरमाया

बिलासपुर में आबकारी विभाग पर गंभीर आरोप, अवैध वसूली और संरक्षण का मामला गरमाया
लिखित शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में खुलेआम शराब बिक्री से बढ़ा आक्रोश
बिलासपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग पर अवैध शराब कारोबार को संरक्षण देने और कार्रवाई के नाम पर वसूली करने जैसे आरोप लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।
ताजा मामला तब सामने आया जब भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के एक मंडल अध्यक्ष द्वारा मुख्यमंत्री के नाम लिखित शिकायत की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कोटा, रतनपुर और बेलगहना क्षेत्र में पदस्थ आबकारी अधिकारी बी.एस. राठिया के कार्यकाल में अवैध शराब का कारोबार तेजी से बढ़ा है और कथित अवैध वसूली का सिलसिला भी जारी है। ढाबों, चखना सेंटरों और सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम शराब बिक्री हो रही है, जो नियमों का खुला उल्लंघन है, लेकिन उस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार आबकारी टीम छापेमारी के दौरान शराब जब्त जरूर करती है, लेकिन बाद में लेन-देन कर आरोपियों को छोड़ दिया जाता है। यही कारण है कि अवैध शराब का कारोबार थमने के बजाय और फैलता जा रहा है। कई बार स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और मीडिया द्वारा इस मुद्दे को उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।
स्थिति को और गंभीर बनाता है विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का रवैया। आरोप है कि शिकायतों के बावजूद उच्च अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे निचले स्तर पर कर्मचारियों को खुली छूट मिलने की धारणा मजबूत हो रही है। नतीजतन, कथित मनमानी और वसूली का सिलसिला बेखौफ जारी है।
वहीं पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी मीडिया के सवालों से बचने के लिए फोन तक रिसीव नहीं कर रहे हैं। जानकारी लेने की कोशिश कर रहे पत्रकारों को संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा, जिससे विभाग की जवाबदेही पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
एक ओर पुलिस विभाग गांव-गांव जाकर नशा मुक्ति अभियान चला रहा है और ग्रामीणों को जागरूक कर रहा है, वहीं दूसरी ओर आबकारी विभाग की कथित लापरवाही इन प्रयासों को कमजोर करती नजर आ रही है। अवैध शराब के चलते सामाजिक वातावरण प्रभावित हो रहा है और युवाओं पर इसका नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब यह देखना अहम होगा कि शासन-प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है या फिर मामला केवल शिकायतों तक ही सीमित रह जाएगा।

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