IAS Padma Jaiswal Removed News:– वरिष्ठ महिला आईएएस पद्मा जायसवाल को सरकारी धन के गबन और पद के दुरुपयोग पर राष्ट्रपति ने किया बर्खास्त

IAS Padma Jaiswal Removed News:– प्रशासनिक सुधार विभाग में कार्यरत सीनियर महिला आईएएस पद्मा जायसवाल हुईं बर्खास्त,सीबीआई की 18 साल पुरानी यह जांच बनी बर्खास्तगी का कारण
नई दिल्ली। कभी सख्त और तेजतर्रार अफसर की छवि रखने वाली 2003 बैच की एजीएमयूटी कैडर की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी Padma Jaiswal को आखिरकार सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। दिल्ली सरकार के प्रशासनिक सुधार विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात रहीं पद्मा जायसवाल पर सरकारी धन के गबन और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप साबित होने के बाद केंद्र सरकार की अनुशंसा पर राष्ट्रपति ने उनके बर्खास्तगी आदेश को मंजूरी दे दी।
करीब 18 साल पुराने मामले में चली लंबी जांच, विभागीय कार्रवाई और कानूनी लड़ाई के बाद यह फैसला सामने आया है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के आदेश को पलटने के बाद केंद्र सरकार को कार्रवाई का रास्ता साफ मिला और इसके बाद कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने अंतिम आदेश जारी कर दिया।
पश्चिम कामेंग पोस्टिंग बनी करियर की सबसे बड़ी मुसीबत
पद्मा जायसवाल के खिलाफ मामला वर्ष 2007-08 के दौरान अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में उनकी तैनाती से जुड़ा है। उस समय वे जिले की उपायुक्त (DC) थीं। आरोप था कि विकास और जनहित कार्यों के लिए जारी सरकारी फंड में से लगभग 28 लाख रुपये का गबन किया गया और कई खर्च अनाधिकृत तरीके से किए गए।
फरवरी 2008 में स्थानीय लोगों ने उनके खिलाफ सरकारी राजस्व के दुरुपयोग और पद के दुरुपयोग की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतों के बाद सरकार ने अप्रैल 2008 में उन्हें पद से हटाकर निलंबित कर दिया और पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी।
हालांकि अक्टूबर 2010 में उन्हें सेवा में बहाल कर दिया गया, लेकिन सीबीआई जांच लगातार जारी रही और यही जांच आगे चलकर उनकी बर्खास्तगी का आधार बनी।
गृह मंत्रालय ने शुरू की विभागीय कार्रवाई
एजीएमयूटी कैडर की अधिकारी होने के कारण केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम 8 के तहत पद्मा जायसवाल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की। वर्ष 2010 में उन्हें आरोप पत्र जारी किया गया।
इसके बाद केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) से परामर्श लेने के बाद गृह मंत्रालय ने उनकी सेवा समाप्त करने की अनुशंसा की।
लेकिन पद्मा जायसवाल ने इस कार्रवाई को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) में चुनौती दी। CAT ने केंद्र सरकार की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए कहा था कि गृह मंत्रालय के पास एजीएमयूटी कैडर के अधिकारियों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई का अधिकार नहीं है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पलटा CAT का फैसला
केंद्र सरकार ने CAT के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद 1 अप्रैल 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने CAT के आदेश को गलत ठहराते हुए केंद्र सरकार की कार्रवाई को वैध माना।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने तेजी से कार्रवाई आगे बढ़ाई। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की अनुशंसा पर राष्ट्रपति ने पद्मा जायसवाल की बर्खास्तगी के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए। आदेश जारी होते ही उन्हें सेवा से पृथक कर दिया गया।सूत्रों के मुताबिक बर्खास्तगी के साथ ही पद्मा जायसवाल के पेंशन संबंधी अधिकार भी समाप्त हो गए हैं।
शिक्षा और प्रशासनिक करियर
Padma Jaiswal का जन्म 6 अक्टूबर 1975 को हुआ था। उन्होंने सेंट जेवियर स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल से एमबीए किया और इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया से कंपनी सेक्रेटरी की डिग्री हासिल की।
हिंदी, अंग्रेजी और पंजाबी भाषा पर उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती थी। यूनिवर्सिटी रिसर्च फेलोशिप के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मामलों, फील्ड मैनेजमेंट, बिजनेस मैनेजमेंट, लीगल पर्सनल मैनेजमेंट और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन जैसे विषयों पर भी काम किया।
यूपीएससी में चयन के बाद वे 2003 बैच की आईएएस अधिकारी बनीं। प्रशासनिक सेवा के दौरान उनकी पोस्टिंग गोवा, पुडुचेरी, दिल्ली और अरुणाचल प्रदेश समेत कई अहम स्थानों पर हुई। अपने सख्त प्रशासनिक रवैये के कारण वे अक्सर एक कड़क अफसर के रूप में पहचानी जाती थीं।लेकिन पश्चिम कामेंग में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं ने आखिरकार उनके पूरे प्रशासनिक करियर पर विराम लगा दिया।
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