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डीजल-खाद के बढ़ते खर्च ने बढ़ाई टेंशन… रायगढ़ के किसान ने खोज निकाला कमाई का नया रास्ता

ऑयल पाम खेती से बदली चंद्रशेखर प्रधान की जिंदगी, 50 क्विंटल से 250 क्विंटल तक पहुंचा उत्पादनउद्यान विभाग की पहल का असर, अब जिले के दूसरे किसान भी तेजी से अपना रहे यह मॉडल

रायगढ़। खेती अब पहले जैसी आसान नहीं रही। डीजल के दाम बढ़ रहे हैं, खाद महंगी हो गई है और खेती की लागत लगातार किसानों की चिंता बढ़ा रही है। ऐसे समय में रायगढ़ जिले के एक किसान ने अपनी मेहनत और सही फैसले से यह साबित कर दिया कि अगर खेती में बदलाव अपनाया जाए तो कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं।

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रायगढ़ जिले के प्रगतिशील किसान चंद्रशेखर प्रधान आज ऑयल पाम खेती के जरिए इलाके में चर्चा का विषय बने हुए हैं। उन्होंने साल 2015-16 में अपने खेत में ऑयल पाम की खेती शुरू की थी। शुरुआत में ज्यादा उत्पादन नहीं मिला, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन और वैज्ञानिक तरीके से खेती करते हुए उन्होंने धीरे-धीरे अपनी खेती को सफल बना लिया।

 

आज हालात यह हैं कि जहां शुरुआत में उन्हें करीब 50 क्विंटल एफएफबी उत्पादन मिलता था, वहीं अब उनका उत्पादन बढ़कर करीब 250 क्विंटल तक पहुंच गया है। यानी लगभग 200 क्विंटल की बढ़ोतरी। उत्पादन बढ़ने के साथ उनकी आमदनी में भी बड़ा फर्क आया है और अब उन्हें इस खेती से स्थायी आय मिलने लगी है।

 

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (NMEO–Oil Palm) योजना के तहत उद्यान विभाग रायगढ़ जिले में लगातार किसानों को ऑयल पाम खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। सहायक संचालक उद्यान रंजना माखीजा के निर्देशन में जिले में ऑयल पाम खेती का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। विभागीय जानकारी के मुताबिक वर्ष 2025-26 में जिले में लगभग 80 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम का रोपण किया गया है।

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चंद्रशेखर प्रधान बताते हैं कि पारंपरिक खेती में लगातार बढ़ती लागत से परेशानी बढ़ रही थी। डीजल, खाद और दूसरे कृषि संसाधनों के खर्च ने खेती को महंगा बना दिया था। ऐसे समय में ऑयल पाम खेती उनके लिए फायदे का सौदा साबित हुई। उनका कहना है कि इस खेती में उन्हें पारंपरिक खेती की तुलना में करीब तीन गुना ज्यादा मुनाफा मिल रहा है।

 

उन्होंने यह भी बताया कि विभागीय अधिकारियों से समय-समय पर मिली तकनीकी सलाह ने उन्हें बेहतर उत्पादन लेने में काफी मदद की।

उद्यान विभाग किसानों को ऑयल पाम खेती के लिए बोरवेल, फेंसिंग, ड्रिप सिंचाई और इंटरक्रॉपिंग जैसी सुविधाओं पर अनुदान भी दे रहा है। यही वजह है कि अब जिले के कई किसान इस खेती की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। कृषि विभाग का मानना है कि आने वाले समय में ऑयल पाम खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ खेती की बढ़ती लागत के दबाव को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती

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समाचार रिपोर्टर के रूप में उनका उद्देश्य समाज की समस्याओं और जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर प्रशासन तक पहुँचाना है।

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