CG News:- पहले कोख उजड़ी, फिर मां की मौत… अस्पताल के बाहर फूटा जनाक्रोश, शव रखकर हाईवे जाम, पुलिस-ग्रामीणों में भिड़ंत

CG News:- पेंड्रा। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में एक गर्भवती महिला और उसके नवजात की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इलाज में कथित लापरवाही, निजी अस्पताल की मनमानी और लाखों रुपये की वसूली के आरोपों से भड़के परिजनों व ग्रामीणों ने अस्पताल के मुख्य गेट पर शव रखकर गौरेला-पेंड्रा मार्ग जाम कर दिया। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन जनाक्रोश में बदल गया। नारेबाजी, हंगामे और बढ़ते तनाव के बीच पुलिस और ग्रामीण आमने-सामने आ गए। हालात इतने बिगड़े कि धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बन गई, जबकि उग्र भीड़ ने अस्पताल के सामने खड़े वाहनों में भी तोड़फोड़ कर दी।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के बेंदरचुआ गांव की रहने वाली 22 वर्षीय ज्योति चौधरी, पति संतराम चौधरी को 11 जून को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल गौरेला ले जाया गया था। वहां से डॉक्टरों ने उसे बिलासपुर सिम्स रेफर कर दिया। लेकिन परिजनों का आरोप है कि जोगीसार के पास पहुंचते ही एंबुलेंस चालक को सेमरा स्थित डीडी अस्पताल से फोन आया और मरीज को सिम्स ले जाने के बजाय बीच रास्ते से वापस निजी अस्पताल ले जाया गया।
परिजनों के मुताबिक डीडी अस्पताल में ऑपरेशन हुआ, लेकिन बच्चा मृत पैदा हुआ। इसके बाद ज्योति का इलाज वहीं जारी रखा गया। परिवार को उम्मीद थी कि मां की जान बच जाएगी, लेकिन अगले कुछ दिनों में हालात और बिगड़ते चले गए।
“पहले पैसे जमा करो…” फिर रेफर कर दिया मरीज को
मृतका के परिजनों का आरोप है कि इलाज के पांच दिन बाद अस्पताल प्रबंधन ने दो लाख रुपये जमा कराने का दबाव बनाया। परिवार ने किसी तरह रकम जुटाकर अस्पताल को दे दी। आरोप है कि पैसे लेने के बाद अस्पताल ने ज्योति को सिम्स रेफर कर दिया। वहां पहुंचने के अगले ही दिन दोपहर में उसकी मौत हो गई।
एक ही परिवार से पहले नवजात और फिर मां की मौत की खबर गांव पहुंची तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों ने आरोप लगाया कि गलत इलाज, लापरवाही और पैसों की वसूली ने एक परिवार को पूरी तरह तबाह कर दिया।
शव रखकर सड़क पर बैठ गए ग्रामीण, अस्पताल सील करने की मांग
महिला का शव लेकर पहुंचे परिजनों और ग्रामीणों ने डीडी अस्पताल के मुख्य गेट के सामने शव रख दिया और गौरेला-पेंड्रा मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल प्रबंधन और एंबुलेंस चालक की कथित मिलीभगत की जांच, मां-बेटे की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर एफआईआर और अस्पताल को तत्काल सील करने की मांग की।
जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, वैसे-वैसे गुस्सा भी उफान पर पहुंचता गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो बाद में झड़प में बदल गई। पुलिस ने हालात काबू में करने के लिए कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया।
भीड़ के दबाव में लौटाने पड़े दो लाख रुपये
विरोध प्रदर्शन और बढ़ते जनदबाव के बीच अस्पताल प्रबंधन बैकफुट पर आ गया। आखिरकार नगर पालिका अध्यक्ष राकेश जलान की मौजूदगी में परिजनों को दो लाख रुपये वापस किए गए। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ पैसे लौटाने से मामला खत्म नहीं होगा, मौतों के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए।
मृतका के पति संतराम चौधरी ने कलेक्टर से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, अस्पताल को सील करने और दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है।
दो मौतें और कई सवाल
एक मां और उसके नवजात की मौत ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर मरीज को सिम्स रेफर किया गया था तो उसे बीच रास्ते से निजी अस्पताल क्यों ले जाया गया? इलाज के दौरान आखिर क्या हुआ? और अगर सब कुछ नियमों के तहत हुआ तो फिर भीड़ के सामने दो लाख रुपये वापस क्यों किए गए?
इन सवालों के जवाब अब प्रशासनिक जांच से ही सामने आएंगे, लेकिन फिलहाल एक परिवार ने अपना बच्चा भी खोया है और मां भी। यही दर्द अब पूरे इलाके के गुस्से में बदलता दिखाई दे रहा है।
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