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CG News: जनसुनवाई में जनमत या प्रबंधन? अमाली कोलवाशरी पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने प्रक्रिया की निष्पक्षता पर खड़े किए सवाल

CG News: बिलासपुर जिले के अमाली क्षेत्र में प्रस्तावित कोलवाशरी परियोजना को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। मेसर्स विराज अर्थ फ्यूजन प्राइवेट लिमिटेड की कोलवाशरी को लेकर आयोजित लोक जनसुनवाई में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने खुलकर विरोध दर्ज कराया। विरोध पक्ष ने जनसुनवाई की प्रक्रिया और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इसे स्थानीय जनभावनाओं के विपरीत बताया।

बिलासपुर। कोटा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत अमाली में प्रस्तावित कोलवाशरी परियोजना को लेकर हुई जनसुनवाई के बाद मामला अब प्रशासनिक और सामाजिक बहस का मुद्दा बन गया है। विरोध करने वाले ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से क्षेत्र के पर्यावरण, कृषि और जनजीवन पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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ज्ञापन सौंपकर उठाई आपत्तियां, परियोजना पर रोक की मांग

पूर्व ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष आदित्य दीक्षित के नेतृत्व में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम शिव कुमार बनर्जी और एसडीएम कोटा को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में उन्होंने कहा कि अमाली क्षेत्र में कोलवाशरी स्थापित करना स्थानीय हितों के खिलाफ है। उनका आरोप है कि जिस जमीन को कृषि उपयोग के लिए खरीदा गया था, उसका अब व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है।

पेसा एक्ट और ग्रामसभा की सहमति का मुद्दा

विरोध कर रहे लोगों ने संविधान की पांचवीं अनुसूची और पेसा एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि अमाली ग्राम पंचायत अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आती है।

उनका कहना है कि ऐसे क्षेत्रों में ग्रामसभा की सहमति महत्वपूर्ण होती है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्रामसभा की राय को नजरअंदाज कर परियोजना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

कॉलेज और टाइगर रिजर्व की दूरी को लेकर चिंता

ग्रामीणों ने दावा किया कि प्रस्तावित कोलवाशरी से करीब 200 मीटर की दूरी पर शासकीय महाविद्यालय संचालित है।वहीं अचानकमार टाइगर रिजर्व भी करीब 10 किलोमीटर की हवाई दूरी पर स्थित है। विरोध पक्ष का कहना है कि कोलवाशरी से निकलने वाला प्रदूषण खेती, पर्यावरण, वन्यजीव और स्थानीय स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है।

जनसुनवाई में जन की आवाज या बाहर से जुटाई गई भीड़?”

जनसुनवाई के दौरान सबसे ज्यादा विवाद उस समय सामने आया जब विरोधियों ने आरोप लगाया कि परियोजना के समर्थन में बाहरी लोगों को बुलाया गया।

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आदित्य दीक्षित सहित अन्य लोगों का आरोप है कि कोरबा, दीपका और अन्य क्षेत्रों से लोगों को लाकर समर्थन में खड़ा किया गया, जबकि प्रभावित गांवों के ग्रामीण अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे थे।विरोध करने वालों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि परियोजना को स्थानीय समर्थन प्राप्त है तो बाहर से लोगों की जरूरत क्यों पड़ी।

बाउंसरों की मौजूदगी पर भी उठे सवाल

ग्रामीणों ने जनसुनवाई स्थल पर बाउंसरों की मौजूदगी को लेकर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि जनसुनवाई का उद्देश्य जनता की राय जानना होता है, ऐसे में सुरक्षा और बाहरी लोगों की मौजूदगी ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रशासन की भूमिका पर ग्रामीणों की नजर

आदित्य दीक्षित और अन्य जनप्रतिनिधियों ने कहा कि ग्रामीणों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया है।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनभावनाओं की अनदेखी करते हुए परियोजना को मंजूरी दी जाती है तो आने वाले समय में क्षेत्र में विरोध और बढ़ सकता है।

उन्होंने कहा कि जनसुनवाई सिर्फ औपचारिकता नहीं बल्कि जनता की राय जानने की प्रक्रिया है। यदि आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया तो ऐसी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

विरोध में बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद

इस दौरान संदीप शुक्ला, कुलवंत सिंह, मोहन प्रताप मरकाम, प्रभु जगत, देवेंद्र कौशिक, जब्बार खान, कान्हा गुप्ता, दिलीप श्रीवास, कमलू कश्यप, भरत पटेल, चोलाराम नायक, वसंत यादव, राजू सिदार, खिलावन पोर्ते, दुखीराम, कमल बिंझवार, महाराज सिंह, रामलोचन, सुंदर साहू, सतीश जोशी, मनोज गुप्ता, राकेश गुप्ता, सालिक राम, प्रकाश मरकाम, कुलदीप यादव, चरन साहू, राजू साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

फिलहाल अमाली कोलवाशरी परियोजना को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। अब निगाहें प्रशासन के अगले कदम और जनसुनवाई में दर्ज आपत्तियों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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Kanha Tiwari

छत्तीसगढ़ के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्होंने पिछले 10 वर्षों से लोक जन-आवाज को सशक्त बनाते हुए पत्रकारिता की अगुआई की है।

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