ब्रेकिंग न्यूज़

छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित कबीर चबूतरा, संत कबीरदास जी का 500 साल पुराना नाता, यहां साधना कर स्थानीय लोगों को सत्य, प्रेम और भाईचारे का दिया संदेश।

आज संत शिरोमणि कबीर दास जी की जयंती है। 15वीं शताब्दी के महान संत, समाज सुधारक और भक्ति आंदोलन के प्रमुख कवि कबीर दास जी का गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले से 500 साल पुराना ऐतिहासिक नाता है। मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ सीमा पर गौरेला के आमडोब के पास स्थित 'कबीर चबूतरा' पर संत कबीर ने प्रवास किया था। इतिहासकारों के अनुसार, लगभग 500 वर्ष पूर्व जब संत कबीर देश भर में भ्रमण कर रहे थे, तब उनका प्रवास गौरेला के आमडोब गांव के पास हुआ था। जिस स्थान पर वे रुके थे, उसे आज 'कबीर चबूतरा' के नाम से जाना जाता है। यहां कबीर जी की चरण पादुका स्थापित है और एक छोटा मंदिर भी बना हुआ है। मान्यता है कि संत कबीर ने यहां साधना की और स्थानीय लोगों को सत्य, प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। आज भी देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु कबीर चबूतरा पर कबीर जी की चरण पादुका और मंदिर के दर्शन करने आते हैं। लोग कबीर की वाणी "साईं इतना दीजिए, जामे कुटुंब समाय" और "बुरा जो देखन मैं चला" जैसे दोहों से जीवन में प्रेरणा लेते हैं। कबीर की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक संत कबीर ने जीवन भर आडंबर, जात-पात और अंधविश्वास का विरोध किया। उनकी वाणी में हिंदू-मुस्लिम एकता, सामाजिक समरसता और मानवता का संदेश मिलता है। "पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय" जैसे दोहे आज भी लोगों को कर्म और सच्चाई के रास्ते पर चलने की सीख देते हैं। हमारे पुरखे बताते हैं कि कबीर साहब यहां रुके थे। ये हमारे लिए गर्व की बात है। कबीर चबूतरा हमारी आस्था का केंद्र है। दूर-दूर से लोग यहां मत्था टेकने आते हैं। कबीर जी के विचारों से हमें जीने की राह मिलती है। इतने बड़े संत का हमारे जिले से नाता है, लेकिन आज कबीर जयंती पर प्रशासन की ओर से कोई कार्यक्रम नहीं हुआ। कम से कम कबीर चबूतरा पर एक छोटा कार्यक्रम, भजन-कीर्तन या विचार गोष्ठी होनी चाहिए थी, ताकि नई पीढ़ी को कबीर के बारे में पता चले।" स्थानीय लोगों का कहना है कि संत कबीर की स्मृतियों को संजोने और उनकी शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रशासन को हर साल कबीर जयंती पर कबीर चबूतरा पर कार्यक्रम आयोजित करना चाहिए। इससे न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि कबीर के संदेश भी लोगों तक पहुंचेंगे। संत कबीर दास जयंती ऐतिहासिक स्थल कबीर चबूतरा, आमडोब, इतिहास की माने तो 500 साल पहले संत कबीर का प्रवास हुआ था मान्यता है यहां चरण पादुका स्थापित, मंदिर बना है , जहाँ श्रद्धालु देश-विदेश से दर्शन करने आते हैं। पास में ही मध्य प्रदेश स्थित धर्म आस्था पर्यटन तीर्थ नगरी अमरकंटक में कबीर दास जयंती कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं लेकिन गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में कोई भी कार्यक्रम नहीं किया गया,जिसको लेकर स्थानीय लोगों के द्वारा प्रशासन से संत कबीर दास जयंती कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की गई है...

Was this article helpful?
YesNo

Live Cricket Info

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button