
CG Monsoon Session: छत्तीसगढ़ विधानसभा में बिलासपुर की राशन दुकानों का मामला गरमा गया। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने खाद्य विभाग पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया कि सरकारी राशन दुकानों में नियमों के खिलाफ मसाले बिकवाए जा रहे हैं और इसके पीछे विभागीय अधिकारियों का दबाव है। इतना ही नहीं, उन्होंने सरकारी चावल की कथित हेराफेरी और कालाबाजारी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनके पास पुख्ता प्रमाण हैं। मंत्री ने पूरे मामले की जांच कराने के निर्देश दे दिए हैं।
बिलासपुर। बिलासपुर जिले में संचालित सरकारी उचित मूल्य दुकानों में कथित अनियमितताओं, राशन सामग्री की हेराफेरी और विभागीय अधिकारियों की भूमिका को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र गरमा गया। बेलतरा से भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने सदन में खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों के संरक्षण में राशन दुकानों में नियमों के विपरीत गतिविधियां संचालित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों द्वारा राशन दुकान संचालकों पर दबाव बनाए जाने के पुख्ता प्रमाण उनके पास मौजूद हैं।
‘हर महीने निरीक्षण’ के सरकारी दावे पर विधायक ने उठाए सवाल
प्रश्नकाल के दौरान विधायक सुशांत शुक्ला ने सबसे पहले उचित मूल्य दुकानों के भौतिक सत्यापन को लेकर सवाल पूछा। जवाब में खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने बताया कि खाद्य निरीक्षक हर महीने लगभग 15 दिनों तक उचित मूल्य दुकानों का भौतिक सत्यापन करते हैं।
लेकिन विधायक इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। शिकायतों के बावजूद खाद्य निरीक्षक न तो नियमित निरीक्षण करते हैं और न ही खाद्यान्न के रखरखाव और वितरण से जुड़े अभिलेखों की गंभीरता से जांच करते हैं।
राशन दुकान में मसाले बेचने का आदेश किसने दिया?
इसके बाद विधायक ने सदन में सीधा सवाल दागा कि क्या सरकारी राशन दुकानों से खाद्यान्न के साथ मसाले बेचने का कोई सरकारी प्रावधान या निर्देश है?
इस पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने स्पष्ट जवाब दिया कि सरकारी राशन दुकानों में मसाले बिकवाने का कोई प्रावधान नहीं है।
विधायक का दावा- अधिकारियों के दबाव के सबूत मेरे पास
मंत्री के जवाब के बाद विधायक सुशांत शुक्ला ने सदन में आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी राशन दुकान संचालकों पर मसाले बेचने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास इस पूरे मामले के पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं और सरकार को इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
खाद्य मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि उन्हें इस संबंध में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है, लेकिन विधायक द्वारा उठाए गए मुद्दे की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी चावल की हेराफेरी पर भी उठे सवाल
विधानसभा में उठे इस मुद्दे के बीच बिलासपुर जिले में सरकारी राशन और चावल की कथित हेराफेरी को लेकर भी चर्चा तेज हो गई। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से आरोप लगाए जाते रहे हैं कि सरकारी चावल के परिवहन और वितरण में अनियमितताएं हो रही हैं। कुछ लोगों द्वारा यह भी आरोप लगाया जाता है कि परिवहन से जुड़े कुछ स्थानों पर सरकारी चावल के दुरुपयोग और कालाबाजारी जैसी गतिविधियां हो रही हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और न ही इस संबंध में कोई जांच निष्कर्ष सार्वजनिक किया गया है।
विधानसभा में उठे सवालों के बाद बढ़ी जिम्मेदारी
मामला विधानसभा में उठने के बाद अब निगाहें सरकार की जांच पर टिक गई हैं। यदि विधायक द्वारा बताए गए साक्ष्य जांच में सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। साथ ही राशन दुकानों में कथित रूप से मसाले बिकवाने और सरकारी राशन वितरण व्यवस्था से जुड़े आरोपों की भी सच्चाई सामने आ सकती है।
गरीबों तक सरकारी राशन बिना किसी गड़बड़ी के पहुंचे, यह सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में अब यह देखना होगा कि जांच कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और क्या दोषियों पर वास्तव में कार्रवाई होती है या मामला सिर्फ विधानसभा की बहस तक सीमित रह जाता है।

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