CG News:- 150 घरों में घुसा पानी, सड़क पर उतरा गुस्सा… NH-49 किया जाम, घंटों थमी रफ्तार; बोले- हर बारिश में डूबता है हमारा गांव

CG News:- बिलासपुर में लगातार हो रही बारिश अब लोगों के गुस्से में बदल गई है। 150 से ज्यादा घरों में पानी घुसने के बाद ग्रामीणों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-49 पर चक्का जाम कर दिया। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने हाईवे पर बैठकर प्रशासन और एनएचएआई के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि अधूरा पुल और खराब ड्रेनेज सिस्टम हर बारिश में उनके गांव को डुबो देता है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक सिर्फ आश्वासन देता रहा।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश के बाद हालात बिगड़ते जा रहे हैं। जलभराव और प्रशासनिक लापरवाही से नाराज तोरवा क्षेत्र की धूमाधाम ग्राम पंचायत के ग्रामीण शनिवार को सड़क पर उतर आए। सैकड़ों ग्रामीणों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-49 (NH-49) पर चक्का जाम कर दिया, जिससे हाईवे के दोनों ओर भारी वाहनों, बसों और कारों की लंबी कतारें लग गईं। कई घंटे तक यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा।
ग्रामीणों का आरोप है कि राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के दौरान पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। पुल और ड्रेनेज का निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया, जिसके कारण बारिश का पूरा पानी गांव में भर रहा है। हालात यह हैं कि 150 से अधिक घरों में पानी घुस गया और लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
घर बने तालाब, बर्बाद हुआ सामान… सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और बच्चों को
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने बताया कि घरों में पानी घुसने से घरेलू सामान खराब हो गया है। कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की नौबत आ गई है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। खेतों में भी पानी भरने से फसलों के नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एनएचएआई और निर्माण एजेंसी को कई बार शिकायत दी गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। बारिश के बीच बड़ी संख्या में महिलाएं भी सड़क पर उतर आईं और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
बोले- सड़क बनी, लेकिन गांव डूब गया
ग्रामीणों का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग बनने के बाद उनकी मुश्किलें कम होने के बजाय और बढ़ गईं। सड़क निर्माण के दौरान न तो पर्याप्त पुल बनाए गए और न ही पानी निकासी के लिए स्थायी ड्रेनेज की व्यवस्था की गई। नतीजा यह है कि हर बारिश में पूरा गांव जलमग्न हो जाता है। इस बार हालात ज्यादा खराब होने पर लोगों ने आंदोलन का रास्ता चुना।
मुआवजा और स्थायी समाधान की मांग पर अड़े ग्रामीण
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जलभराव से प्रभावित परिवारों को तत्काल मुआवजा दिया जाए, राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए और गांव में पानी निकासी के लिए स्थायी पुल एवं ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाए। ग्रामीणों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा।
प्रशासन पहुंचा, लेकिन नहीं माने ग्रामीण
चक्का जाम की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने ग्रामीणों से चर्चा कर जल्द समाधान का भरोसा दिलाया, लेकिन प्रदर्शनकारी सिर्फ मौखिक आश्वासन पर नहीं माने। उन्होंने लिखित आश्वासन और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की। इसी कारण लंबे समय तक हाईवे पर जाम लगा रहा और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हजारों यात्रियों को घंटों तक परेशानी झेलनी पड़ी।
अब सबसे बड़ा सवाल… हर बारिश में आखिर कब तक डूबता रहेगा गांव?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पुल, ड्रेनेज और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था बना दी जाती, तो 150 से ज्यादा घरों में पानी नहीं घुसता। अब लोगों की निगाह प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है कि इस बार भी सिर्फ आश्वासन मिलेगा या वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान होगा।

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