
CG News:- छत्तीसगढ़ में अपचारी बालकों के सुरक्षित रखे जाने वाले संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बिलासपुर की घटना की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि उत्तर छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित प्लेस ऑफ सेफ्टी सेंटर से तीन अपचारी बालक फरार हो गए। बताया जा रहा है कि तीनों ने बाथरूम के रोशनदान की ग्रिल उखाड़ी और उसी रास्ते सेंटर से निकल भागे। घटना के बाद पुलिस उनकी तलाश में जुट गई है।
सरगुजा। गांधीनगर थाना क्षेत्र स्थित प्लेस ऑफ सेफ्टी सेंटर में शुक्रवार सुबह सुरक्षा व्यवस्था उस समय ध्वस्त होती नजर आई, जब सेंटर में निरुद्ध तीन अपचारी बालक फरार हो गए। जानकारी के मुताबिक सुबह सभी बच्चों को रोजाना की तरह योग के लिए उठाया गया था। योग समाप्त होने के बाद तीनों बाथरूम पहुंचे और वहां लगे रोशनदान की ग्रिल निकालकर बाहर निकल गए। काफी देर तक जब वे वापस नहीं लौटे तो कर्मचारियों को घटना की जानकारी हुई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और फरार अपचारी बालकों की तलाश शुरू कर दी गई।
गौरतलब है कि प्लेस ऑफ सेफ्टी सेंटर में 16 वर्ष से अधिक और 18 वर्ष से कम आयु के उन अपचारी बालकों को रखा जाता है, जिन पर गंभीर अपराधों के मामले दर्ज होते हैं। ऐसे संस्थानों से लगातार बच्चों के फरार होने की घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
कुछ दिन पहले बाल संप्रेक्षण गृह से भी भागे थे 13 अपचारी
इसी परिसर के समीप स्थित कन्या परिसर रोड, बिशुनपुर के बाल संप्रेक्षण गृह से भी कुछ दिन पहले 13 अपचारी बालक फरार हो गए थे। उस घटना में अपचारी बच्चों ने पुराने दरवाजे को क्षतिग्रस्त कर बाहर निकलने का रास्ता बनाया था। कुल 14 बच्चे परिसर से बाहर आए थे, जिनमें से एक को तत्काल पकड़ लिया गया, जबकि बाकी अहाता फांदकर फरार हो गए थे।
यह एक महीने के भीतर बाल संप्रेक्षण गृह से बच्चों के भागने की दूसरी बड़ी घटना थी।
23 जून और फरवरी में भी हुई थी ऐसी ही घटना
इससे पहले 23 जून को बारिश का फायदा उठाकर 13 अपचारी बालक खिड़की तोड़कर फरार हो गए थे। वहीं फरवरी महीने में भी इसी संस्थान से अपचारी बालकों के भागने की घटना सामने आई थी। लगातार हो रही इन घटनाओं से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक बार-बार कैसे हो रही है?
सरगुजा, सूरजपुर और कोरिया के रहने वाले हैं अपचारी
जानकारी के अनुसार फरार हुए नाबालिग सरगुजा, सूरजपुर और कोरिया जिले के रहने वाले हैं। उन्हें चोरी, लूट, दुष्कर्म और हत्या जैसे गंभीर मामलों में निरुद्ध कर बाल संप्रेक्षण गृह और प्लेस ऑफ सेफ्टी सेंटर में रखा गया था।
अब पुलिस फरार तीनों अपचारी बालकों की तलाश में जुटी हुई है। वहीं लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने यह बहस भी तेज कर दी है कि जिन संस्थानों को सुरक्षा और सुधार का केंद्र माना जाता है, यदि वहीं से अपचारी आसानी से निकल जा रहे हैं, तो जिम्मेदारी आखिर तय किसकी होगी?
सबसे बड़ा सवाल…
बिलासपुर के बाद अंबिकापुर और उससे पहले भी इसी परिसर से कई बार अपचारी बालकों के भागने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हर बार जांच के आदेश, हर बार तलाश, हर बार सुरक्षा बढ़ाने के दावे… लेकिन सवाल अब भी वहीं है—क्या इन संस्थानों की सुरक्षा सिर्फ फाइलों तक सीमित है, या जिम्मेदारी तय करने की भी कोई व्यवस्था है? यही वह प्रश्न है जिसका जवाब व्यवस्था को देना होगा।


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