CG News:- राजस्व प्रकरणों पर लापरवाही भारी! तहसीलदार सस्पेंड, अफसरों के निरीक्षण में खुली पोल; समय-सीमा और आर्थिक सहायता के मामलों में गड़बड़ी पर बड़ी कार्रवाई

CG News:- राजस्व प्रकरणों को समय पर निपटाने में लापरवाही घुमका तहसीलदार मुकेश ठाकुर पर भारी पड़ गई। संभागायुक्त सत्यनारायण राठौर ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निरीक्षण के दौरान राजस्व प्रकरणों के साथ RBC 6-4 के आर्थिक सहायता मामलों के निराकरण में भी गंभीर लापरवाही सामने आई।
निरीक्षण में सामने आई लापरवाही के बाद प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि राजस्व प्रकरणों को समय-सीमा में निपटाना होगा। RBC 6-4 के तहत आर्थिक सहायता से जुड़े मामलों में भी देरी को गंभीरता से लिया गया और कार्रवाई करते हुए तहसीलदार को निलंबित कर दिया गया।
राजनांदगांव। राजस्व प्रकरणों के निराकरण में लापरवाही बरतना घुमका तहसीलदार मुकेश ठाकुर को भारी पड़ गया। दुर्ग संभागायुक्त सत्यनारायण राठौर ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। कार्रवाई समय-सीमा के भीतर राजस्व प्रकरणों के साथ-साथ RBC 6-4 के आर्थिक सहायता से जुड़े मामलों के निराकरण में लापरवाही के चलते की गई है।
पढ़िए, कैसे खुली लापरवाही की पोल?
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक पिछले दिनों दुर्ग संभागायुक्त सत्यनारायण राठौर राजनांदगांव प्रवास पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कलेक्टर जितेन्द्र यादव के साथ घुमका तहसील का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान समय-सीमा के भीतर राजस्व प्रकरणों के निराकरण में लापरवाही की शिकायतें सामने आईं।
बताया जाता है कि शीर्ष अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच की तो राजस्व प्रकरणों के साथ RBC 6-4 के आर्थिक सहायता प्रकरणों के निराकरण में भी तहसीलदार मुकेश ठाकुर की गंभीर लापरवाही सामने आई। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए निलंबन की कार्रवाई की गई।
निरीक्षण के बाद हुआ बड़ा एक्शन
मामले में दुर्ग संभागायुक्त सत्यनारायण राठौर ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा अधिनियम 1966 की धारा 9 के तहत तहसीलदार मुकेश ठाकुर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय राजनांदगांव कलेक्टर कार्यालय निर्धारित किया गया है।
समय–सीमा में काम नहीं हुआ तो कार्रवाई तय
इस कार्रवाई को राजस्व प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण को लेकर प्रशासन की सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर आर्थिक सहायता से जुड़े मामलों में देरी सीधे जरूरतमंदों को प्रभावित करती है, इसलिए ऐसे मामलों में लापरवाही को लेकर जिम्मेदारी तय की जा रही है।
अब सवाल भी उठता है…
राजस्व के कागज अगर समय पर नहीं चलेंगे तो आम आदमी की फाइल भी अटकती रहेगी और आर्थिक सहायता का इंतजार भी लंबा होगा। ऐसे में तहसीलदार के निलंबन के बाद सवाल यही है—क्या अब बाकी लंबित प्रकरणों की भी रफ्तार बढ़ेगी, या कार्रवाई का असर सिर्फ एक निलंबन आदेश तक ही सीमित रहेगा? प्रशासन की सख्ती का असली असर अब फाइलों के निपटारे में दिखेगा।
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