CG News:- गड्ढे में समा गई मजदूर की जिंदगी! 50 लाख पर अड़े परिजन, 20 लाख में हुआ समझौता

CG News:- बेमेतरा के बेरला इलाके की नेवनारा स्थित लोहिया पेपर मिल में एक दर्दनाक हादसे ने मजदूर की जिंदगी छीन ली। जेसीबी से खोदे गए गड्ढे में नाप-जोख के दौरान उतरे मजदूर मोहनदास बंजारे पर अचानक मिट्टी का पहाड़ टूट पड़ा। गुरुवार शाम करीब 4 बजे हुए हादसे के बाद शुक्रवार देर शाम तक मुआवजे को लेकर परिजनों और फैक्ट्री प्रबंधन के बीच खींचतान चलती रही। आखिरकार 50 लाख की मांग के मुकाबले 20 लाख रुपये मुआवजे पर समझौता हुआ। प्रबंधन ने 20 लाख का चेक देने के साथ अंतिम संस्कार और दशगात्र के लिए 51 हजार रुपये नकद देने की बात कही।
50 लाख चाहिए थे, 20 लाख पर थमा विवाद
मोहनदास की मौत के बाद परिवार ने 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग रखी थी। परिजन अपनी मांग पर अड़े रहे और शुक्रवार को प्रबंधन के साथ लंबी बातचीत चली। मृतक की बेटी सुनीता बंजारे ने बताया कि परिवार ने अलग-अलग सदस्यों के नाम 10-10 लाख रुपये के चेक देने की मांग भी रखी थी, लेकिन प्रबंधन इसके लिए तैयार नहीं हुआ।
काफी देर चली बातचीत के बाद आखिरकार 20 लाख रुपये मुआवजे पर सहमति बनी।
24 घंटे तक मर्च्युरी में पड़ा रहा शव
गुरुवार शाम हादसे के बाद मोहनदास का शव बेरला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। लेकिन करीब 24 घंटे तक पोस्टमार्टम नहीं हो सका। शव मर्च्युरी में रखा रहा।
शुक्रवार शाम करीब 6 बजे पंचनामा की कार्रवाई शुरू हुई। इसी दौरान मुआवजे को लेकर परिवार और फैक्ट्री प्रबंधन के बीच बातचीत होती रही। मौके पर पुलिस बल और तहसीलदार भी मौजूद रहे।
बारिश आई और धंस गई मिट्टी, गड्ढे में दब गया मजदूर
फैक्ट्री प्रबंधन के अनुसार जेसीबी से खोदे गए गड्ढे की नाप-जोख के दौरान मोहनदास उसके भीतर गया था। इसी बीच बारिश शुरू हुई और अचानक मिट्टी धंस गई। देखते ही देखते मजदूर मिट्टी के नीचे दब गया और उसकी मौत हो गई।
प्रबंधन का कहना है कि कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण और सेफ्टी बेल्ट दिए जाते हैं, लेकिन हादसे के वक्त मोहनदास ने सुरक्षा उपकरण का इस्तेमाल नहीं किया था। प्रबंधन ने परिजनों को घटना की सूचना तत्काल देने और अंतिम संस्कार के लिए 51 हजार रुपये देने की बात कही है।
बेटी का आरोप- पहले कहा तबीयत खराब है, पहुंचने पर हो चुकी थी मौत
मृतक की बेटी सुनीता बंजारे ने फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि परिवार को फोन कर बताया गया कि मोहनदास की तबीयत खराब है। परिजन जब फैक्ट्री पहुंचे तो उनके पिता की मौत हो चुकी थी।
सुनीता का कहना है कि फैक्ट्री में मजदूरों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। उन्होंने बताया कि मोहनदास और उनकी पत्नी आरती करीब 5 साल से पेपर मिल में काम कर रहे थे। आरती की तबीयत खराब होने के चलते वह हादसे से करीब 7 दिन पहले कबीरधाम स्थित अपने गांव चली गई थीं।
मुआवजे पर समझौता हो गया, लेकिन सवाल अब भी बाकी है—अगर सुरक्षा इंतजाम पूरे थे तो गड्ढे मजदूर की जान कैसे चली गई?
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