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Bilaspur News:-अमाली कोल वाशरी विवाद: जनविरोध तेज, कांग्रेस की एंट्री से बढ़ी हलचल — बैज के आंदोलन में उतरने के संकेत से सियासत गरम

Bilaspur News:- अमाली की कोल वाशरी अब सिर्फ एक परियोजना नहीं, बल्कि सवालों का सिलसिला बनती जा रही है। जनसुनवाई में उठे विरोध के बाद ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया और माहौल को प्रभावित करने की कोशिश हुई। अब कांग्रेस भी इस विरोध के साथ खड़ी नजर आ रही है और दीपक बैज के आंदोलन में शामिल होने के संकेत ने मामले को और राजनीतिक रंग दे दिया है।लेकिन असली सवाल यही है—क्या यह जनसुनवाई वाकई जनता की सहमति थी, या सिर्फ एक औपचारिकता? और क्या विकास के नाम पर स्थानीय जीवन, खेती और पर्यावरण की कीमत चुकानी पड़ेगी?

Bilaspur बिलासपुर। कोटा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत अमाली में प्रस्तावित कोल वाशरी परियोजना को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। मेसर्स विराज अर्थ फ्यूशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित कोल वाशरी का विरोध कर रहे गांव वालों के पक्ष में अब कांग्रेस भी खुलकर सामने आने लगी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने संकेत दिए हैं कि जिला अध्यक्षों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद वे ग्रामीणों की भावनाओं के अनुरूप आंदोलन में शामिल होंगे।

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गौरतलब है कि परियोजना की जनसुनवाई 19 जून को आयोजित की गई थी। जनसुनवाई के दौरान प्रभावित ग्रामों के ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में कोल वाशरी का विरोध किया था। ग्रामीणों का कहना था कि कोल वाशरी शुरू होने से क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ेगा, खेती और जल स्रोत प्रभावित होंगे तथा स्थानीय जनजीवन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। जनसुनवाई में कांग्रेस नेता एवं पूर्व जनपद अध्यक्ष संदीप शुक्ला भी ग्रामीणों के साथ मौजूद रहे और कोल वाशरी के विरोध का समर्थन किया। विरोध करने वालों का आरोप है कि जनसुनवाई के दौरान परियोजना समर्थक माहौल बनाने के लिए बाहरी लोगों को बुलाया गया तथा हंगामे के बीच जनसमर्थन दिखाने की कोशिश की गई। इस घटनाक्रम के बाद प्रभावित गांवों के लोगों में नाराजगी बढ़ गई। बताया गया कि पूरे मामले की जानकारी लेकर संदीप शुक्ला ने नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज से मुलाकात की। उन्होंने जनसुनवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों की आपत्तियों और कथित अनियमितताओं की जानकारी दी। इसके बाद दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस प्रभावित ग्रामीणों की आवाज के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि जिला अध्यक्षों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद वे स्वयं आंदोलन में शामिल होंगे और ग्रामीणों की भावनाओं के अनुरूप आगे की रणनीति तय की जाएगी। इस बयान के बाद क्षेत्र में प्रस्तावित कोल वाशरी को लेकर राजनीतिक हलचल और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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जनसुनवाई पर उठ रहे सवाल

अमाली में प्रस्तावित कोल वाशरी की 19 जून को हुई जनसुनवाई अब विवादों में घिर गई है। विरोध कर रहे ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि जनसुनवाई के दौरान स्थानीय लोगों की आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया गया। उनका कहना है कि प्रभावित क्षेत्र से बाहर के लोगों को लाकर समर्थन का माहौल बनाने की कोशिश की गई। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध की आवाज को दबाने के लिए हंगामे जैसी स्थिति बनाई गई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रभावित गांवों में असंतोष बढ़ा और लोगों ने दोबारा संगठित होकर आंदोलन की रणनीति तैयार करना शुरू किया। ग्रामीणों का कहना है कि पर्यावरण और आजीविका से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दिए बिना किसी भी परियोजना को मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए।

कांग्रेस ने आंदोलन में उतरने के दिए संकेत

कोल वाशरी के मुद्दे पर कांग्रेस अब खुलकर ग्रामीणों के साथ खड़ी दिखाई दे रही है। कांग्रेस नेता संदीप शुक्ला ने प्रदेश नेतृत्व के सामने पूरे मामले को रखा और जनसुनवाई प्रक्रिया पर सवाल उठाए। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आंदोलन में शामिल होने की बात कही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता की भावनाओं के खिलाफ कोई निर्णय स्वीकार नहीं करेगी। जिला अध्यक्षों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद पार्टी इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाएगी। इससे आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलने की संभावना बढ़ गई है और आने वाले दिनों में क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन तेज हो सकता है।

ग्रामीणों की चिंता: प्रदूषण और खेती पर असर

प्रस्तावित कोल वाशरी को लेकर प्रभावित गांवों के लोगों की सबसे बड़ी चिंता पर्यावरण और आजीविका को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि कोल वाशरी शुरू होने से धूल और प्रदूषण बढ़ेगा, जिससे खेतों की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है। जल स्रोतों पर असर पड़ने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की भी आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों का विरोध नहीं है, लेकिन ऐसे उद्योग नहीं लगाए जाने चाहिए जिनसे स्थानीय जीवन और संसाधनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़े। लोगों ने मांग की है कि उनकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार कर पारदर्शी तरीके से निर्णय लिया जाए।

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Kanha Tiwari

छत्तीसगढ़ के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्होंने पिछले 10 वर्षों से लोक जन-आवाज को सशक्त बनाते हुए पत्रकारिता की अगुआई की है।

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