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Bilaspur News:- नशे में डूबता बचपन, बढ़ता अपराध…सड़कछाप कबाड़ी बने करोड़पति.. आखिर कब होगा अवैध कबाड़ नेटवर्क पर आर्थिक प्रहार? कौन सा थाने पहले पायदान पर ?

Bilaspur News:- बिलासपुर में अवैध कबाड़ कारोबार को लेकर एक बार फिर सवाल तेज हो गए हैं। आरोप है कि चोरी के सामान की खरीद-फरोख्त और नाबालिगों में बढ़ते नशे के पीछे इस नेटवर्क की बड़ी भूमिका है। ऐसे में मांग उठ रही है कि सिर्फ कबाड़ जब्त करने तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि जिन लोगों पर अवैध कारोबार के आरोप हैं, उनकी संपत्तियों, बैंक खातों और आय के स्रोत की भी गहन आर्थिक जांच कर पूरे नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की जाए। इस पूरे खेल में सड़कछाप कबाड़ी आज करोड़ो के आसामी बन गए है और अब पैसों के दम पर अवैध हथियार सहित गंभीर वारदातों में भी नजर आने लगे है। लगातार शहर में बढ़ रही बाइक और सरकारी चोरियों की घटना में चर्चित कबाड़ियों द्वारा नाबालिगों को संरक्षण में इन्हें अंजाम दिया जा रहा है,जानकारी के अनुसार कबाड़ी एक विशेष समुदाय के लोग सिंडिकेट बना कर काम कर रहे और इन्हीं का एक चर्चित चेहरा प्रभाविशील लोगो के नाम पर मध्यस्थता की भूमिका निभा कर मीडिया से लेकर पुलिस विभाग तक का मैनेजमेंट का जिम्मा उठा रहा है।

बिलासपुर। शहर में बढ़ते अवैध कबाड़ कारोबार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और स्कूल बैग होने चाहिए, उसी उम्र में कई नाबालिग कबाड़ के ढेरों के बीच काम करते और कथित तौर पर चोरी के सामान की सप्लाई चेन का हिस्सा बनते दिखाई देने के आरोप सामने आते रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष आर्थिक जांच हो, तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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सूत्रों के अनुसार शहर के अलग-अलग हिस्सों में नाबालिग चोरी का सामान कबाड़ियों तक पहुंचाते हैं और बदले में मिलने वाले पैसों से नशे की गिरफ्त में फंसते जा रहे हैं। समय-समय पर यह आरोप भी सामने आते रहे हैं कि कुछ कबाड़ ठिकानों पर कम उम्र के बच्चों से काम कराया जाता है। इसका असर यह है कि कई बच्चे शिक्षा और खेल से दूर होकर अपराध और नशे के दुष्चक्र में फंस रहे हैं।

सड़क किनारे से करोड़ों की संपत्ति तकउठ रहे सवाल

शहर में चर्चा का विषय यह भी है कि कुछ कबाड़ कारोबारी, जिन्होंने कभी सड़क किनारे छोटे स्तर से कारोबार शुरू किया था, आज करोड़ों रुपये की संपत्तियों के मालिक बताए जाते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि उनकी आय का स्रोत क्या है? यदि सारी संपत्ति वैध आय से अर्जित की गई है तो उसकी जांच में किसी को आपत्ति क्यों होनी चाहिए, और यदि अवैध कमाई के आरोप हैं तो अब तक व्यापक आर्थिक जांच क्यों नहीं हुई?

कई इलाकों में लंबे समय से लगते रहे हैं आरोप

सिरगिट्टी, सरकंडा और सकरी जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर कबाड़ कारोबार संचालित होने की चर्चाएं लंबे समय से होती रही हैं। समय-समय पर सरकारी विभागों के सामान की चोरी, बाइक चोरी और अन्य संपत्ति संबंधी अपराधों के पीछे कबाड़ नेटवर्क की भूमिका के आरोप भी लगते रहे हैं।

गली-गली कबाड़, बढ़ता क्राइम… सरकंडा और सिरगिट्टी में आखिर क्यों नहीं थम रहा नेटवर्क?

सरकंडा और सिरगिट्टी क्षेत्र में तो कुकुरमुत्ते की तरह कबाड़ का कारोबार फल फूल रहा है, जहां एक ओर सिरगिट्टी क्षेत्र कबाड़ियों का हब बनता जा रहा है तो सरकंडा क्षेत्र में गली गली कबाड़ी दुकान सजा कर बैठे हुए है अक्सर सरकंडा क्षेत्र में कबाड़ ठिकानो में वर्दीधारियों और बिना सादे ड्रेस में पुलिस जवानों की आवाजाही लगी रहती है। दावा तो यहा तक किया जाता है सरकंडा थाना ने तो थाने से पहले पूछताछ के लिए अलग कमरा तैयार किया हुआ है जहां कुछ पुलिसकर्मियों की सादे ड्रेस में तैनाती रहती है और यही से पूरी सेटिंग का खेल होता है हालांकि यहां किसके आदेश पर सादे ड्रेस में पुलिस जवानों की तैनाती रहती है यह भी अदृश्य रहस्य बना हुआ है। सरकंडा क्षेत्र में लगातार हो रही चोरिया और बढ़ती वारदात के पीछे क्षेत्र के मोहल्ले मोहल्ले में खुली कबाड़ियों का बड़ा कनेक्शन का दावा किया जाता रहा है लेकिन एक चर्चित कबाड़ी के अलावा क्षेत्र में अन्य कबाड़ियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं होने से सरकंडा थाना क्षेत्र में नशे और क्राइम का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है। और सकरी थाना क्षेत्र कबाड़ के मामले में जिले में तीसरे पायदान पर बना हुआ है।

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सिर्फ कबाड़ जब्ती या पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई?

स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई अक्सर कबाड़ जब्त करने या प्रकरण दर्ज करने तक सीमित रह जाती है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि पुलिस सट्टा, जुआ और नशे के कारोबार से जुड़े मामलों में आर्थिक प्रहार करते हुए बैंक खाते, निवेश, बेनामी संपत्तियों और आय के स्रोत की जांच करती है, तो अवैध कबाड़ कारोबार के मामलों में भी इसी तरह की वित्तीय जांच क्यों नहीं की जाती?

मांग यह भी उठ रही है कि जिन लोगों पर अवैध कबाड़ कारोबार के आरोप लगते रहे हैं, उनके बैंक खातों, आयकर रिकॉर्ड, रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों और पुराने आपराधिक मामलों की भी व्यापक जांच की जाए।

प्रभावशाली नेटवर्क की भी हो रही चर्चा

शहर में यह चर्चा भी है कि कुछ प्रभावशाली कबाड़ कारोबारियों के मजबूत नेटवर्क और कथित संरक्षण के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई का अपेक्षित असर दिखाई नहीं देता। आरोप है कि सीमित कार्रवाई के बाद भी कारोबार पहले की तरह चलता रहता है, जिससे कानून के प्रभाव को लेकर भी सवाल उठते हैं।

जुलूस की तस्वीर भी बनी थी चर्चा का विषय

कुछ समय पहले वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर कबाड़ कारोबार से जुड़े कई ठिकानों पर कार्रवाई की गई थी। उसी दौरान एक चर्चित आरोपी को पुलिस अभिरक्षा में जुलूस के रूप में ले जाया गया था। उस दौरान आरोपी के मुस्कुराते हुए चेहरे की तस्वीरें और वीडियो चर्चा का विषय बने थे। इस घटना के बाद भी लोगों ने सवाल उठाए थे कि क्या कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित है या पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की दिशा में भी काम होगा।

आर्थिक प्रहार की उठ रही मांग

शहर के जागरूक नागरिकों का मानना है कि यदि नाबालिगों को अपराध और नशे के दलदल से बचाना है, चोरी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगानी है और अवैध कमाई के नेटवर्क को खत्म करना है, तो केवल कबाड़ जब्त करना पर्याप्त नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि जिन लोगों पर अवैध कारोबार से लाभ कमाने के आरोप हैं, उनके आर्थिक स्रोतों, संपत्तियों और पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष एवं विधिसम्मत जांच की जाए।ऐसी जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वर्षों में खड़ी हुई संपत्तियां वैध आय का परिणाम हैं या उनके पीछे कोई अवैध आर्थिक तंत्र काम कर रहा है। अब देखना होगा कि गैरकानूनी कामों के सौदागरों पर आर्थिक प्रहार करने वाली बिलासपुर पुलिस कबाड़ियों पर आर्थिक प्रहार करती है ताकि बच्चों के भविष्य सहित जिले में अपराधो पर अंकुश लगाया जा सके।

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Kanha Tiwari

छत्तीसगढ़ के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्होंने पिछले 10 वर्षों से लोक जन-आवाज को सशक्त बनाते हुए पत्रकारिता की अगुआई की है।

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