CG News:- पांच परमेश्वर पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप! दो पूर्व सरपंच, वर्तमान सरपंच और दो सचिवों को नोटिस, 92.92 लाख की वसूली का मामला

CG News:-सरगुजा जिले के मैनपाट जनपद की ग्राम पंचायत नर्मदापुर में सरकारी योजनाओं के तहत कराए गए निर्माण कार्य अब सवालों के घेरे में हैं। जांच में 92 लाख 92 हजार रुपये से अधिक की राशि वसूली योग्य पाए जाने के बाद जनपद पंचायत ने दो पूर्व सरपंच, एक वर्तमान सरपंच और दो तत्कालीन सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अधिकारियों ने संबंधितों से अभिलेख और व्यय प्रमाणक प्रस्तुत कर अपना पक्ष रखने को कहा है।
सरगुजा। पंचायत में काम हुए या कागजों में हिसाब?
मैनपाट जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत नर्मदापुर में मूलभूत योजना, 15वें वित्त आयोग, स्वच्छ भारत मिशन समेत अन्य योजनाओं से कराए गए निर्माण कार्यों के रिकॉर्ड की जांच की गई। जांच के दौरान कैशबुक, व्यय प्रमाणक और निर्माण कार्यों से जुड़ी मूल्यांकन-सत्यापन नस्तियां उपलब्ध नहीं मिलीं।
अभिलेख नहीं मिलने के कारण शासकीय राशि के खर्च का सत्यापन नहीं हो सका। इसके बाद जनपद पंचायत ने संबंधित सरपंचों और सचिवों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
पांच जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तैयारी
जारी नोटिस के मुताबिक संबंधितों को अपने अभिमत के साथ संबंधित वर्ष के समस्त व्यय प्रमाणक और निर्माण कार्यों की मूल्यांकन-सत्यापन नस्ती लेकर उपस्थित होने कहा गया है।
प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि संबंधित व्यक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत उपस्थित होकर अभिलेख प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो यह माना जाएगा कि वित्तीय अनियमितता उनके स्तर से हुई है। इसके बाद पूरी राशि की वसूली के लिए आरआरसी प्रकरण दर्ज कराने हेतु अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, सीतापुर को पत्र भेजा जाएगा।
किस वर्ष कितनी राशि वसूली योग्य?
* वित्तीय वर्ष 2016-17: ₹5.11 लाख — पूर्व सरपंच गणेश नाग और तत्कालीन सचिव अनिल यादव से वसूली योग्य।
* वित्तीय वर्ष 2021-22: ₹8,13,665 — तत्कालीन सचिव चंद्रपाल सिंह से वसूली योग्य।
* वित्तीय वर्ष 2025-26: ₹7,88,739.33 — वर्तमान सरपंच ललिता भैंसा से वसूली योग्य।
* वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2024-25: ₹66,67,945.84 — तत्कालीन सरपंच राजनाथ भैंसा से वसूली योग्य।
इस तरह जांच में कुल ₹92,92,000 से अधिक की राशि वसूली योग्य बताई गई है।
शिकायत के बाद खुला मामला
जनपद पंचायत अधिकारियों के अनुसार ग्राम पंचायत नर्मदापुर के खिलाफ मिली शिकायत के बाद जांच कराई गई थी। जांच के दौरान शासकीय राशि के उपयोग से संबंधित जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण खर्च का सत्यापन नहीं हो सका।
अब सवाल सिर्फ 92 लाख रुपये से अधिक की राशि का नहीं, बल्कि पंचायत में सरकारी योजनाओं के नाम पर हुए काम और उनके भुगतान का भी है। आखिर इतनी बड़ी रकम खर्च हुई तो उसके दस्तावेज और मूल्यांकन-सत्यापन की नस्तियां कहां गईं? क्या निर्माण कार्य वास्तव में हुए या फिर सरकारी रिकॉर्ड ही अधूरा छोड़ दिया गया?
फिलहाल संबंधितों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है। उनके जवाब और उपलब्ध कराए जाने वाले दस्तावेजों के बाद ही वित्तीय अनियमितता की वास्तविक जिम्मेदारी और आगे की कार्रवाई की तस्वीर साफ होगी।

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