
CG Crime News:- सर्पदंश से मौत दिखाकर सरकारी मुआवजा हड़पने वाले फर्जीवाड़े में पुलिस की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। सरकंडा पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में SDM कार्यालय और तहसील कार्यालय के तीन बाबुओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।अब तक 14 FIR दर्ज हो चुकी हैं और SSP रजनेश सिंह की मॉनिटरिंग में जांच लगातार आगे बढ़ रही है।इससे पहले महिला डॉक्टर, वकील समेत कई आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं, जबकि मास्टरमाइंड की तलाश अब भी जारी है।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़े की परतें एक-एक कर खुल रही हैं। इस बार पुलिस की कार्रवाई सीधे सरकारी दफ्तरों तक पहुंची है। सरकंडा पुलिस ने SDM कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक, तहसील कार्यालय के बाबू हरिशंकर राठौर और गरीब बिंझवार को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से तीनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। जांच में सामने आया कि इनकी मिलीभगत से फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर सरकारी सहायता राशि हड़पी गई।
अब तक 14 FIR… SSP रजनेश सिंह की सख्ती से खुल रही फर्जीवाड़े की परतें
इस बहुचर्चित मामले में अब तक 14 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। पूरे फर्जी मुआवजा कांड को एसएसपी रजनेश सिंह ने बेहद गंभीरता से लिया है। वे खुद हर मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। यही वजह है कि फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने, कूटरचित दस्तावेज बनाने और सरकारी राशि निकलवाने वाले अधिकारी-कर्मचारियों की एक-एक कर पहचान कर गिरफ्तारी की जा रही है। ताजा कार्रवाई सरकंडा थाना क्षेत्र में हुई है, जबकि पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
15 फर्जी प्रकरण… एक–एक कर टूट रहा रैकेट
जिले में सर्पदंश से मौत के नाम पर बनाए गए 15 फर्जी प्रकरणों का खुलासा होने के बाद अलग-अलग थानों में लगातार कार्रवाई की जा रही है। इससे पहले तोरवा पुलिस एक महिला डॉक्टर, एक अधिवक्ता समेत पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस का मानना है कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से संचालित किया गया एक संगठित रैकेट है।
फांसी से मौत… कागजों में बना दिया सर्पदंश
सरकंडा थाना प्रभारी प्रदीप आर्य के मुताबिक, क्षेत्र के एक व्यक्ति ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। उस समय पुलिस ने मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम कराया था। बाद में उसी मर्ग की जानकारी का इस्तेमाल करते हुए आरोपितों ने फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर मौत का कारण सर्पदंश दर्शा दिया और सरकारी सहायता राशि का दावा लगा दिया।
जांच में सामने आया कि तहसील कार्यालय के बाबू हरिशंकर राठौर, SDM कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक और गरीब बिंझवार ने फर्जी प्रकरण तैयार कर कलेक्टोरेट में जमा कराया और सरकारी राशि निकलवा ली।
शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर के निर्देश पर पूरे जिले में सर्पदंश से मौत के मामलों की जांच कराई गई। जांच में फर्जी प्रकरण सामने आने पर अलग-अलग थानों में अपराध दर्ज किए गए और जांच के दौरान सरकारी कर्मचारियों की भूमिका उजागर होने पर उनकी गिरफ्तारी की गई।
नाम फर्जी… पता फर्जी… मर्ग नंबर भी निकला किसी और का
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि जिस मर्ग नंबर के आधार पर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की गई, वह वास्तव में सरकंडा क्षेत्र के एक आत्महत्या के मामले का था। उस केस की जांच पहले ही पूरी होकर खात्मे में भेजी जा चुकी थी।
इतना ही नहीं, जिस व्यक्ति के नाम पर सरकारी सहायता राशि ली गई, उसका नाम, पता और पूरी पहचान ही फर्जी निकली। पुलिस अब इस फर्जी पहचान के पीछे काम कर रहे पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
एक दिन पहले डॉक्टर गिरफ्तार… वकील समेत कई पहले से जेल में
इसी फर्जीवाड़े में तोरवा पुलिस ने शनिवार को डॉ. प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इससे पहले सफीना बानो, संतोष सूर्यवंशी और अधिवक्ता राजेंद्र कुमार चतुर्वेदी को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
तोरवा पुलिस के अनुसार, तहसील कार्यालय के नायब नाजिर की शिकायत पर महमंद निवासी निसार खान और लता सूर्यवंशी की संदिग्ध मौत के मामलों की जांच शुरू हुई थी। जांच में सामने आया कि दोनों मामलों में वास्तविक मृत्यु का कारण छिपाकर सर्पदंश से मौत दर्शाई गई और फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर सरकारी सहायता राशि हासिल की गई।
जांच में नागपुर निवासी डॉ. प्रियंका सोनी और उनके पति निहित सविता मोहन (37) की पोस्टमार्टम प्रक्रिया और फर्जी रिपोर्ट तैयार करने में भूमिका सामने आई। पुलिस के मुताबिक, पूरे षड्यंत्र का मुख्य आरोपी अधिवक्ता अब भी फरार है। उसकी तलाश जारी है। वहीं, जांच आगे बढ़ने के साथ इस फर्जीवाड़े में कई और लोगों की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।

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