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15 करोड़ के फर्जी रायपुर स्मार्ट सिटी सब-कॉन्ट्रैक्ट घोटाले में ईडी का शिकंजा, के.के. श्रीवास्तव गिरफ्तार

🔴 छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित एवं व्यापक रूप से प्रसारित अंग्रेज़ी दैनिक द हितवाद (The Hitavada) में प्रकाशित समाचार के अनुसार…

🔵 पीएमएलए कोर्ट ने आरोपी को 7 अगस्त तक ईडी रिमांड पर भेजा, मनी ट्रेल और विदेशों में धन के अंतिम लाभार्थियों की होगी पड़ताल

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🔵 ईडी का दावा, फर्जी स्मार्ट सिटी दस्तावेज, शेल कंपनियां, फर्जी बैंक खाते और दुबई, हांगकांग, चीन सिंगापुर तक पहुंची रकम

🔵 जांच एजेंसी का आरोप, आरोपी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तियों और नक्सलियों से करीबी का दावा कर पहले भरोसा जीता, फिर शिकायतकर्ता को धमकाया

कान्हा तिवारी-

रायपुर, 30 जुलाई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर जोनल कार्यालय ने कथित 15 करोड़ रुपये के फर्जी रायपुर स्मार्ट सिटी सब-कॉन्ट्रैक्ट घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कृष्ण कुमार श्रीवास्तव उर्फ के.के. श्रीवास्तव को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार कर लिया है।

छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित एवं व्यापक रूप से प्रसारित अंग्रेज़ी दैनिक हितवाद (The Hitavada)में प्रकाशित समाचार के

अनुसारगुरुवार को विशेष पीएमएलए न्यायालय, रायपुर ने आरोपी को पूछताछ के लिए 7 अगस्त तक ईडी की हिरासत में भेज दिया।
ईडी के अनुसार, आरोपी ने एम/एस रावत एसोसिएट्स को यह विश्वास दिलाया कि 500 करोड़ रुपये की रायपुर स्मार्ट सिटी परियोजना में सबकॉन्ट्रैक्ट उपलब्ध है और इसके लिए 15 करोड़ रुपये परफॉर्मेंस सिक्योरिटी के रूप में जमा करने होंगे। एजेंसी का आरोप है कि इस दावे को विश्वसनीय बनाने के लिए रायपुर स्मार्ट सिटी के फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जबकि बाद में स्मार्ट सिटी कार्यालय ने स्पष्ट कर दिया कि उसने ऐसा कोई दस्तावेज कभी जारी ही नहीं किया।

पांच खातों में पहुंचाई गई पूरी रकम, सभी संस्थाएं निकलीं फर्जी

ईडी के मुताबिक, शिकायतकर्ता से प्राप्त पूरे 15 करोड़ रुपये आरोपी द्वारा बताए गए पांच बैंक खातों में जमा कराए गए। जांच में सामने आया कि जिन व्यक्तियों के नाम पर ये खाते खोले गए थे, उनका दावा है कि उनके नाम का दुरुपयोग कर खाते खोले गए और उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी। इतना ही नहीं, जिन पांच संस्थाओं के नाम पर खाते संचालित किए गए, वे अपने पंजीकृत पतों पर अस्तित्व में ही नहीं मिलीं।

जांच एजेंसी के अनुसार, बैंक खातों का विवरण शिकायतकर्ता को व्हाट्सएप के माध्यम से भेजा गया था। इसके लिए जिस मोबाइल नंबर का उपयोग हुआ, वह आरोपी के कार्यालय के एक चपरासी के नाम पर लिया गया था। ईडी का आरोप है कि आरोपी ने उसी कर्मचारी के नाम पर 15 से 18 सिम कार्ड हासिल कर उनका इस्तेमाल किया।

शेल कंपनियों के जरिए विदेश भेजी गई रकम

ईडी का दावा है कि अपराध से अर्जित धन को पहले शेल कंपनियों के नेटवर्क के जरिए कई स्तरों पर घुमाया गया और बाद में फ्रेट चार्ज एवं कंटेनर लीजिंग के नाम पर दुबई, हांगकांग, चीन और सिंगापुर भेज दिया गया। जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि बाद में 3.40 करोड़ रुपये वापस भेजकर उसे ऋण वापसी के रूप में दर्शाने का प्रयास किया गया, जबकि वह राशि भी कथित रूप से उसी धनशोधन श्रृंखला से तैयार की गई थी। एजेंसी के अनुसार, 11.60 करोड़ रुपये अब भी बकाया हैं।

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पूर्व मुख्यमंत्री और प्रभावशाली लोगों से करीबी का दावा करने का आरोप

ईडी ने आरोप लगाया है कि जांच के दौरान यह सामने आया कि के.के. श्रीवास्तव स्वयं को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का करीबी बताता था। एजेंसी का दावा है कि आरोपी स्वयं को एक वरिष्ठ राजनीतिक पदाधिकारी का ओएसडी/पीए बताकर प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तियों और नक्सलियों से अपनी कथित निकटता का हवाला देता था। आरोप है कि इसी आधार पर पहले शिकायतकर्ता का विश्वास जीता गया और बाद में रकम वापस मांगने पर उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।

दूसरे कारोबारी से भी 3 करोड़ नकद लेने का आरोप

ईडी के अनुसार, जांच में इसी तरह की कार्यप्रणाली का एक और मामला सामने आया है, जिसमें आरोपी ने एक अन्य कारोबारी से 3 करोड़ रुपये नकद तथा बिना तारीख वाले हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक प्राप्त किए और बाद में उन्हें इंटर-कॉरपोरेट उधारी का स्वरूप देने का प्रयास किया। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान ऐसे कई अन्य संभावित पीड़ितों के संकेत मिले हैं, जिनकी पहचान और बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

डायरी, संपत्ति दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त

ईडी ने बताया कि अप्रैल 2025 में की गई तलाशी के दौरान हस्तलिखित वित्तीय अभिलेख, निजी डायरी, संपत्ति संबंधी दस्तावेज तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए थे। एजेंसी का आरोप है कि मूल अपराध की जांच के दौरान आरोपी फरार हो गया था और नकद इनाम घोषित होने के बाद ही उसका पता लगाया जा सका। पूछताछ में आरोपी ने कथित रूप से यह भी स्वीकार किया कि शिकायतकर्ता से संपर्क में प्रयुक्त मोबाइल हैंडसेट और सिम कार्ड नष्ट कर दिए गए थे।

ईडी के अनुसार, पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयान के दौरान आरोपी ने जांच में सहयोग नहीं किया, कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया और टालमटोल भरा रवैया अपनाया। एजेंसी का कहना है कि हिरासत में पूछताछ के माध्यम से अपराध से अर्जित धन की पूरी श्रृंखला, विदेशों में अंतिम लाभार्थियों की पहचान, अन्य संभावित पीड़ितों तथा पूरे षड्यंत्र का खुलासा किया जाएगा। मामले में आगे की जांच जारी है।

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Kanha Tiwari

छत्तीसगढ़ के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्होंने पिछले 10 वर्षों से लोक जन-आवाज को सशक्त बनाते हुए पत्रकारिता की अगुआई की है।

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