Bilaspur Police, Beat System:-बीट सिस्टम को मजबूत करने पुलिस का नया अभियानआमजन से फीडबैक लेकर बढ़ाया जाएगा भरोसा ,एसएसपी रजनेश सिंह बोले—स्थानीय स्तर पर होगा त्वरित समाधान

Bilaspur Police, Beat System:- बिलासपुर में पुलिस अब सिर्फ कानून लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि लोगों से सीधे जुड़ने की कोशिश करती हुई दिख रही है। बीट सिस्टम को मजबूत करने के लिए एसएसपी रजनेश सिंह ने आमजन से फीडबैक लेना शुरू किया है—ताकि व्यवस्था कागज़ों से निकलकर ज़मीन पर असर दिखा सके।
शहर हो या गांव, हर बीट में तैनात पुलिसकर्मी अब सिर्फ गश्त नहीं करेंगे, बल्कि लोगों की समस्याएं सुनेंगे, भरोसा बनाएंगे और अपराध पर नजर रखेंगे। 24 घंटे निगरानी, सत्यापन और स्थानीय संवाद के जरिए पुलिस एक ऐसा नेटवर्क खड़ा करना चाहती है, जहां शिकायतें दबें नहीं, बल्कि तुरंत सुनी जाएं।

Bilaspur बिलासपुर। जिले में कानून–व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के लिए पुलिस विभाग द्वारा बीट सिस्टम को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। इस संबंध में एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि बीट व्यवस्था को लेकर आम लोगों से फीडबैक लिया जा रहा है, ताकि इसे और बेहतर बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि बीट में तैनात कर्मचारी ही आमजन और पुलिस के बीच पहला संपर्क बिंदु होते हैं, इसलिए उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
एसएसपी ने बताया कि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर नागरिक सीधे अपने बीट कर्मचारी को अवगत करा सकते हैं। इसके अलावा डायल 112, पुलिस पेट्रोलिंग जैसी व्यवस्थाएं पहले से संचालित हैं, लेकिन बीट सिस्टम के जरिए त्वरित और स्थानीय स्तर पर समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। एसएसपी ने उम्मीद जताई कि इस व्यवस्था से पुलिस और जनता के बीच विश्वास बढ़ेगा और अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

शहरी बीट क्षेत्र में विशेष फोकस
शहरी बीट क्षेत्र की संरचना इस प्रकार तैयार की गई है कि प्रत्येक बीट में छह आरक्षकों की तैनाती की गई है। इनकी ड्यूटी तीन शिफ्ट सुबह, शाम और रात में बांटते है, जिससे 24 घंटे गश्त और निगरानी हो सके। बीट क्षेत्र में बाजार, भीड़भाड़ वाले इलाके, स्लम बस्तियां, स्कूल–कॉलेज, एटीएम और बस–रेलवे स्टैंड जैसे संवेदनशील स्थानों को शामिल किया गया है।
बीट कर्मियों का मुख्य कार्य क्षेत्र की गलियों, सड़कों और प्रमुख चौक–चौराहों पर नियमित गश्त करना है। साथ ही संवेदनशील स्थानों पर निगरानी रखते हुए सूचनाएं एकत्र करना, स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और दुकानदारों से संपर्क बनाए रखना भी उनकी जिम्मेदारी है। किरायेदारों और घरेलू सहायकों का सत्यापन, अपराधियों और संदिग्ध व्यक्तियों पर नजर रखना, तथा शिकायतों की सूचना तत्काल थाना प्रभारी तक पहुंचाना भी प्रमुख दायित्वों में शामिल है।
इसके अलावा चेन स्नैचिंग, छेड़छाड़, नशा, चोरी, नकबजनी और गुण्डागर्दी जैसे अपराधों पर नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे। बीट स्तर पर जुआ–सट्टा और साइबर ठगी पर भी निगरानी रखी जाएगी। सामुदायिक पुलिसिंग के तहत जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और रात्रिकालीन गश्त विशेष रूप से मध्यरात्रि से सुबह चार बजे तक बढ़ाई जाएगी।

ग्रामीण बीट प्रणाली भी होगी मजबूत
ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसी तर्ज पर बीट सिस्टम को लागू किया गया है। प्रत्येक ग्रामीण बीट में छह आरक्षक तैनात रहेंगे और 3 से 6 गांवों को एक बीट में शामिल किया गया है। इसमें खेत, वन क्षेत्र, जलस्रोत और ग्राम सीमाएं भी कवर की जाएंगी।
ग्रामीण बीट कर्मियों को नियमित ग्राम भ्रमण, भूमि और पारिवारिक विवादों की जानकारी रखने, तथा सामाजिक व धार्मिक गतिविधियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है। नशा, जुआ–सट्टा और मवेशी तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के साथ चोरी और अन्य अपराधों पर नियंत्रण भी उनकी प्राथमिकता होगी।
इसके अलावा सरपंच, कोटवार, शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों से समन्वय स्थापित कर सूचनाएं एकत्र की जाएंगी। मौसमी अपराधों जैसे फसल कटाई, मेले और त्योहारों के दौरान विशेष सतर्कता बरती जाएगी। सभी बीट कर्मियों को बीट रजिस्टर संधारित करने, आपराधिक मानचित्र अपडेट करने और प्रमुख स्थानों पर लगे क्यूआर कोड के माध्यम से अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

Live Cricket Info
