CG News:- सहसपानी आज भी नेटवर्क से कटे, बुनियादी सुविधाओं को तरसे ग्रामीण—सरपंच शहर के कामों में व्यस्त, DMF फंड पर उठे बड़े सवाल!

CG News:-जिले का सहसपानी गांव आज भी मोबाइल नेटवर्क और बुनियादी सुविधाओं से वंचित है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए मिलने वाले DMF फंड के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, साथ ही पंचायत पर गांव की अनदेखी कर नगर क्षेत्र में काम कराने के आरोपों से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
Sarangarhसारंगढ़–बिलाईगढ़। जिले का सहसपानी गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। घने जंगलों के बीच बसे इस गांव के ग्रामीण 21वीं सदी में भी मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं।गांव में आज तक मोबाइल टावर स्थापित नहीं हो पाया है, जिसके कारण लोगों को फोन पर बात करने या इंटरनेट का उपयोग करने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी आपात स्थिति में संपर्क न हो पाना उनके लिए सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। बीमारी, दुर्घटना या अन्य जरूरी परिस्थितियों में समय पर जानकारी न पहुंच पाना कई बार गंभीर स्थिति पैदा कर देता है। डिजिटल इंडिया के दौर में भी सहसपानी का यह हाल विकास के दावों पर सवाल खड़ा करता है।
मोबाइल नेटवर्क के लिए भटक रहे ग्रामीण
सहसपानी के लोग आज भी मोबाइल सिग्नल पाने के लिए छत के ऊपर या पहाड़ियों और गांव से दूर खुले स्थानों का सहारा लेते हैं। कई बार एक कॉल करने के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई और ऑनलाइन सेवाओं का लाभ भी इस कारण प्रभावित हो रहा है।

मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव
गांव में केवल नेटवर्क ही नहीं, बल्कि सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सुविधाओं की भी कमी बनी हुई है। कई स्थानों पर सड़कें अधूरी हैं, साफ पानी की व्यवस्था नहीं है और स्वास्थ्य सेवाएं भी सीमित हैं।ग्रामीणों को छोटी–छोटी जरूरतों के लिए भी दूर जाना पड़ता है।
DMF फंड पर उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल DMF (District Mineral Foundation) फंड के उपयोग को लेकर उठ रहा है। यह फंड खनन प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए दिया जाता है, लेकिन आरोप है कि इसका उपयोग सारंगढ़ नगर पालिका क्षेत्र में किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है, तब इस फंड का उपयोग नगर पालिका क्षेत्र में करना पूरी तरह गलत है। इससे गांवों का हक छीना जा रहा है।
सरपंच पर नगर कार्यों में व्यस्त रहने का आरोप
स्थानीय निवासी गोविन्द पटेल सहित ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत का ध्यान गांव के विकास पर कम और नगर पालिका क्षेत्र में कराए जा रहे कार्यों पर ज्यादा है। पंचायत के जिम्मेदार लोग शहर के कार्यों में व्यस्त हैं, जबकि सहसपानी जैसे गांवों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
कलेक्टर के संरक्षण में चल रहे कार्यों पर उठे सवाल
ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि नगर क्षेत्र में पंचायत के माध्यम से कराए जा रहे कार्य कहीं न कहीं प्रशासनिक संरक्षण में चल रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि उच्च स्तर पर निगरानी सख्त होती, तो इस तरह गांवों के हक का पैसा शहरों में खर्च नहीं होता। इस पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग भी उठ रही है, क्योंकि जिम्मेदार अधिकारी ही यदि चुप्पी साध लें, तो अनियमितताओं को बढ़ावा मिलना तय है।
ग्रामीणों में आक्रोश, जांच की मांग
गांव के लोगों में इस स्थिति को लेकर भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि पहले गांव में मोबाइल टावर, सड़क, पानी और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि DMF फंड के उपयोग की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि यह राशि उसी उद्देश्य के लिए खर्च हो, जिसके लिए इसे जारी किया गया है। बहरहाल अब देखना होगा कि प्रशासन सहसपानी के ग्रामीणों की समस्याओं पर कब ध्यान देता है, या फिर यह गांव यूं ही विकास से दूर बना रहेगा।

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