CG News:- ऑनलाइन IPL सट्टा कांड में BJP कनेक्शन? नेता का नाम आते ही “साइलेंट मोड” में पुलिस, स्मार्ट थानेदार ने नाम छिपाने किया कमाल

CG News:- IPL ऑनलाइन सट्टा कांड में अब सवाल सिर्फ सट्टे पर नहीं, बल्कि पुलिस की भूमिका पर भी उठ रहे हैं। पुलिस ने 6 आरोपियों की गिरफ्तारी की बात कही, लेकिन भाजपा युवा मोर्चा पदाधिकारी चिराग केशरवानी की गिरफ्तारी पर जिस तरह चुप्पी रखी गई, उसने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया। बाकी 5 आरोपियों के फोटो और प्रेस नोट जारी हुए, लेकिन यहां पुलिस अचानक खामोश दिखी। ऊपर से थाना प्रभारी लखन लाल पटेल ने 5 गिरफ्तारी बताई, जबकि एसपी प्रफुल्ल ठाकुर ने 6 आरोपियों की पुष्टि कर दी। जबकि बिलासपुर रेंज के नए आईजी रामगोपाल गर्ग ने ही कहा था कि थानों में अब मनमानी नहीं चलेगी और धाराओं में जोड़–घटाव करने वालों पर कार्रवाई होगी। अब जिले में लोग यही पूछ रहे हैं — क्या सक्ती सट्टा कांड में सामने आए विरोधाभास पर भी कोई जवाब तय होगा, या फिर बड़े नामों के आगे सिस्टम ऐसे ही चुप रहेगा?
Sakti News:- सक्ती जिले में IPL ऑनलाइन सट्टा मामले की जांच अब पुलिस की निष्पक्षता पर ही सवाल बनकर खड़ी हो गई है। मामला सिर्फ ऑनलाइन सट्टे का नहीं रह गया है, बल्कि अब चर्चा इस बात की है कि क्या पुलिस कार्रवाई भी “नाम और पहचान” देखकर तय हो रही है?
पूरा विवाद भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री चिराग केशरवानी की गिरफ्तारी को लेकर खड़ा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में 6 आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि तो की, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि पहले 5 आरोपियों के फोटो, नाम और प्रेस विज्ञप्ति मीडिया में जारी करने वाली पुलिस अचानक छठे आरोपी के मामले में खामोश हो गई।
ना प्रेस नोट…
ना फोटो…
ना आधिकारिक खुलासा…

जैसे पुलिस किसी गिरफ्तारी को नहीं, बल्कि किसी “सच्चाई” को छिपाने में जुटी हो।
4 मई को गिरफ्तारी, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में सन्नाटा
जानकारी के मुताबिक, चिराग केशरवानी को 4 मई को IPL ऑनलाइन सट्टा मामले में गिरफ्तार किया गया था। लेकिन गिरफ्तारी को सार्वजनिक नहीं किया गया। मीडिया को अंधेरे में रखा गया और पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश होती रही।
लेकिन कहानी तब बिगड़ गई जब पुलिस के ही दो जिम्मेदार अधिकारियों के बयान आमने–सामने आ गए।
थाना प्रभारी लखन लाल पटेल ने कहा — सिर्फ 5 गिरफ्तारियां हुई हैं।
जबकि सक्ती एसपी प्रफुल्ल ठाकुर ने साफ कहा — 6 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं।
अब सवाल सीधा है…
अगर गिरफ्तारी हुई थी, तो छिपाई क्यों गई?
और अगर नहीं हुई थी, तो एसपी ने 6 आरोपियों की पुष्टि किस आधार पर की?
क्या राजनीतिक पहचान बन गई “सुरक्षा कवच”?
जिलेभर में अब यही चर्चा है कि क्या भाजपा युवा मोर्चा पदाधिकारी होने की वजह से पुलिस ने अलग रवैया अपनाया? क्योंकि बाकी आरोपियों को मीडिया के सामने पेश करने वाली पुलिस यहां असहज क्यों दिखी?
लोग पूछ रहे हैं —
क्या कानून सबके लिए बराबर है?
या फिर राजनीतिक रसूख के सामने पुलिस की पारदर्शिता दम तोड़ देती है?
कोर्ट ने भी नहीं दी राहत
इधर, चिराग केशरवानी को अदालत से भी राहत नहीं मिली। सीजेएम कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस जांच में मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट और डिजिटल ट्रांजेक्शन से जुड़े कई अहम इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिले हैं। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में दावा किया कि आरोपी के खिलाफ डिजिटल साक्ष्य जांच को मजबूत कर रहे हैं।
इतना ही नहीं, कोर्ट में यह भी बताया गया कि चिराग केशरवानी के खिलाफ पहले भी जुआ एक्ट के तहत कार्रवाई हो चुकी है।
मुखबिर की सूचना से खुला था पूरा सट्टा नेटवर्क
बताया जा रहा है कि 29 अप्रैल को मुखबिर से मिली सूचना के बाद पुलिस ने भूपेंद्र राठौर से पूछताछ शुरू की थी। इसी पूछताछ में IPL ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क से जुड़े अन्य नाम सामने आए और गिरफ्तारी की कार्रवाई आगे बढ़ी।
लेकिन अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सट्टा नेटवर्क नहीं, बल्कि पुलिस की “चयनात्मक पारदर्शिता” बन चुकी है।
सक्ती में लोग खुलकर कह रहे हैं —
“अगर आरोपी आम आदमी होता, तो फोटो भी जारी होता, प्रेस नोट भी आता और पुलिस बाइट भी चलती… लेकिन यहां नाम बड़ा था, इसलिए पुलिस की आवाज छोटी पड़ गई।”
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