CG News:- जिन पैसों से गरीब बच्चों को पढ़ना था… क्या वहीं डल गया डाका? RTE फंड गड़बड़ी पर NCPCR का सख्त एक्शन, कलेक्टर से मांगा जवाब

CG News: – छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून के तहत गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए जारी सरकारी फंड में कथित गड़बड़ी और गबन का मामला अब दिल्ली तक पहुंच गया है। National Commission for Protection of Child Rights (NCPCR) ने मामले को गंभीर मानते हुए दुर्ग कलेक्टर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। आयोग ने जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए 20 दिनों की डेडलाइन तय की है।
Durg दुर्ग। जिन बच्चों के लिए सरकार हर साल करोड़ों रुपए खर्च करती है… अगर उसी पैसे में खेल होने लगे, तो सवाल सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ का भी बन जाता है। दुर्ग जिले से सामने आई शिकायत ने अब प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को मिली शिकायत में आरोप लगाया गया है कि RTE के तहत निजी स्कूलों को जारी होने वाले अनुदान में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की गई। शिकायत के मुताबिक कुछ स्कूलों ने फर्जी छात्र संख्या दिखाई, दस्तावेजों में हेरफेर किया और सरकारी राशि का दुरुपयोग किया।
यह शिकायत आयोग के ई–बाल निदान पोर्टल पर दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ दर्ज कराई गई थी। शिकायत सामने आने के बाद आयोग ने मामले को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए दुर्ग कलेक्टर से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
आयोग के निदेशक वी. रामानधा रेड्डी ने जारी नोटिस में कहा है कि शिकायत में ऐसे prima facie साक्ष्य सामने आए हैं, जिनसे सरकारी धनराशि के व्यापक दुरुपयोग और गबन की आशंका दिखाई देती है। आयोग ने साफ कहा है कि इस कथित गड़बड़ी से वंचित वर्ग के बच्चों के शिक्षा अधिकार प्रभावित हुए हैं।
आयोग के नोटिस में क्या–क्या कहा गया?

National Commission for Protection of Child Rights की ओर से जारी नोटिस में उल्लेख किया गया है कि आयोग को सुकुमारन नामक शिकायतकर्ता से ई–बाल निदान पोर्टल पर शिकायत प्राप्त हुई है। शिकायत में कहा गया है कि दुर्ग जिले में RTE अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों को दिए गए अनुदान में फर्जी छात्र संख्या और रिकॉर्ड में हेरफेर कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता ने जांच में सहयोग देने की सहमति जताई है, लेकिन सुरक्षा कारणों से अपनी पहचान गोपनीय रखने का अनुरोध किया है। आयोग ने संबंधित विभाग से पूरे मामले में अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी 20 दिनों के भीतर मांगी है।
क्या है NCPCR और क्यों अहम है यह कार्रवाई?
National Commission for Protection of Child Rights का गठन बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 के तहत किया गया था। आयोग बच्चों के अधिकारों से जुड़े मामलों की निगरानी करता है और RTE Act, POCSO Act और Juvenile Justice Act जैसे कानूनों के प्रभावी पालन की जिम्मेदारी भी निभाता है।
किसी मामले की जांच के दौरान आयोग को सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां भी प्राप्त होती हैं। ऐसे में दुर्ग के इस मामले में आयोग की सीधी दखल को काफी गंभीर माना जा रहा है।
बिलासपुर हाईकोर्ट में भी गूंज रहा मामला
RTE एडमिशन और अनुदान में कथित गड़बड़ी को लेकर High Court of Chhattisgarh में भी सुनवाई जारी है। भिलाई निवासी सीवी भगवंत राव ने अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर के माध्यम से जनहित याचिका दायर की है। वहीं कांग्रेस नेता Vikas Tiwari ने भी हस्तक्षेप याचिका लगाई है।
दोनों मामलों पर डिवीजन बेंच में सुनवाई चल रही है। हालिया सुनवाई में हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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