CG News:- 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस: वृक्षारोपण सर्वाइवल लेट निराशाजनक, वृक्षारोपण के बाद पौधों की समुचित देखभाल नहीं,जीवित पौधों की संख्या नगण्य,

CG News:- विश्व पर्यावरण दिवस है। आज फिर पौधे लगाए जाएंगे। तस्वीरें खिंचेंगी। सोशल मीडिया पर हरियाली के संदेश दिखाई देंगे। सरकारी फाइलों में लक्ष्य पूरे होने की जानकारी दर्ज होगी। लेकिन एक छोटा सा सवाल है, जो हर साल पूछे जाने से बच जाता है—पिछले साल लगाए गए पौधे आखिर कहां हैं?
करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, लाखों पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन जब उन पौधों की जिंदगी का हिसाब मांगा जाता है तो आंकड़े अक्सर खामोश हो जाते हैं। जांजगीर–चांपा के झर्राडीह में कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने पौधारोपण करते हुए कहा कि वृक्षारोपण तभी सार्थक होगा जब पौधों की देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित हो। यह बात सिर्फ एक संदेश नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक आईना है।
पर्यावरण को बचाने का मतलब सिर्फ गड्ढे खोदकर पौधे लगा देना नहीं है। असली परीक्षा उसके बाद शुरू होती है। अगर पौधे कुछ महीनों में सूख जाएं और अगले साल फिर नए पौधे लगाने पड़ें, तो सवाल पौधों पर नहीं, व्यवस्था पर उठता है। पर्यावरण दिवस पर सबसे जरूरी काम पौधे लगाना नहीं, बल्कि यह देखना है कि पहले लगाए गए पौधे अभी भी सांस ले रहे हैं या नहीं। क्योंकि हरियाली भाषणों से नहीं, बचाए गए पेड़ों से आती है।

रिपोर्टर – राजेश्वर तिवारी
JanjgirChampa जांजगीर–चांपा, 05 जून विश्व पर्यावरण दिवस पर हर साल वन सहित अन्य विभागों को वृक्षारोपण का लक्ष्य दिया जाता है, करोड़ों रुपए खर्च कर हर साल लाखों पौधे लगाए जाते है किन्तु वृक्षारोपण के बाद इनकी सही देखभाल नहीं होने से जीवित पौधों का प्रतिशत नगण्य रहता है।कई विभागों द्वारा वृक्षारोपण के फर्जी आंकड़े दिए जाते है। वास्तव में पर्यावरण संरक्षण के प्रति सकारात्मक और ईमानदार कोशिश की जरूरत है तभी हमारी भावी पीढ़ी का जीवन स्वस्थ हो सकेगा। वृक्षारोपण किए गए अधिकांश पौधे जीवित रहे इसके लिए जिला प्रशासन को एक निगरानी टीम गठित करने की जरूरत है। जनपद पंचायत बलौदा अंतर्गत ग्राम पंचायत झर्राडीह में कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रेरित किया। कलेक्टर ने कहा कि वृक्षारोपण तभी सार्थक होगा जब लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल एवं संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों तथा ग्रामवासियों को पौधों की सुरक्षा और उनके समुचित देखभाल और संरक्षण करने कहा।
इस अवसर पर कलेक्टर ने पर्यावरण संरक्षण, जल संचय एवं बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और जल संरक्षण वर्तमान समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए सभी को इसमें सक्रिय सहभागिता निभानी चाहिए। इस फलदार और छायादार विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए।
कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण एवं जनजागरूकता से जुड़े विभिन्न संदेशों का भी प्रसार किया गया। कार्यक्रम में बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत किशोरी बालिकाओं ने भी उत्साह से भाग लिया। उन्होंने बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा एवं सशक्तिकरण को समाज के समग्र विकास का आधार बताते हुए बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।कलेक्टर ने आंगनबाड़ी केंद्र झर्राडीह का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बच्चों की शत–प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा कुपोषण मुक्त ग्राम बनाने की दिशा में प्रभावी प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को बच्चों को खेल–आधारित गतिविधियों के माध्यम से शिक्षण को रोचक बनाने तथा बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण एवं प्रारंभिक शिक्षा की नियमित मॉनिटरिंग करने कहा।

सवाल अब भी कायम है…
विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधे लगाने की तस्वीरें हर साल दिखाई देती हैं, लेकिन पर्यावरण को वास्तव में बचाने के लिए यह जानना भी उतना ही जरूरी है कि पिछले वर्षों में लगाए गए लाखों पौधों में से आखिर कितने आज भी जीवित हैं। यदि वृक्षारोपण केवल फोटो और आंकड़ों तक सीमित रह गया, तो हरियाली के सपने कागजों में ही दम तोड़ते रहेंगे। पर्यावरण संरक्षण का असली पैमाना पौधे लगाने की संख्या नहीं, बल्कि उन्हें पेड़ बनने तक बचाए रखने की जिम्मेदारी है।
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