Bilaspur News: एक साल पुराना वीडियो, प्रमोशन का डर और 1 लाख की डिमांड! वायरल ऑडियो ने खोली पुलिस महकमे की अंदरूनी लड़ाई की परतें ‘ब्लैकमेल गैंग’ की चर्चा से मचा हड़कंप

Bilaspur News:-बिलासपुर के सिविल लाइन थाना से जुड़ा एक कथित ऑडियो वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि करीब एक साल पुराने वीडियो को वायरल करने और प्रमोशन रुकवाने का डर दिखाकर एक आरक्षक से एक लाख रुपये की मांग की गई। वायरल बातचीत में थाना स्टाफ के एक आरक्षक, दो पत्रकारों और एक कथित मध्यस्थ का जिक्र सामने आया है। ऑडियो में वीडियो को अधिकारियों तक पहुंचाने, विभागीय कार्रवाई कराने और निलंबन का भय दिखाकर दबाव बनाने की बात सुनाई दे रही है। हालांकि वायरल ऑडियो और लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पूरे घटनाक्रम ने सिविल लाइन थाने के भीतर की गुटबाजी, आपसी खींचतान और कथित ब्लैकमेलिंग के खेल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Bilaspur बिलासपुर। सिविल लाइन थाना परिसर से जुड़ा एक कथित ऑडियो वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि करीब एक साल पुराने वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर थाने में पदस्थ एक आरक्षक से एक लाख रुपये की मांग की जा रही है। मामले में थाना स्टाफ के ही एक आरक्षक, दो पत्रकारों और एक कथित मध्यस्थ (मीडियेटर) के नाम बातचीत में सामने आ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार संबंधित आरक्षक करीब एक वर्ष पहले रात्रि पेट्रोलिंग ड्यूटी के बाद थाना परिसर में बने बैरकनुमा कमरे में आराम कर रहा था। आरोप है कि उसी दौरान ड्यूटी पर मौजूद एक अन्य आरक्षक वहां पहुंचा और सो रहे आरक्षक के पास बीयर की बोतल रखकर उसका वीडियो बना लिया। यह वीडियो लंबे समय तक सार्वजनिक नहीं हुआ, लेकिन अब इसे आधार बनाकर कथित रूप से दबाव बनाने और रकम मांगने की कोशिश की जा रही है।
वायरल ऑडियो में आरक्षक और एक कथित मध्यस्थ के बीच बातचीत सुनाई दे रही है। बातचीत से संकेत मिलता है कि वीडियो पहले एक पत्रकार को भेजा गया। इसके बाद दूसरे पत्रकार तक भी वीडियो पहुंचाया गया। जब बात नहीं बनी तो एक अन्य व्यक्ति के माध्यम से आरक्षक पर समझौते और भुगतान का दबाव बनाने का प्रयास किया गया।
ऑडियो में यह भी कहा गया है कि वीडियो को अधिकारियों के समक्ष नया बताकर पेश किया जा सकता है और राजधानी के कुछ न्यूज पोर्टलों के माध्यम से प्रसारित कराने की धमकी भी दी गई। बातचीत में यह आशंका भी जताई गई कि वीडियो सार्वजनिक होने पर आरक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो सकती है तथा उसका प्रस्तावित प्रमोशन प्रभावित हो सकता है।
मामले ने एक बार फिर सिविल लाइन थाना स्टाफ के भीतर चल रहे आपसी विवाद और गुटबाजी को उजागर कर दिया है। इससे पहले भी थाना स्टाफ से जुड़े वीडियो और ऑडियो वायरल होने के मामले सामने आ चुके हैं। फिलहाल वायरल ऑडियो और लगाए जा रहे आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि मामला पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है।
एक साल पुराने वीडियो से बनाया दबाव
वायरल ऑडियो के अनुसार जिस वीडियो को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, वह करीब एक वर्ष पुराना बताया जा रहा है। उस समय संबंधित आरक्षक पेट्रोलिंग ड्यूटी पूरी करने के बाद थाना परिसर स्थित बैरक में आराम कर रहा था। आरोप है कि इसी दौरान उसके पास बीयर की बोतल रखकर वीडियो रिकॉर्ड किया गया। बातचीत में यह भी सामने आया है कि वीडियो को लंबे समय तक सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन अब उसका उपयोग दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। आरक्षक द्वारा वीडियो पुराना होने की बात कहे जाने पर कथित तौर पर उसे अधिकारियों के सामने नया बताने और उसके खिलाफ इस्तेमाल करने की बात कही गई। इससे यह सवाल उठ रहा है कि यदि वीडियो वास्तव में पुराना था तो उसे इतने लंबे समय तक क्यों छिपाकर रखा गया और अब अचानक उसे सामने लाने की कोशिश क्यों हो रही है।
ऑडियो में वसूली और मध्यस्थ की भूमिका चर्चा में
वायरल ऑडियो में कथित तौर पर एक मध्यस्थ और आरक्षक के बीच बातचीत सुनाई दे रही है। बातचीत से संकेत मिलता है कि वीडियो वायरल न करने के बदले रुपये की मांग की जा रही थी। आरोप है कि शुरुआत में एक लाख रुपये की मांग रखी गई। रकम को लेकर सहमति नहीं बनने पर वीडियो अलग–अलग लोगों तक पहुंचाया गया। ऑडियो में दो पत्रकारों के नाम आने की भी चर्चा है, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। बातचीत में यह भी कहा गया कि यदि मांग पूरी नहीं की गई तो वीडियो को व्यापक स्तर पर प्रसारित कराया जाएगा। ऑडियो सामने आने के बाद यह मामला केवल वीडियो वायरल करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कथित वसूली और दबाव बनाने के आरोपों के कारण और गंभीर हो गया है।
प्रमोशन रोकने और निलंबन का डर दिखाने का आरोप
वायरल बातचीत में संबंधित आरक्षक के प्रमोशन का भी जिक्र सामने आया है। बताया जा रहा है कि उसका नाम आगामी पदोन्नति सूची में शामिल है। इसी बात को आधार बनाकर कथित रूप से उसे डराने का प्रयास किया गया। ऑडियो में यह चर्चा सुनाई देती है कि वीडियो सार्वजनिक होने पर विभागीय जांच शुरू हो सकती है, निलंबन की कार्रवाई हो सकती है और प्रमोशन भी रुक सकता है। आरोप है कि इन्हीं संभावित परिणामों का हवाला देकर रुपये की मांग की जा रही थी। बातचीत में समय–समय पर अन्य प्रकार की सेवा करने की अपेक्षा जताने की बात भी सामने आई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल आपसी विवाद नहीं, बल्कि ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली के दायरे में भी आ सकता है।
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