CG Monsoon Session 2026:-मितानिनों की मेहनत की कमाई पर ‘डाका’ या सिस्टम की लापरवाही? 8.80 लाख की प्रोत्साहन राशि का मामला आज गूंजेगा सदन में, ध्यानाकर्षण के जरिए विधायक घेरेंगे सरकार, सिविल सर्जन कार्यालय ने भेजा जवाब

CG Monsoon Session 2026: गांव-गांव जाकर परिवार नियोजन का संदेश देने वाली मितानिनों को उनकी मेहनत की प्रोत्साहन राशि समय पर क्यों नहीं मिली? अगर 8.80 लाख रुपये सुरक्षित थे तो भुगतान आखिर रुका क्यों रहा? जिन पैसों का हक मितानिनों का था, वे कथित तौर पर वेंडर के खाते तक कैसे पहुंचे? भर्ती को लेकर सवाल क्यों उठे? और शिकायतों के बीच पूरा मामला विधानसभा तक क्यों पहुंच गया? इन्हीं सवालों के साथ जांजगीर-चांपा जिला अस्पताल का यह मामला आज छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में गूंजेगा। विधायक ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए सरकार से जवाब मांगा है, जबकि सिविल सर्जन कार्यालय ने विधानसभा को भेजे अपने जवाब में तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए आरोपों से इनकार किया है। अब निगाहें सदन पर हैं कि इन सवालों के जवाब मिलते हैं या फिर एक और जांच की मांग तेज होती है।
रायपुर। मानसून सत्र के दूसरे दिन जांजगीर–चांपा जिला अस्पताल से जुड़े कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा विधानसभा में गर्माने वाला है। परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत मितानिनों, प्रेरकों और स्वीपरों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि, जीवन दीप समिति के फंड और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर विधायक ने ध्यानाकर्षण लगाया है। अब सरकार को सदन में इन आरोपों पर जवाब देना होगा। दूसरी ओर सिविल सर्जन कार्यालय ने लिखित जवाब में सभी आरोपों पर अपना पक्ष रखा है।
मितानिनों की मेहनत की कमाई पर 8.80 लाख के कथित गबन का आरोप
परिवार नियोजन कार्यक्रम को गांव–गांव तक पहुंचाने के लिए प्रदेशभर में मितानिनों की नियुक्ति की गई है। परिवार नियोजन के लिए लोगों को प्रेरित करने और स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं में सहयोग करने पर उन्हें शासन की ओर से प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि जनवरी 2023 से फरवरी 2026 के बीच मितानिनों, प्रेरकों और अस्पताल में कार्यरत स्वीपरों को मिलने वाली 8 लाख 80 हजार 198 रुपये की प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं किया गया। आरोप है कि तत्कालीन सिविल सर्जन और अस्पताल प्रबंधन की मिलीभगत से इस राशि में कथित गबन किया गया।
वेंडर के खाते में लाखों की रकम, जीवन दीप समिति भी सवालों के घेरे में
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि जिला अस्पताल के प्लेसमेंट कर्मचारी चंदन रगड़े और अमित कुमार विजय को वेंडर बनाकर उनके खातों में क्रमशः 8 लाख 56 हजार 900 रुपये और 23 हजार 292 रुपये का भुगतान किया गया। दावा किया गया है कि यह सिर्फ एक मामला नहीं है, बल्कि इसी तरह की कई वित्तीय अनियमितताएं अब भी सामने आना बाकी हैं।
शिकायत हुई… फिर सिविल सर्जन कार्यालय में लगी आग
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि जीवन दीप समिति के फंड में कथित बंदरबांट और अनियमितताओं की शिकायत के बाद जांच की मांग उठी थी। इसके कुछ समय बाद सिविल सर्जन कार्यालय में आग लग गई। आरोप है कि इस आग में महत्वपूर्ण दस्तावेज नष्ट हो गए। अब यह घटनाक्रम भी सदन में चर्चा का विषय बनेगा।
भर्ती में भी लेन-देन के गंभीर आरोप
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में कहा गया है कि जीवन दीप समिति के नाम पर बिना निर्धारित प्रक्रिया अपनाए दो दर्जन से अधिक लोगों को कथित रूप से पैसे लेकर काम पर रखा गया। शिकायतों के बावजूद जांच नहीं हुई और जिम्मेदार अधिकारियों को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया गया है।
सिविल सर्जन का जवाब—गबन नहीं, तकनीकी कारणों से रुका भुगतान
विधानसभा को भेजे अपने जवाब में सिविल सर्जन कार्यालय ने कहा है कि मिशन परिवार विकास योजना के तहत सभी भुगतान नियमानुसार किए जाते हैं। मार्च 2026 में एसएनए (Single Nodal Agency) पोर्टल पर वेंडर वैलिडेशन में तकनीकी समस्या आने के कारण भुगतान नहीं हो सका।
कार्यालय के अनुसार राशि लेप्स होने से बचाने के लिए उसे अस्पताल के पंजीकृत वेंडर के खाते में आहरित किया गया था, ताकि बाद में मितानिनों, प्रेरकों और स्वीपरों को नगद भुगतान किया जा सके।
विभाग का दावा- राशि सुरक्षित, जल्द होगा भुगतान
सिविल सर्जन कार्यालय ने अपने जवाब में कहा है कि पूरी राशि वर्तमान में एनएचएम शाखा के पास सुरक्षित है। लाभार्थियों की सूची तैयार की जा रही है और प्रक्रिया पूरी होते ही संबंधित मितानिनों, प्रेरकों एवं स्वीपरों को नगद भुगतान कर पावती ली जाएगी।
मेडिकल कॉलेज का काम बढ़ा, इसलिए भुगतान हुआ लंबित
कार्यालय ने यह भी बताया कि जिला अस्पताल में मेडिकल कॉलेज शुरू होने के कारण कार्यालयीन कार्य का दबाव काफी बढ़ गया। वहीं तत्कालीन सिविल सर्जन के स्थानांतरण के चलते भी भुगतान समय पर नहीं हो पाया।
0 भर्ती को लेकर भी दिया अपना पक्ष
भर्ती के आरोपों पर सिविल सर्जन कार्यालय ने कहा है कि जीवन दीप समिति के तहत नियमित भर्ती का कोई प्रावधान नहीं है। अस्पताल की व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यकता अनुसार प्राप्त आवेदनों में से अस्थायी रूप से दैनिक वेतन पर लोगों से काम लिया जाता है। विभाग का दावा है कि भर्ती संबंधी कोई आधिकारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
आगजनी पर भी दिया जवाब
कार्यालय के मुताबिक 11 मई 2025 को जिस अतिरिक्त कक्ष में आग लगी थी, वहां कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज नहीं रखे गए थे। घटना के बाद आयुक्त बिलासपुर, कोष लेखा एवं पेंशन विभाग और महालेखाकार द्वारा ऑडिट एवं भौतिक सत्यापन कराया गया था। विभाग का दावा है कि आगजनी से अस्पताल के रिकॉर्ड को कोई प्रत्यक्ष नुकसान नहीं हुआ।
अब सदन में सरकार की परीक्षा
मितानिनों की प्रोत्साहन राशि, वेंडर के खाते में लाखों रुपये का ट्रांसफर, जीवन दीप समिति में कथित अनियमितताएं, भर्ती और आगजनी… इन तमाम सवालों पर अब सरकार को विधानसभा में जवाब देना होगा। यह भी देखना होगा कि सरकार केवल स्पष्टीकरण देकर मामला खत्म करती है या फिर इतने गंभीर आरोपों के बाद किसी स्वतंत्र जांच की घोषणा भी करती है।

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