CG News:- आम आदमी का हेलमेट नहीं तो चालान, 75 बाइक सवारों की रैली पर खामोशी क्यों? TVS की प्रमोशनल रैली का VIDEO वायरल, बिना हेलमेट दौड़ती दिखीं दर्जनों बाइक रचा इतिहास ,अब सिस्टम से पूछा जा रहा है—कहां गया नियम?

CG News:- जब आम आदमी बिना हेलमेट निकलता है तो उसका चालान कट जाता है, फिर शहर की सड़कों पर करीब 75 बाइक सवार बिना हेलमेट रैली कैसे निकाल गए? क्या यातायात नियम सिर्फ आम लोगों के लिए हैं, या रसूखदारों के लिए कानून की किताब के पन्ने बदल जाते हैं? वायरल VIDEO के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कार्रवाई होगी या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
जांजगीर-चांपा। एक तरफ जांजगीर-चांपा पुलिस हेलमेट नहीं पहनने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर सड़क पर आम लोगों का समय समय चालान काटती है। दूसरी तरफ शहर में कथित तौर पर नदीका टीवीएस और अपार्जित टीवीएस द्वारा आयोजित लकी ड्रॉ कार्यक्रम के लिए निकली गई बाइक रैली ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में करीब 75 बाइक राइडर्स बिना हेलमेट शहर की सड़कों पर दौड़ते दिखाई दे रहे हैं।
लकी ड्रॉ के नाम पर निकली रैली, नियम पीछे छूट गए
जानकारी के अनुसार, नदीका टीवीएस और अपार्जित टीवीएस द्वारा आयोजित लकी ड्रॉ कार्यक्रम के तहत करीब 75 बाइक राइडर्स की रैली निकाली गई। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी। वायरल वीडियो में बड़ी संख्या में राइडर्स बिना हेलमेट दिखाई दे रहे हैं। यही वीडियो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
आम आदमी पर सख्ती, यहां खामोशी क्यों?
वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि बिना हेलमेट एक आम व्यक्ति सड़क पर निकल जाए तो पुलिस तत्काल चालान काट देती है। फिर इतनी बड़ी रैली शहर की सड़कों पर कैसे निकल गई? क्या किसी जिम्मेदार अधिकारी की नजर इस पर नहीं पड़ी, या देखकर भी अनदेखा कर दिया गया?
कानून सबके लिए बराबर है या रसूख देखकर बदल जाता है?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सड़क सुरक्षा के नियम सिर्फ आम लोगों पर लागू होते हैं? अगर वायरल वीडियो में दिख रहे दृश्य सही हैं, तो क्या इस रैली में शामिल बाइक चालकों पर भी मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी? क्या आयोजकों से भी जवाब मांगा जाएगा कि उन्होंने प्रतिभागियों को हेलमेट पहनना अनिवार्य क्यों नहीं किया?
अब प्रशासन की परीक्षा
यह मामला सिर्फ एक रैली का नहीं, बल्कि कानून की समानता का है। अब निगाहें पुलिस और प्रशासन पर हैं। यदि नियम सभी के लिए बराबर हैं, तो कार्रवाई भी बिना किसी भेदभाव के होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता, तो लोगों के मन में यही सवाल और गहरा होगा—क्या कानून सिर्फ आम आदमी के लिए है और रसूखदारों के लिए अलग व्यवस्था?

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