CG News:- परिवार नियोजन की राशि पर ‘डाका’! ₹8.80 लाख के कथित फर्जी भुगतान से मचा हड़कंप, मामला खुलते ही लीपापोती शुरू , खाता फ्रीज… पूर्व सिविल सर्जन समेत कई नाम जांच के घेरे में, राज्य स्तरीय 5 सदस्यीय जांच समिति गठित

CG News:- सरकारी योजनाओं का उद्देश्य आम लोगों तक लाभ पहुंचाना होता है, लेकिन जब उन्हीं योजनाओं की राशि कथित फर्जी भुगतान की भेंट चढ़ जाए तो सवाल सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का होता है। जांजगीर-चांपा जिला अस्पताल में परिवार नियोजन प्रोत्साहन राशि के नाम पर 8.80 लाख रुपये के कथित फर्जी भुगतान का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। मामला उजागर होते ही संबंधित बैंक खाते को फ्रीज कर दिया गया है और पांच सदस्यीय जांच समिति गठित कर जांच शुरू कर दी गई है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर सरकारी राशि निकाल ली गई।
जांजगीर–चांपा। जिला अस्पताल में परिवार नियोजन ऑपरेशन के नाम पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के वितरण में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक लाभार्थियों तक राशि पहुंचने के बजाय फर्जी दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर 8.80 लाख रुपये का भुगतान दर्शाया गया। प्रारंभिक जांच में अस्पताल के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। मामला सामने आने के बाद तत्कालीन और वर्तमान अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

मामला उजागर होते ही खाता फ्रीज, पांच सदस्यीय जांच समिति गठित

मामले की जानकारी सामने आते ही वर्तमान सिविल सर्जन ने संबंधित बैंक खाते को तत्काल फ्रीज करा दिया। इसके साथ ही भुगतान से जुड़े दस्तावेज, रिकॉर्ड और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच शुरू कर दी गई। स्वास्थ्य विभाग ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित कर पूरे मामले की तह तक पहुंचने के निर्देश दिए हैं। समिति यह पता लगाएगी कि राशि किन खातों में गई, भुगतान किस आधार पर हुआ और इसमें किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका रही। जांच समिति द्वारा वर्ष जनवरी 2023 से फरवरी 2026 तक के समस्त अभिलेख, दस्तावेज एवं कागज़ात का परीक्षण किया जाएगा।
पूर्व सिविल सर्जन, डॉ एस. कुजूर, डॉ दीपक जायसवाल और अस्पताल सलाहकार अंकित ताम्रकार पर भी उठे सवाल
मामले में यह आरोप भी सामने आया है कि कथित फर्जीवाड़े की साजिश पूर्व सिविल सर्जन, डॉ एस. कुजूर, डॉ दीपक जायसवाल और अस्पताल के सलाहकार
अंकित ताम्रकार के स्तर पर रची गई। आरोप है कि परिवार नियोजन प्रोत्साहन राशि वितरण की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर फर्जी भुगतान किए गए। हालांकि अभी तक किसी भी अधिकारी की भूमिका आधिकारिक रूप से तय नहीं हुई है। जांच समिति दस्तावेजों, स्वीकृतियों और भुगतान प्रक्रिया की पड़ताल कर रही है। यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित अधिकारियों पर आर्थिक अनियमितता, सरकारी राशि के दुरुपयोग और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
विधानसभा तक पहुंचा मामला, कार्रवाई की मांग तेज
जिला अस्पताल जांजगीर में हुए कथित फर्जीवाड़े का मामला विधानसभा तक पहुंच गया है। जांजगीर-चांपा के विधायक श्री व्यास कश्यप ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं की राशि में गड़बड़ी गंभीर अपराध है और इसमें शामिल किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाना चाहिए। विधायक ने यह भी कहा कि केवल खाते फ्रीज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे नेटवर्क का खुलासा कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
भृत्य के खाते से भी निकले 8.56 लाख रुपये
जांच के दौरान जिला अस्पताल के एक भृत्य के बैंक खाते से 8.56 लाख रुपये के लेनदेन का मामला भी सामने आया है। संबंधित कर्मचारी ने अपने खाते के उपयोग की जानकारी होने से इनकार किया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि खाते का संचालन किसने किया और राशि आखिर किन लोगों तक पहुंची। स्वास्थ्य विभाग बैंक रिकॉर्ड, हस्ताक्षर और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले का खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही होगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
अब सवाल सिस्टम पर
सरकारी धन का कथित फर्जी भुगतान आखिर बिना जांच के कैसे होता रहा? भुगतान प्रक्रिया की निगरानी कौन कर रहा था? जब लाखों रुपये निकल रहे थे तब जिम्मेदार अधिकारियों की नजर क्यों नहीं पड़ी? ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब सिर्फ जांच रिपोर्ट नहीं, बल्कि कार्रवाई देगी।
अब प्रशासन की परीक्षा
अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। क्या जांच निष्पक्ष होगी? क्या सरकारी राशि के कथित गबन में शामिल लोगों पर एफआईआर, विभागीय कार्रवाई और रिकवरी होगी? या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? फिलहाल पूरा जिला जांच के नतीजे का इंतजार कर रहा है।

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