
CG Education News:- रतनपुर स्थित सिद्ध शक्ति पीठ श्री महामाया मंदिर द्वारा संचालित विद्यालय में शिक्षा सत्र 2026-27 का शुभारंभ पारंपरिक भारतीय संस्कृति के साथ किया गया। विद्यार्थियों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया तथा निःशुल्क ड्रेस और पाठ्य पुस्तकें वितरित की गईं। विद्यालय में पहली से 12वीं तक गुणवत्तापूर्ण एवं संस्कारयुक्त शिक्षा दी जा रही है। एक समय यहां छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से भी विद्यार्थी निःशुल्क संस्कृत शिक्षा प्राप्त करने आते थे, जबकि वर्तमान में विद्यालय मुख्य रूप से स्थानीय बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहा है। सत्र 2026-27 के लिए अब तक 280 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है और प्रवेश प्रक्रिया अभी भी जारी है।
Ratnpur रतनपुर। सिद्ध शक्ति पीठ श्री महामाया मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि वर्षों से शिक्षा और संस्कार का भी प्रमुख केंद्र रहा है। मंदिर द्वारा संचालित विद्यालय में शिक्षा सत्र 2026-27 का शुभारंभ भारतीय संस्कृति और परंपरा के अनुरूप उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया। नए सत्र के पहले दिन विद्यालय पहुंचे नन्हे विद्यार्थियों का तिलक लगाकर, पुष्प अर्पित कर एवं मिठाई खिलाकर आत्मीय स्वागत किया गया। इस अवसर पर विद्यालय प्रभारी संतोष शुक्ला ने विद्यार्थियों को निःशुल्क ड्रेस एवं पाठ्य पुस्तकें वितरित कर नए शिक्षा सत्र की शुभकामनाएं दीं।
वर्षों से शिक्षा और संस्कार का केंद्र रहा है विद्यालय
सिद्ध शक्ति पीठ श्री महामाया मंदिर परिसर वर्षों से शिक्षा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का केंद्र रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, एक समय ऐसा भी था जब केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से भी विद्यार्थी यहां निःशुल्क संस्कृत शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते थे। उस दौर में यह संस्थान संस्कृत अध्ययन और भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रमुख केंद्र माना जाता था। समय के साथ शिक्षा व्यवस्था में बदलाव आया और वर्तमान में यह विद्यालय मुख्य रूप से स्थानीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं संस्कारयुक्त शिक्षा उपलब्ध करा रहा है।
निःशुल्क ड्रेस और पुस्तकों से किया नए सत्र का स्वागत
नए शिक्षा सत्र के शुभारंभ पर विद्यालय परिसर में उत्साह का माहौल देखने को मिला। बच्चों के चेहरों पर नई कक्षा, नई पुस्तकें और नए सपनों की खुशी साफ झलक रही थी। विद्यालय प्रभारी संतोष शुक्ला ने विद्यार्थियों को निःशुल्क ड्रेस एवं पाठ्य पुस्तकें वितरित करते हुए नियमित अध्ययन, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। विद्यालय प्रबंधन ने सभी विद्यार्थियों को मन लगाकर पढ़ाई करने और अनुशासन का पालन करने का संकल्प भी दिलाया।
पहली से 12वीं तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, संस्कारों पर विशेष जोर
विद्यालय में कक्षा पहली से 12वीं तक सभी विषयों की नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाती है। विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि यहां विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित शिक्षा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास का भी प्रशिक्षण दिया जाता है।
छठी से लड़कों के लिए धोती-बंगाली वेशभूषा अनिवार्य
विद्यालय प्रभारी संतोष शुक्ला ने बताया कि कक्षा 6वीं से लड़कों के लिए धोती-बंगाली वेशभूषा अनिवार्य की गई है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, परंपराओं और सभ्यता के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना है, ताकि आधुनिक शिक्षा के साथ उनकी सांस्कृतिक जड़ों से भी मजबूत पहचान बनी रहे।
280 विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश, अभी भी जारी है एडमिशन
संतोष शुक्ला ने बताया कि सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया जारी है और अब तक 280 विद्यार्थियों ने प्रवेश ले लिया है। विद्यालय प्रबंधन ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों का समय पर प्रवेश सुनिश्चित कर उन्हें गुणवत्तापूर्ण एवं संस्कारयुक्त शिक्षा का लाभ दिलाएं।
बड़ी संख्या में शिक्षक, पालक और गणमान्य नागरिक रहे मौजूद
कार्यक्रम में आशीष सिंह ठाकुर, सतीश शर्मा, अरुण शर्मा, शैलेन्द्र जायसवाल, कपिलदेव पांडेय, धर्मेंद्र चंदेल, ओमप्रकाश तम्बोली, हेमंत जायसवाल, नन्ही महाराज, बसंत शर्मा, आर.डी. सोनी, ए.पी. त्रिपाठी, उत्तम तम्बोली, कमलेश पांडे, अशोक पाठक, प्राचार्य चंद्रशेखर पांडेय, दीपा निर्मलकर, विजय साहू, साक्षी शुक्ला, कामनी तम्बोली, राधिका सोनी, प्रीति पटेल, हर्षु जायसवाल, पंचानन पांडा एवं मीरा अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं, गणमान्य नागरिक और पालक उपस्थित रहे।
पालकों में आशा साहू, तुकेश्वरी निषाद, पूर्णिमा यादव, रामवतार गुप्ता एवं शुभा तिवारी की विशेष उपस्थिति रही।
शिक्षा के साथ संस्कार देने का संकल्प
विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि सिद्ध शक्ति पीठ श्री महामाया मंदिर द्वारा संचालित यह विद्यालय वर्षों से शिक्षा, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से कार्य कर रहा है। नए शिक्षा सत्र की शुरुआत उत्साह, उमंग और सकारात्मक वातावरण के बीच हुई, जिसने विद्यार्थियों में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और उज्ज्वल भविष्य के प्रति नई उम्मीद का संचार किया।

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