CG Crime News:- गुरुकुल में नाबालिग आदिवासी छात्रा के साथ दुष्कर्म का आरोप, 8 महीने की गर्भावस्था में TC देकर भेजा घर; अब बच्चे की मां बनी, परिषद ने SIT और DNA जांच की उठाई मांग

CG Crime News:- छत्तीसगढ़ के कबीरधाम से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने आवासीय विद्यालयों में बेटियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि गुरुकुल आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाली एक नाबालिग आदिवासी छात्रा के साथ दुष्कर्म किया गया। छात्रा गर्भवती हो गई और कथित तौर पर करीब 8 महीने की गर्भावस्था में उसे स्कूल से TC देकर घर भेज दिया गया। घर पहुंचने के बाद परिवार को उसकी गर्भावस्था का पता चला और अब पीड़िता एक बच्चे को जन्म दे चुकी है।
मामले को लेकर छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद, कबीरधाम शाखा ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा है। परिषद ने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र SIT से जांच कराने, नवजात और संदिग्धों का DNA टेस्ट कराने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ POCSO समेत अन्य कठोर कानूनों के तहत कार्रवाई की मांग की है।
कवर्धा। मामला सिर्फ एक नाबालिग छात्रा के साथ कथित अपराध का नहीं है, सवाल उस भरोसे का भी है जिसके साथ माता-पिता अपनी बेटी को आवासीय विद्यालय में छोड़ते हैं। उम्मीद होती है कि बच्ची वहां सुरक्षित रहेगी, पढ़ेगी और अपना भविष्य बनाएगी। लेकिन परिषद के आरोपों ने इसी भरोसे को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद की कबीरधाम शाखा के जिलाध्यक्ष कामू बैगा ने कबीरधाम के एक प्रतिष्ठित गुरुकुल आवासीय विद्यालय में शासकीय संरक्षण के तहत पढ़ रही गोंड जनजाति की नाबालिग छात्रा से जुड़े मामले पर गंभीर आपत्ति जताई है।
परिषद का आरोप है कि छात्रा के साथ संस्थागत स्तर पर यौन शोषण हुआ और उसकी करीब 8 माह की गर्भावस्था को छिपाने तथा मामले को दबाने की कोशिश की गई। परिषद ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पुलिस अधीक्षक, कबीरधाम को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।
परिषद ने नवजात शिशु और मामले से जुड़े संदिग्धों का DNA परीक्षण कराने, संस्था की मान्यता समाप्त करने तथा दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
पीड़िता राज्य सरकार की ‘जवाहर उत्कर्ष योजना’ के तहत कबीरधाम के गुरुकुल आवासीय विद्यालय में कक्षा 9वीं की छात्रा थी। इस योजना के तहत छात्रा की सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी संबंधित व्यवस्था की थी।
परिषद के अनुसार छात्रा जून 2025 से जनवरी 2026 तक करीब साढ़े सात महीने हॉस्टल में रही। जनवरी 2026 में उसे अचानक TC देकर घर भेज दिया गया। घर पहुंचने के बाद परिजनों को पता चला कि वह करीब 8 माह की गर्भवती है।
अब परिषद ने सवाल उठाया है कि आखिर इतने लंबे समय तक छात्रा की गर्भावस्था हॉस्टल अधीक्षक, वार्डन और प्राचार्या की नजरों से कैसे बची रही? यदि किसी को इसकी जानकारी थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? और अगर जानकारी नहीं थी तो आवासीय विद्यालय में छात्राओं की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था किस तरह संचालित हो रही थी?
परिषद ने इसे गंभीरता से लेते हुए पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग की है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
दुष्कर्म पीड़िता ने बच्चे को दिया जन्म, अब DNA रिपोर्ट से खुलेगा राज?
पीड़िता द्वारा नवजात बच्चे को जन्म दिए जाने के बाद परिषद ने मामले में DNA जांच की मांग तेज कर दी है। परिषद का कहना है कि नवजात शिशु, मुख्य संदिग्धों और संस्था से जुड़े संदिग्ध कर्मचारियों की DNA प्रोफाइलिंग कराई जानी चाहिए, ताकि बच्चे के जैविक पिता की पहचान हो सके और कथित अपराध की वास्तविक तस्वीर सामने आए।
परिषद ने यह भी सवाल उठाया है कि नाबालिग के प्रसव की जानकारी पुलिस को दी गई थी या नहीं। परिषद ने अस्पताल प्रबंधन और संबंधित चिकित्सकों की भूमिका की जांच करते हुए, यदि कानूनन सूचना देने की जिम्मेदारी का उल्लंघन पाया जाता है तो POCSO Act की धारा 21 के तहत कार्रवाई की मांग की है।
गुरुकुल में पहले भी 4 साल की बच्ची से दुष्कर्म का मामला!
इस पूरे मामले ने इसलिए भी गंभीर रूप ले लिया है क्योंकि परिषद ने दावा किया है कि इसी गुरुकुल आवासीय विद्यालय में पहले भी एक 4 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आ चुका है।
परिषद के अनुसार उस मामले में न्यायालय ने दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अब एक बार फिर इसी संस्थान से नाबालिग छात्रा से जुड़े गंभीर आरोप सामने आने के बाद विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
परिषद ने लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं का हवाला देते हुए गुरुकुल आवासीय विद्यालय की मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द करने और संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है।
परिषद ने रखी ये बड़ी मांगें
छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद ने पुलिस अधीक्षक और प्रशासन के सामने मामले को लेकर कई मांगें रखी हैं—
0 स्वतंत्र SIT गठित हो: पूरे प्रकरण की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया जाए।
0 DNA टेस्ट कराया जाए: नवजात शिशु के साथ सभी संदिग्धों का तत्काल DNA परीक्षण कराया जाए, ताकि वास्तविक आरोपी तक पहुंचा जा सके।
0 दोषियों की गिरफ्तारी हो: वास्तविक दोषियों के अलावा स्कूल संचालक, हॉस्टल अधीक्षक, वार्डन, प्राचार्य तथा संबंधित अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की जांच की जाए। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ POCSO Act, SC/ST Act और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कठोर धाराओं में FIR दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए।
0 मान्यता और अनुदान रद्द हो: गुरुकुल आवासीय विद्यालय की मान्यता और उसे मिलने वाला सरकारी अनुदान तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए।
0 पीड़ित परिवार को सुरक्षा मिले: परिषद ने पीड़िता और उसके परिवार को 5 करोड़ रुपये की Witness Protection Unit के तहत सुरक्षा दिए जाने की मांग की है। साथ ही धारा 183 BNS के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान, उचित चिकित्सा और पुनर्वास सहायता उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
0 रिकॉर्ड सुरक्षित किए जाएं: हॉस्टल का उपस्थिति रजिस्टर, CCTV फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड और मामले से जुड़े अन्य दस्तावेज तत्काल जब्त कर जांच एजेंसी अथवा न्यायालय की निगरानी में सुरक्षित रखे जाएं।
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक नाबालिग छात्रा की कथित गर्भावस्था इतने लंबे समय तक व्यवस्था की नजरों से कैसे बची रही? उसे जनवरी में TC देकर घर भेजने के पीछे वजह क्या थी? और अगर किसी को पूरे घटनाक्रम की जानकारी थी तो समय रहते पुलिस और परिवार को सूचना क्यों नहीं दी गई?
इन सवालों का जवाब अब SIT जांच, मेडिकल रिकॉर्ड और DNA रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक दोषियों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने आना मुश्किल है।

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