CG News:- साइबर ठगों से सावधान! अटल यूनिवर्सिटी में SSP राजनेश सिंह ने खोली ठगी की पूरी कहानी, बोले- पढ़े-लिखे भी नहीं बच रहे

CG News:- साइबर ठगी अब सिर्फ अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे लोगों तक सीमित नहीं रही। इंजीनियर, अधिकारी और उच्च शिक्षित लोग भी साइबर ठगों के जाल में फंस रहे हैं। बिलासपुर पुलिस के “साइबर जागृति अभियान” के तहत 22 अगस्त को अटल विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में एसएसपी एवं डीआईजी रजनेश सिंह ने विद्यार्थियों को साइबर अपराध के बदलते तरीकों से रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि ठग लोगों की कमजोरी पहचानकर कभी डर, कभी लालच और कभी जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं।
बिलासपुर।, 22 अगस्त 2026। फोन पर एक कॉल, मोबाइल पर एक लिंक और सामने वाला अगर जरा भी जल्दबाजी कर गया तो बैंक अकाउंट खाली! साइबर ठगों का खेल लगातार बदल रहा है। इसी खतरे को देखते हुए बिलासपुर पुलिस का “साइबर जागृति अभियान” अब विश्वविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों तक पहुंच गया है। शनिवार को अटल विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में हुए कार्यक्रम में विद्यार्थियों को साइबर ठगी के नए तरीकों और उससे बचने के आसान लेकिन जरूरी उपाय बताए गए।
एसएसपी बोले– पढ़े–लिखे लोग भी फंस रहे, सुनाया इंजीनियर से ठगी का मामला

एसएसपी रजनेश सिंह ने विभिन्न थाना क्षेत्रों में सामने आए साइबर अपराधों का हवाला देते हुए बताया कि साइबर ठग लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। उन्होंने एक सेवानिवृत्त इंजीनियर के साथ हुई साइबर ठगी का उदाहरण दिया और बताया कि किस तरह ठग विश्वास पैदा कर शिक्षित व्यक्ति से भी बड़ी रकम ठग लेते हैं।
एसएसपी ने अपने एक रिश्तेदार के साथ हुई साइबर ठगी का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस समय वह अपने रिश्तेदार की रकम वापस नहीं करा पाए थे, लेकिन अब साइबर अपराध पीड़ितों की समस्या के समाधान और ठगी की रकम वापस दिलाने के लिए पुलिस लगातार काम कर रही है और कई मामलों में सफलता भी मिली है।
एक लिंक पर क्लिक और खेल खत्म! युवाओं को दी ये चेतावनी
एसएसपी ने विद्यार्थियों को फर्जी लिंक, फर्जी URL, संदिग्ध वेबसाइट और अनजान डिजिटल संदेशों से खास तौर पर सावधान रहने कहा। उन्होंने बताया कि कई बार जल्दबाजी, लालच, डर या बिना सत्यापन किसी लिंक पर क्लिक करना ही ठगी की शुरुआत बन जाता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें। OTP, बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी, PIN और अन्य संवेदनशील विवरण किसी के साथ साझा न करें। संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि दिखाई दे तो तत्काल शिकायत करें।
QR कोड ने भी बढ़ाई मुसीबत, भुगतान से पहले जांच जरूरी
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को QR कोड के जरिए होने वाली ठगी से भी सावधान किया गया। एसएसपी ने कहा कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर QR कोड स्कैन करके भुगतान न करें।
भुगतान करने से पहले QR कोड और संबंधित व्यक्ति की जानकारी अच्छी तरह जांच लें। उन्होंने साइबर सुरक्षा से जुड़े उपयोगी मोबाइल एप्लीकेशन और Google Play Store पर उपलब्ध संसाधनों की जानकारी भी विद्यार्थियों को दी।
कलेक्टर संजय अग्रवाल बोले– साइबर अपराध किसी के साथ भी हो सकता है
कलेक्टर बिलासपुर संजय अग्रवाल ने भी साइबर अपराध की गंभीरता पर बात की। उन्होंने अपने करीबियों के साथ हुई साइबर फ्रॉड की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि साइबर अपराध किसी भी व्यक्ति को अपना शिकार बना सकता है।उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं, प्राध्यापकों और कर्मचारियों से खुद साइबर जागरूक बनने और अपने परिवार, दोस्तों व परिचितों को भी साइबर ठगी से बचाव के तरीके बताने का आह्वान किया।
सेल्फी अपलोड से लेकर साइबर क्विज तक, छात्रों ने लिया जागरूकता का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में ऑडिटोरियम में मौजूद सभी लोगों ने साइबर जागरूकता से संबंधित सेल्फी लेकर उसे अपलोड किया। इसके साथ ही Google Form के माध्यम से साइबर सुरक्षा और जागरूकता पर प्रश्नोत्तरी भी आयोजित की गई।उपस्थित लोगों को बिलासपुर पुलिस के सोशल नेटवर्किंग साइट्स को फॉलो करने और साइबर जागरूकता अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. ललित प्रकाश पटेरिया, एसएसपी एवं डीआईजी रजनेश सिंह, कलेक्टर संजय अग्रवाल, कुलसचिव डॉ. तारनीश गौतम, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण मधुलिका सिंह, सीएसपी कोतवाली गगन सिंह, रक्षित निरीक्षक भूपेंद्र कुमार गुप्ता, थाना प्रभारी कोनी जीतेंद्र गुप्ता सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी, विभिन्न संकायों के प्राध्यापक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

अब कोचिंग संस्थानों में भी पहुंचा साइबर जागृति अभियान
बिलासपुर पुलिस ने अभियान को विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रखा। इसी क्रम में बिलासपुर के चंद्रा अकादमी और चंद्रहासिनी अकादमी में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र–छात्राओं के बीच भी साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में रक्षित निरीक्षक भूपेंद्र कुमार गुप्ता, थाना प्रभारी कोतवाली देवेश राठौर, सूबेदार तिलक कुमार और सूबेदार अविनाश ध्रुव मौजूद रहे।
रक्षित निरीक्षक भूपेंद्र कुमार गुप्ता ने विद्यार्थियों को वर्तमान दौर में साइबर जागरूकता की जरूरत समझाई। उन्होंने कहा कि इंटरनेट और ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है और इसी के साथ साइबर अपराधियों की सक्रियता भी बढ़ी है। ऐसे में सावधानी और जागरूकता ही साइबर अपराध से बचने का सबसे प्रभावी रास्ता है।
“बेटा एक्सीडेंट में घायल है…” ठगों का नया जाल, कोतवाली TI ने खोला राज
थाना प्रभारी कोतवाली देवेश राठौर ने विद्यार्थियों को बताया कि साइबर ठग खासकर युवाओं और उनके परिवारों को किस तरह भावनात्मक रूप से निशाना बनाते हैं। उन्होंने ऐसे मामलों का उदाहरण दिया, जिनमें साइबर अपराधी बुजुर्ग माता-पिता को फोन कर उनके बेटे या बेटी के दुर्घटना में घायल होने अथवा अस्पताल में भर्ती होने की झूठी जानकारी देते हैं। इसके बाद तत्काल पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाता है। देवेश राठौर ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि ऐसी स्थिति में घबराकर पैसे भेजने के बजाय पहले संबंधित व्यक्ति से सीधे संपर्क करें और जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद लें।

बिलासपुर पुलिस की अपील– एक गलती और खाली हो सकता है बैंक अकाउंट
बिलासपुर पुलिस ने आम नागरिकों, विद्यार्थियों, युवाओं और अभिभावकों से साइबर अपराध को लेकर सतर्क रहने की अपील की है।पुलिस ने कहा कि अनजान लिंक, QR कोड, कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ऑफर पर बिना सत्यापन भरोसा न करें। OTP, PIN, पासवर्ड और बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी भी व्यक्ति से साझा न करें।साइबर ठगी का शिकार होने पर समय गंवाए बिना पुलिस और संबंधित साइबर अपराध शिकायत माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है। बिलासपुर पुलिस का संदेश साफ है—साइबर ठगों से मुकाबला हथियार से नहीं, जागरूकता से होगा। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।

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