CG News: हाथी ने कुचलकर ली ग्रामीण की जान, 20 लाख मुआवजा-2 नौकरी की मांग पर सड़क जाम; बनारस मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार

CG News: सूरजपुर के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में हाथी के हमले में 50 वर्षीय ग्रामीण की मौत के बाद गुरुवार सुबह ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। मृतक के परिवार को 20 लाख रुपये मुआवजा और दो सदस्यों को स्थायी नौकरी देने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने अंबिकापुर-बनारस मुख्य मार्ग पर पोड़ी मोड़ के पास शव रखकर चक्काजाम कर दिया। सुबह 9 बजे से लगे जाम ने दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लगा दी।
सरगुजा। ग्राम सिंघरा निवासी रामलाल (50) बुधवार को मोटरसाइकिल से ग्राम सरहरी गए थे। वहां से वापस घर लौटते वक्त रास्ते में अचानक हाथी से सामना हो गया। हाथी ने रामलाल को कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हमले में उनकी मोटरसाइकिल भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
घटना की खबर मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा अधिकारियों पर फूट पड़ा। ग्रामीणों ने इलाके में लगातार हाथियों के विचरण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। काफी समझाइश के बाद बुधवार को मामला शांत हुआ, लेकिन गुरुवार सुबह ग्रामीणों ने फिर मोर्चा खोल दिया।
ग्रामीणों ने रामलाल का शव अंबिकापुर-बनारस मुख्य मार्ग पर रख दिया और सड़क जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि मृतक के परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए और परिवार के दो सदस्यों को वन विभाग में स्थायी नौकरी दी जाए। मांगों को लेकर प्रशासन और ग्रामीणों के बीच काफी देर तक बातचीत चलती रही।
लंबी बातचीत के बाद प्रशासन ने शासन के प्रावधान के मुताबिक 6 लाख रुपये मुआवजे की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने पर सहमति जताई। वहीं परिवार के दो सदस्यों को वन विभाग में दैनिक वेतन भोगी के तौर पर काम देने का आश्वासन दिया गया। अधिकारियों ने यह भी भरोसा दिलाया कि शासन द्वारा निर्धारित राशि से अधिक मुआवजे के लिए उच्च स्तर पर पत्राचार किया जाएगा।
चक्काजाम के कारण अंबिकापुर-बनारस मार्ग पर यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। सड़क के दोनों ओर मालवाहक वाहनों के साथ यात्री बसों की लंबी कतारें लग गईं। जाम में फंसे यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।
प्रतापपुर में हाथियों का डेरा, ग्रामीणों की जान पर संकट
प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में हाथियों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। जंगल और प्राकृतिक वातावरण हाथियों के अनुकूल होने के कारण पूरे साल इलाके में हाथियों का मूवमेंट बना रहता है। ऐसे में वन क्षेत्र से लगे गांवों के ग्रामीणों के सामने हाथी-मानव संघर्ष का खतरा लगातार मंडराता रहता है।

रामलाल की मौत के बाद ग्रामीणों का सवाल साफ है—जब इलाके में हाथियों की मौजूदगी सालभर रहती है, तो ग्रामीणों की जान बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम आखिर कब होंगे?

Live Cricket Info



