छत्तीसगढ़बीजापुर

CG News:- 15 लाख मंजूर, फिर भी झोपड़ी में स्कूल! तीन साल से पक्की छत का इंतजार, बारिश होते ही बच्चों की पढ़ाई बंद

CG News:- सोचिए, बच्चे सुबह स्कूल जाने के लिए किताबें लेकर निकलें और उन्हें पता हो कि बारिश हुई तो आज पढ़ाई नहीं होगी। बीजापुर के भैरमगढ़ की प्राथमिक शाला कोपनजर्री में कुछ ऐसी ही तस्वीर सामने आई है। स्कूल भवन के लिए 15 लाख रुपये स्वीकृत हो चुके हैं, लेकिन बच्चे पिछले तीन साल से पक्की छत का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल पढ़ाई झोपड़ी में हो रही है और बारिश होते ही घास-फूस की छत से पानी टपकने लगता है।

बीजापुर। संकुल केंद्र रानीबोदली के अंतर्गत आने वाली प्राथमिक शाला कोपनजर्री के बच्चों की कहानी सिर्फ एक स्कूल भवन की कहानी नहीं है। यह उन परिवारों की उम्मीद की कहानी है, जो चाहते हैं कि उनके बच्चे उनसे बेहतर जिंदगी जिएं और पढ़-लिखकर आगे बढ़ें।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

लेकिन तीन साल से बच्चों की पढ़ाई एक झोपड़ी में सिमटी हुई है।

बारिश आती है तो किताबें समेटनी पड़ती हैं

स्कूल की घास-फूस की छत बारिश का पानी नहीं रोक पाती। पानी टपकने लगता है तो बच्चों के लिए कक्षा में बैठना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में पढ़ाई रोककर छुट्टी करनी पड़ती है।

बच्चों के लिए शायद सबसे मुश्किल बात यही होगी कि स्कूल जाना उनकी इच्छा से नहीं, मौसम की मर्जी से तय होता है।

15 लाख रुपये मंजूर, फिर भी भवन का इंतजार

सबसे ज्यादा हैरानी इस बात को लेकर है कि स्कूल भवन निर्माण के लिए वर्ष 2024-25 में NMDC से 15 लाख रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं।

इसके बावजूद निर्माण शुरू नहीं हुआ।

ग्रामीणों और अभिभावकों के मन में स्वाभाविक सवाल है—जब भवन के लिए राशि स्वीकृत हो गई तो आखिर काम शुरू क्यों नहीं हुआ?

  Bilaspur Highcourt News:– हाईवे पर BMO का बर्थडे, शहर में स्टंट—हाईकोर्ट भड़का, बोला– रसूखदार मनमानी कर रहे, सरकार सिर्फ देख रही”

कागज पर स्वीकृति है, लेकिन बच्चों के सिर पर छत अब भी नहीं।

सिर्फ भवन नहीं, दूसरी व्यवस्थाओं पर भी सवाल

स्कूल को लेकर पहले मध्यान्ह भोजन और शिक्षकों की अनुपस्थिति जैसे मुद्दे भी सामने आ चुके हैं। ऐसे में सवाल सिर्फ एक कमरे और छत का नहीं रह जाता। सवाल यह है कि दूरदराज के इन बच्चों को नियमित और बेहतर शिक्षा देने की व्यवस्था जमीन पर कितनी मजबूत है।

जिन बच्चों ने नक्सल का दौर देखा, उन्हें अब तो सुविधा मिले

बीजापुर का यह इलाका उन क्षेत्रों में रहा है, जहां नक्सल समस्या के कारण शिक्षा व्यवस्था को लंबे समय तक मुश्किलों का सामना करना पड़ा। ऐसे में यहां के बच्चों के लिए स्कूल सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य की उम्मीद है।

लेकिन जब स्कूल ही झोपड़ी में हो और बारिश में पढ़ाई बंद करनी पड़े, तो उन बच्चों से बड़े सपने देखने की उम्मीद कैसे की जाए?

अब इंतजार खत्म होना चाहिए

तीन साल का इंतजार कम नहीं होता। 15 लाख रुपये की स्वीकृति के बाद भी अगर बच्चों को पक्की छत नहीं मिल पाई, तो जिम्मेदार व्यवस्था को इसका जवाब देना चाहिए।

बच्चों को यह पता नहीं कि फाइल कहां अटकी है, किस विभाग की जिम्मेदारी है या निर्माण की प्रक्रिया में क्या परेशानी है। उन्हें सिर्फ इतना पता है कि बारिश में उनकी किताबें भीगती हैं और स्कूल की पढ़ाई रुक जाती है।

अब जरूरत किसी नए आश्वासन की नहीं, बल्कि स्कूल भवन का काम जमीन पर शुरू होने की है। क्योंकि इन बच्चों का बचपन इंतजार में नहीं, पढ़ाई में गुजरना चाहिए।

Was this article helpful?
YesNo

Live Cricket Info

RAVI TAMBOLI

एक सक्रिय और निष्पक्ष समाचार रिपोर्टर हैं, जो सामाजिक, राजनीतिक और स्थानीय मुद्दों पर सटीक व तथ्यात्मक रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button