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CG News:- राखी पर बुके नहीं, बहनों को मिला ज्ञान का उपहार कलेक्टर और एसएसपी की पहल, “बुके नहीं, बुक भेंट करें” अभियान के जरिए शिक्षा और ज्ञान को बढ़ावा देने की अच्छी पहल

CG News:- बिलासपुर। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्यार और भरोसे का त्योहार है। इस दिन भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं। लेकिन बिलासपुर में इस बार बहनों को ऐसा उपहार देने की पहल की गई, जो सीधे उनकी पढ़ाई और भविष्य से जुड़ा है।

बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल और पुलिस वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के मार्गदर्शन में “बुके नहीं, बुक भेंट करें” अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के पीछे सोच बेहद सरल है—किसी को बुके देने के बजाय किताब, कॉपी, पेन या पढ़ाई से जुड़ी सामग्री दी जाए, ताकि वह किसी के काम आ सके।

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इसी पहल के तहत रक्षाबंधन के मौके पर रजनेश सिंह ने बहनों के लिए कॉपी, पेन और अन्य अध्ययन सामग्री आर्यन फिल्म टीम को सौंपी। यह सामग्री अब टीम के सदस्य अलग-अलग स्कूलों में जाकर बहनों को वितरित करेंगे।

इस पहल में सबसे खास बात यह है कि उपहार को सिर्फ एक रस्म नहीं माना गया, बल्कि उसे बच्चों की पढ़ाई से जोड़ने की कोशिश की गई है। एक कॉपी किसी बच्चे के रोजमर्रा के काम आ सकती है, एक पेन उसके सपनों को लिख सकता है और एक किताब शायद उसे आगे बढ़ने का रास्ता दिखा सकती है।

छोटी सी पहल, लेकिन संदेश बड़ा

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आज किसी कार्यक्रम में बुके देना एक सामान्य परंपरा बन चुकी है। कुछ देर के लिए अच्छा लगता है, तस्वीरें भी आती हैं और फिर फूल मुरझा जाते हैं। ऐसे मेंबुके नहीं, बुक भेंट करेंअभियान एक छोटी लेकिन जरूरी सोच सामने रखता हैसम्मान ऐसा हो, जिसका फायदा लंबे समय तक मिले।

रक्षाबंधन के दिन बहनों के लिए पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध कराना इसी सोच को आगे बढ़ाता है। भाईबहन के रिश्ते में प्यार के साथ शिक्षा का यह उपहार निश्चित रूप से एक अलग संदेश देता है।

इस अवसर पर आर्यन फिल्म की ओर से निर्देशक रामा नन्द तिवारी, श्री दिनेश चंदानी (होटल बंशीवाला), श्रीमती प्रान्तिका भारद्वाज (उप निरीक्षक), श्री उमा शंकर पाण्डेय (पूर्व यातायात उप निरीक्षक), सनी मनीष भटेजा, जीतेन्द्र सिदार और रवि सहित टीम के सदस्य मौजूद रहे।

रक्षाबंधन पर हुई यह पहल शायद बहुत बड़ी खबर लगे, लेकिन किसी स्कूल की किसी बहन के हाथ में जब यही कॉपीपेन पहुंचेगा, तो उसके लिए यह उपहार जरूर मायने रखेगा।

क्योंकि कुछ उपहार कुछ दिनों तक याद रहते हैं, और कुछ उपहार किसी की पूरी जिंदगी में साथ चलते हैं।

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Kanha Tiwari

छत्तीसगढ़ के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्होंने पिछले 10 वर्षों से लोक जन-आवाज को सशक्त बनाते हुए पत्रकारिता की अगुआई की है।

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