Bilaspur News:- रेत घाट जनसुनवाई विवादों में, फर्जी समर्थन, बाहरी महिलाओं और दबाव के आरोप… वीडियो ने खोली प्रक्रिया की परतें

Bilaspur News:-बिलासपुर (मस्तूरी)। ग्राम कुकुर्दीकला में प्रस्तावित रेत घाट की जनसुनवाई अब गंभीर विवादों में घिर गई है। पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए आयोजित इस प्रक्रिया पर अब पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और स्थानीय महिलाओं के बयानों ने पूरे मामले को तूल दे दिया है।
Bilaspur बिलासपुर (मस्तूरी)। ग्राम कुकुर्दीकला में आयोजित रेत घाट की जनसुनवाई अब गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। जनसुनवाई के दौरान खुलासा हुआ कि कई महिलाओं को दूसरे गांव से समर्थन देने के लिए लाया गया था। अब इस वीडियो ने पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनप्रतिनिधियों ने सुनवाई के दौरान महिलाओं और ग्रामीणों को प्रभावित कर जबरन समर्थन जुटाने का प्रयास करते हुए वीडियो ने देखा जा सकता है, जिससे जनसुनवाई की मूल भावना (उद्देश्य) ही प्रभावित होती नजर आ रही है।
बता दें कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा कुकुर्दीकला में प्रस्तावित 11 हेक्टेयर क्षेत्र में रेत खनन के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु यह जनसुनवाई 30 अप्रैल को आयोजित की गई थी। इस परियोजना की वार्षिक उत्खनन क्षमता 99,000 घनमीटर बताई गई है। लेकिन जिस प्रक्रिया का उद्देश्य स्थानीय लोगों की राय लेना और पर्यावरणीय प्रभावों का मूल्यांकन करना था, वही प्रक्रिया अब कथित रूप से प्रभावित और नियंत्रित नजर आ रही है। वीडियो में जनपद पंचायत मस्तूरी के सदस्य माधुरी के प्रतिनिधि उतरा रात्रे महिलाओं को समर्थन के पर्चे भरवाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं, कुर्सियों पर बैठी महिलाओं को उठाकर समर्थन देने के लिए प्रेरित करते हुए भी वे नजर आ रहे हैं। वहीं भाजपा नेता चंद्र प्रकाश सूर्या भी मौके पर मौजूद रहकर हाथ के इशारों से लोगों को समर्थन देने के लिए कहते दिख रहे हैं, जबकि वे इस क्षेत्र के अधिकृत प्रतिनिधि भी नहीं बताए जा रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर गंभीर संदेह उत्पन्न कर दिया है।
महिलाओं ने ही किया चौंकाने वाला खुलासा
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जनसुनवाई में शामिल कई महिलाएं प्रभावित गांव कुकुर्दीकला की नहीं थीं, बल्कि उन्हें दूसरे गांव सोनसरी से लाया गया था। आरोप है कि इन महिलाओं से अन्य लोगों के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर करवाए गए, जिससे समर्थन का आंकड़ा बढ़ाया जा सके। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल जनसुनवाई की प्रक्रिया का उल्लंघन है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ
भी खिलवाड़ माना जाएगा।
केस – 1
सोनसरी से पहुंची बुजुर्ग महिला दुकलहीन ने बताया कि पर्चा तो दिया जा रहा है लेकिन कुछ बताया नहीं जा रहा है इसमें साइन कराया जा रहा है हम कर रहे हैं। इसे यही जनसुनवाई स्थल पर दिया है जिस पर हमें साइन करने को कहा जा रहा है तो हम कर रहे हैं हमें कोई जानकारी नहीं है। क्या लिखा है कुछ पता नहीं लेकिन साइन करने को कह रहे हैं और इसे जमा करने को इसलिए हम कर रहे हैं।
केस -2
समर्थन पत्र बांट कर महिलाओं के फर्जी हस्ताक्षर से समर्थन करा रही महिला शोभा यादव ने कहा कि वे सोनसरी से आई हुई हैं। और महिला समूह से जुड़ी हुई है उन्हें यह काम दिया गया है कि वह सभी महिलाओं को समर्थन पत्र बांटे और उनके हस्ताक्षर करा कर समर्थन दिलाए।
अपने आप को साफ पाख बताने वाले नेता का देखिए वीडियो
वहीं प्रेस क्लब में भाजपा नेता चंद्र प्रकाश सूर्या ने प्रेस वार्ता आयोजित की थी, जहां उन्होंने कहा था कि रेत घाट की जन सुनवाई से कोई मतलब नहीं है, लेकिन वीडियो देख सकते हैं कि जो अपने आप को साफ पाख बताने वाले नेता कैसे लोगों को इशारा करते हुए समर्थन देने की बात कह रहे हैं।
CCTV फुटेज से खुलेंगे राज, कैसे हुई जनसुनवाई प्रभावित !
जनसुनवाई स्थल पर लगाए गए CCTV कैमरों की फुटेज अब इस पूरे मामले की सच्चाई सामने ला सकती है। प्रशासन द्वारा यदि निष्पक्ष जांच की जाती है, तो यह स्पष्ट हो सकता है कि किस तरह सुनियोजित तरीके से इस प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।
भाजपा नेता के पैसा लेनदेन का वीडियो हुआ था वायरल
सोशल मिडिया पर एक वीडियो सामने आया था, जिसमें कथित तौर पर भाजपा नेता चंद्र प्रकाश सूर्य पैसे लेते हुए नजर आ रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इससे पूरे मामले ने और अधिक तूल पकड़ लिया है। इन घटनाओं के सामने आने के बाद जनसुनवाई की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग गया है। अब रेत घाट की इस जनसुनवाई ने प्रशासनिक व्यवस्था, पारदर्शिता और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
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