CG News:- बंदी पेशी की ड्यूटी थी… 129 दिन तक ही गायब हो गया आरक्षक, नोटिस पर भी नहीं लौटा तो एसपी ने दिखा दिया बाहर का रास्ता

CG News:- वर्दी पहनने के साथ जिम्मेदारी भी आती है। लेकिन सूरजपुर में एक आरक्षक अपनी ड्यूटी छोड़कर ऐसा गायब हुआ कि पूरे 129 दिन तक विभाग को उसकी मौजूदगी का इंतजार करना पड़ा। कई नोटिस भेजे गए, जवाब मांगा गया, ड्यूटी पर लौटने के निर्देश दिए गए, लेकिन जब कोई असर नहीं हुआ तो विभागीय जांच बैठी। जांच में आरोप सही पाए गए और आखिरकार एसपी ने आरक्षक को नौकरी से ही बाहर कर दिया।
सूरजपुर। पुलिस विभाग में अनुशासन सर्वोपरि माना जाता है और सूरजपुर में इसकी एक बार फिर मिसाल देखने को मिली है। लगातार 129 दिनों तक बिना अनुमति और बिना विभाग को विधिवत सूचना दिए ड्यूटी से नदारद रहने वाले आरक्षक अमरदीप विश्वकर्मा को पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल ने सेवा से पृथक कर दिया है। यह कार्रवाई विभागीय जांच में आरोप सिद्ध होने, अभियोजन साक्ष्यों, सेवा अभिलेखों और उपलब्ध दस्तावेजों के गहन परीक्षण के बाद की गई।
जानकारी के अनुसार आरक्षक अमरदीप विश्वकर्मा की ड्यूटी 25 जून 2025 को बंदी पेशी के लिए लगाई गई थी। लेकिन वह उस दिन ड्यूटी पर नहीं पहुंचा और इसके बाद बिना किसी अनुमति या विभाग को नियमानुसार सूचना दिए लगातार अनुपस्थित रहा। 25 जून 2025 से 31 अक्टूबर 2025 तक वह पूरे 129 दिनों तक ड्यूटी पर नहीं लौटा। इस दौरान विभाग ने कई बार नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा और तत्काल ड्यूटी ज्वाइन करने के निर्देश भी दिए, लेकिन उसने विभागीय आदेशों की अनदेखी की।
इलाज के कागज दिए, लेकिन छुट्टी की प्रक्रिया नहीं अपनाई
मामले में विभागीय जांच शुरू की गई। आरक्षक को आरोप पत्र जारी कर अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया। जांच अधिकारी ने अभियोजन साक्ष्यों, दस्तावेजों और गवाहों के बयान का परीक्षण किया। जांच के दौरान आरक्षक ने उपचार से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए, लेकिन यह भी सामने आया कि उसने लंबी अनुपस्थिति के दौरान विभाग को न तो कोई लिखित सूचना दी और न ही अवकाश स्वीकृत कराने के लिए नियमानुसार आवेदन किया। जांच में इसे पुलिस जैसे अनुशासित विभाग में गंभीर अनुशासनहीनता और कर्तव्य के प्रति लापरवाही माना गया।
पहले भी कई बार हो चुकी थी विभागीय कार्रवाई
जांच के दौरान आरक्षक का पुराना सेवा रिकॉर्ड भी खंगाला गया। इसमें सामने आया कि नियुक्ति के बाद से वह पहले भी कई बार अनाधिकृत अनुपस्थिति के मामलों में विभागीय कार्रवाई झेल चुका है। सेवा अभिलेखों के अनुसार उसके खिलाफ कई छोटी और बड़ी सजाएं दर्ज हैं। कभी उसकी अनुपस्थिति की अवधि अवैतनिक घोषित की गई, कभी वेतनवृद्धि रोकी गई और कई अन्य दंडात्मक कार्रवाई भी की गई। इसके बावजूद उसके आचरण और कार्यशैली में कोई सुधार नहीं आया। विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया कि उसके सेवा रिकॉर्ड से यह साफ है कि वह विभागीय जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर नहीं है और भविष्य में एक सफल एवं अनुशासित पुलिसकर्मी के रूप में बने रहने की संभावना भी बेहद कम है।
129 दिन की पूरी अवधि घोषित हुई ‘नो वर्क, नो पेमेंट’
विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल ने 31 जुलाई 2026 को आरक्षक अमरदीप विश्वकर्मा को सेवा से पृथक करने का आदेश जारी किया। साथ ही 25 जून 2025 से 31 अक्टूबर 2025 तक की 129 दिनों की अनुपस्थिति अवधि को छत्तीसगढ़ पुलिस नियमों के तहत ‘कार्य नहीं, वेतन नहीं (No Work No Payment)’ के सिद्धांत के अनुसार अवैतनिक घोषित कर दिया गया।
एसपी का साफ संदेश- वर्दी में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी
पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल ने कहा कि पुलिस विभाग एक अनुशासित बल है, जहां प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी से कर्तव्यनिष्ठा, जवाबदेही और अनुशासन की अपेक्षा की जाती है। विभागीय नियमों का उल्लंघन, अनाधिकृत अनुपस्थिति और कर्तव्य के प्रति लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सूरजपुर पुलिस में अनुशासनहीनता के मामलों में आगे भी निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि पुलिस बल की कार्यकुशलता, जवाबदेही और जनता का विश्वास बना रहे।

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