
CG News:-सिरगिट्टी में सरकारी ट्रांसफॉर्मर से बिजली लेकर चल रहा था करोड़ों का नाली निर्माण, विभाग ने 77 हजार की पेनल्टी का दावा किया, लेकिन FIR आज तक नहीं; अब कोर्ट में परिवाद की तैयारी, पूरे मामले पर उठे बड़े सवाल
बिलासपुर। अगर कोई आम उपभोक्ता बिजली चोरी करते पकड़ा जाए तो बिजली विभाग की शिकायत पर पुलिस तत्काल एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर देती है। लेकिन जब मामला करोड़ों रुपये के सरकारी निर्माण कार्य और कथित तौर पर रसूखदार ठेकेदार से जुड़ जाए, तो कानून की रफ्तार क्यों थम जाती है? बिलासपुर के सिरगिट्टी क्षेत्र में सामने आए कथित बिजली चोरी के मामले ने अब यही सवाल खड़े कर दिए हैं।
सिरगिट्टी में करोड़ों रुपये की लागत से निर्माणाधीन नाली परियोजना में सरकारी ट्रांसफॉर्मर से कथित बिजली चोरी कर निर्माण कार्य कराए जाने का वीडियो सामने आने के बाद बिजली विभाग ने करीब 77 हजार रुपये की पेनल्टी लगाए जाने की बात कही। लेकिन हैरानी की बात यह है कि घटना सामने आने के बाद भी संबंधित ठेकेदार के खिलाफ आज तक पुलिस में एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी। अब बिजली विभाग का कहना है कि उच्च अधिकारियों के निर्देश के बाद पुलिस में अपराध दर्ज कराने के बजाय मामले में न्यायालय में परिवाद (Complaint Case) दायर किया जाएगा।
थाने के कई चक्कर… फिर भी नहीं हुई FIR
सिरगिट्टी जोन में पदस्थ बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि निर्माण एजेंसी भगवती कंस्ट्रक्शन के संचालक प्रशांत मिश्रा के खिलाफ अपराध दर्ज कराने के लिए कई बार रिपोर्ट लेकर सिरगिट्टी थाने पहुंचे। अधिकारियों का दावा है कि थाना प्रभारी से मुलाकात नहीं हो सकी और अन्य पुलिसकर्मियों ने भी थाना प्रभारी के निर्देश का हवाला देकर मामला दर्ज नहीं किया।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पुलिस में अपराध दर्ज नहीं होने के कारण अब पूरे प्रकरण की फाइल डिवीजन कार्यालय भेजी गई है और उच्च अधिकारियों के निर्देश पर न्यायालय में परिवाद दायर करने की तैयारी की जा रही है।
JE बोले- हमारा काम बिजली देखना है, थाने के चक्कर लगाना नहीं
मामले में विभाग के जूनियर इंजीनियर ने भी स्पष्ट किया कि उनका दायित्व बिजली व्यवस्था और तकनीकी कार्यों का है, न कि बार-बार थाने के चक्कर लगाना। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों ने पुलिस कार्रवाई के लिए लगातार प्रयास किए।
पुलिस का दावा- हमारे पास कोई मामला आया ही नहीं
इधर सिरगिट्टी थाना प्रभारी का कहना है कि अब तक इस तरह का कोई मामला थाने नहीं आया है। यदि बिजली विभाग की ओर से कोई शिकायत या प्रतिवेदन प्राप्त होता है तो संबंधित आरोपी के खिलाफ नियमानुसार तत्काल अपराध दर्ज किया जाएगा।
यानी एक तरफ बिजली विभाग दावा कर रहा है कि कई बार रिपोर्ट लेकर थाने गए, दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि मामला आया ही नहीं। ऐसे में सवाल यह है कि सच कौन बोल रहा है?
क्या कहता है कानून?
मामले के जानकारों का कहना है कि विद्युत अधिनियम की धारा-135 के तहत बिजली चोरी पाए जाने पर विभाग द्वारा आकलन (डिमांड) की कार्रवाई के साथ पुलिस में अपराध दर्ज कराना भी सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। इसके बाद पुलिस जांच कर अभियोजन की कार्रवाई आगे बढ़ाती है। लेकिन सिरगिट्टी के इस मामले में प्रक्रिया उलटी नजर आ रही है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती तो विभाग न्यायालय में परिवाद दायर कर सकता है। हालांकि यह प्रक्रिया पुलिस जांच से अलग होती है और न्यायालय उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करता है।
77 हजार की पेनल्टी… लेकिन दस्तावेज कहां हैं?
पूरे मामले में एक और बड़ा सवाल यह भी है कि बिजली विभाग ने 77 हजार रुपये की पेनल्टी लगाए जाने का दावा तो किया, लेकिन आज तक न तो डिमांड नोटिस सार्वजनिक किया गया और न ही जुर्माने की प्रति मीडिया को उपलब्ध कराई गई। ऐसे में कार्रवाई की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
पहले भी विवादों में रहा यही निर्माण कार्य
गौरतलब है कि सिरगिट्टी की इसी नाली निर्माण परियोजना को लेकर पहले भी कई सवाल उठ चुके हैं। निर्माण के दौरान बिजली के खंभे नहीं हटाए गए, सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप लगे और बिजली विभाग ने संभावित हादसे की चेतावनी भी दी थी। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा।
अब कथित बिजली चोरी का वीडियो सामने आने के बाद पूरा मामला फिर सुर्खियों में है।
सूत्रों का दावा है कि इस करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट में कई नियमों की अनदेखी की गई। नगर निगम के जोन अधिकारियों ने भी कथित तौर पर निर्माण एजेंसी को कई नोटिस जारी किए, लेकिन उन नोटिसों का कोई असर नहीं हुआ और वे फाइलों तक ही सीमित रह गए।
मोबाइल नंबर देने में भी नहीं दिखाई दिलचस्पी
इस पूरे मामले में जब बिजली विभाग के अधिकारियों से सिरगिट्टी थाना प्रभारी का मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने की बात कही गई तो उन्होंने भी इस मामले में विशेष रुचि नहीं दिखाई। अधिकारियों ने सिर्फ इतना कहा कि फाइल डिवीजन कार्यालय भेज दी गई है और अब आगे की कार्रवाई उच्च अधिकारियों के निर्देश पर होगी।
सबसे बड़ा सवाल…
अगर बिजली चोरी के आरोप में किसी आम व्यक्ति के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज हो सकती है, तो करोड़ों रुपये के सरकारी प्रोजेक्ट में कथित बिजली चोरी के मामले में अब तक अपराध दर्ज क्यों नहीं हुआ?
क्या कानून सबके लिए समान है?
क्या रसूखदार ठेकेदार को किसी विभागीय या राजनीतिक संरक्षण का लाभ मिल रहा है?
क्या इसलिए अब एफआईआर की जगह कोर्ट में परिवाद का रास्ता चुना जा रहा है?

इन सवालों के जवाब अब सिर्फ बिजली विभाग या पुलिस ही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को देने होंगे। क्योंकि मामला केवल 77 हजार रुपये की पेनल्टी का नहीं, बल्कि कानून के समान अनुपालन और सरकारी परियोजनाओं में जवाबदेही का भी है


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