CG News:- सीईओ के सामने दंडवत हुआ परिवार… VIDEO आवास की गुहार ने सिस्टम से पूछ लिए कई सवाल राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र रकमार जनजाति की पीड़ा ने सुशासन तिहार में उजागर की जमीनी हकीकत योजनाएं मौजूद, फिर भी क्यों भटक रहे हैं पात्र हितग्राही?”

CG News:-सरकारी योजनाओं के दावों और जमीन पर हकीकत के बीच की खाई एक बार फिर सुशासन तिहार में उजागर हो गई। विशेष पिछड़ी जनजाति (कमार) समुदाय से जुड़े एक परिवार ने आवास की मांग को लेकर जिला पंचायत सीईओ के सामने दंडवत होकर पैर पकड़ लिया और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर दिलाने की गुहार लगाई।

Gariaband गरियाबंद जिले के देवभोग विकासखंड के माडागांव और बरही गांव से पहुंचे इस परिवार ने बताया कि वे लंबे समय से आवास के लिए आवेदन कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला है। मजबूरी में आज भी वे कच्चे और अस्थायी आशियाने में रहने को विवश हैं।
कार्यक्रम के दौरान जैसे ही परिजनों ने अपनी स्थिति रखी, माहौल कुछ क्षण के लिए गंभीर हो गया। प्रशासनिक मंच पर दंडवत होकर की गई यह गुहार केवल एक भावुक दृश्य नहीं, बल्कि व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर उठता सीधा सवाल बन गई।
योजनाएं मौजूद, फिर भी जमीन पर संघर्ष क्यों?
प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजना के बावजूद पात्र परिवारों का इस स्थिति तक पहुंचना कई परतों को उजागर करता है। सवाल यह उठता है कि—
- क्या पात्र हितग्राहियों की पहचान सही तरीके से हो रही है?
- क्या स्थानीय स्तर पर सूची और क्रियान्वयन में गड़बड़ियां हैं?
- और आखिर क्यों जरूरतमंद परिवारों को इस तरह सार्वजनिक मंच पर दंडवत होकर गुहार लगानी पड़ रही है?
“राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र” कहे जाने वाले समुदाय की स्थिति
कमार जनजाति को राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र कहा जाता है। ऐसे में इस समुदाय के लोगों का बुनियादी आवास के लिए इस स्तर तक पहुंचना सिस्टम की संवेदनशीलता और जवाबदेही दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जमीनी हकीकत बनाम सरकारी दावा
यह मामला सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि उस पूरे सिस्टम की तस्वीर है जहां योजनाओं की फाइलें तो आगे बढ़ती हैं, लेकिन जमीन पर कई पात्र आज भी अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सुशासन तिहार का यह दृश्य अब एक सवाल बनकर खड़ा है—क्या योजनाएं वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं, या फिर सिर्फ मंचों पर ही “सुशासन” दिखाई दे रहा है?
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