CG Sand Mafia :VIDEO हाईवा से कुचलने की कोशिश के 48 घंटे बाद भी कार्रवाई नहीं… सवाल ये है कि आदेश मुख्यमंत्री के हैं, फिर सुन कौन रहा है?

CG News:- एक तरफ मुख्यमंत्री के सख्त आदेश… दूसरी तरफ सक्ती में बेखौफ दौड़ते रेत से भरे हाईवा। पत्रकार को कुचलने की कोशिश के आरोप, CCTV में घटना कैद होने का दावा, फिर भी 48 घंटे बाद कार्रवाई पर सवाल। आखिर रेत माफियाओं को किसका भरोसा है? क्या सिस्टम की आंखों के सामने चल रहा है अवैध कारोबार या फिर जिम्मेदार जानकर भी अनजान बने बैठे हैं? सवाल बड़ा है—कानून का डर किसे है, रेत माफियाओं को या सिर्फ आम लोगों को?
Sakti सक्ती। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार द्वारा अवैध रेत उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जा रहे हैं। सरकार अवैध खनन पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का दावा कर रही है, लेकिन सक्ती जिले में सामने आए घटनाक्रम ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सक्ती थाना क्षेत्र के वार्ड क्रमांक-1 में रेत परिवहन की सूचना देने वाले पत्रकार को हाईवा से कुचलने की कोशिश का आरोप लगा है। घटना के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी आरोपी हाईवा चालक और वाहन मालिक के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए सवाल उठ रहे हैं कि आखिर प्रशासन इतना सुस्त क्यों है?
CCTV फुटेज, वाहन नंबर और जानकारी… फिर भी कार्रवाई में देरी क्यों?
बताया जा रहा है कि अवैध रेत परिवहन की सूचना पुलिस को दी गई थी। इसके बाद हाईवा वाहन क्रमांक CG-11 BH-1621 के चालक ने पत्रकार को कथित तौर पर धमकी दी।
आरोप है कि चालक ने कहा — “गाड़ी रोकने की कोशिश करोगे तो कुचल कर हत्या कर दूंगा।”
इसके बाद हाईवा चालक ने वाहन को पत्रकार की ओर बढ़ाया और करीब 2 फीट तक ठोकर मारते हुए आगे ले गया। मौके पर मौजूद लोगों ने घटना को देखा। घटना का सीसीटीवी फुटेज होने का दावा किया जा रहा है।
वीडियो क्लिप और पूरी जानकारी थाना प्रभारी, खनिज अधिकारी और पुलिस के उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने की बात कही जा रही है।
फिर सवाल उठता है —
जब घटना का वीडियो मौजूद है, वाहन नंबर सामने है और शिकायत भी की गई है, तो कार्रवाई में देरी क्यों?
48 घंटे बाद भी FIR का इंतजार
आरोप है कि घटना को 48 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक हाईवा चालक और वाहन मालिक के खिलाफ अपराध दर्ज नहीं किया गया है।
क्या पुलिस जांच में देरी कर रही है?
या फिर इस मामले में किसी दबाव का इंतजार किया जा रहा है?
एक पत्रकार को सार्वजनिक सड़क पर कुचलने की कोशिश जैसे गंभीर आरोप के बाद भी कार्रवाई नहीं होना कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
सुबह-सुबह शहर में दौड़ते हैं 15 से 20 हाईवा
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सक्ती शहर में रोज सुबह करीब 5 बजे से 6 बजे के बीच 15 से 20 हाईवा रेत लेकर गुजरते हैं।
आरोप है कि ये वाहन:
* थाना परिसर के सामने से,
* एसडीएम कार्यालय के सामने से,
* न्यायालय मार्ग से,
* नगर के प्रमुख रास्तों से होकर निकलते हैं।
इन मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों से भी इसकी जांच की जा सकती है।
शिकायतों के बावजूद क्यों नहीं रुक रहा अवैध कारोबार?
स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध रेत खनन, परिवहन और डंपिंग को लेकर कई बार खनिज विभाग, पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई।
लेकिन आरोप है कि कार्रवाई नहीं होने से रेत कारोबारियों के हौसले लगातार बढ़ रहे हैं।
आरोप यह भी है कि कई बार कार्रवाई से पहले ही अवैध परिवहन करने वालों तक सूचना पहुंच जाती है, जिससे वाहन मौके से हट जाते हैं।
हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
मुख्यमंत्री के आदेशों पर भी सवाल
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
सरकार ने:
* अवैध परिवहन पर सख्त जुर्माना,
* वाहनों की जब्ती,
* अधिकारियों की जवाबदेही,
* ड्रोन और उड़नदस्ता निगरानी जैसे कदमों की बात कही है।
लेकिन सक्ती में सवाल उठ रहा है कि आखिर इन आदेशों का असर जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा?
अरुण साव और विजय शर्मा के निर्देश भी बेअसर?
उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री अरुण साव ने अवैध रेत खनन पर सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई की बात कही है।
वहीं उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी स्पष्ट किया है कि अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
लेकिन सक्ती में सवाल है —
क्या रेत माफिया सरकार के आदेशों को चुनौती दे रहे हैं?
या फिर स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई से बच रहे हैं?
सबसे बड़ा सवाल… कार्रवाई कब?
जब मुख्यमंत्री के निर्देश हैं, जब सरकार की नीति स्पष्ट है, जब अवैध परिवहन की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं और अब पत्रकार को कुचलने की कोशिश जैसी घटना सामने आ चुकी है…
तो सवाल सिर्फ रेत माफियाओं पर नहीं, बल्कि उन जिम्मेदार अधिकारियों पर भी है जिनकी निगरानी में यह सब चल रहा है।
क्या अब लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी या फिर मामला सिर्फ जांच तक सीमित रह जाएगा?

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