CG Crime News:- सर्पदंश फर्जीवाड़े में बड़ा धमाका… डॉक्टर-बाबू के बाद अब सिम्स चौकी के 2 नगर सैनिक गिरफ्तार, मौत की सूचना बेचकर चलता थें करोड़ों का खेल; SSP बोले- गिरोह का एक-एक चेहरा होगा बेनकाब

CG Crime News:- बिलासपुर में सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़े की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे पूरे रैकेट की परतें खुलती जा रही हैं। डॉक्टर, वकील और सरकारी बाबुओं के बाद अब सिम्स चौकी के दो नगर सैनिक भी पुलिस के शिकंजे में हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि पोस्टमार्टम के लिए शव पहुंचते ही गिरोह तक सूचना पहुंचाई जाती थी, जिसके बाद परिजनों को सरकारी मुआवजे का लालच देकर फर्जी दस्तावेज तैयार कराए जाते थे। एसएसपी रजनेश सिंह ने साफ कहा है कि यह कार्रवाई यहीं नहीं रुकेगी, गिरोह का एक-एक चेहरा बेनकाब होगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
बिलासपुर। जिले में सर्पदंश से मौत के फर्जी मामलों के जरिए शासन की आपदा सहायता राशि हड़पने वाले बहुचर्चित रैकेट की जांच में सिविल लाइन पुलिस को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने सिम्स पुलिस चौकी में पदस्थ रहे दो नगर सैनिकों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को सोमवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। पुलिस को उम्मीद है कि इस पूछताछ में पूरे नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में सरकंडा के बंधवापारा निवासी रामकुमार पाटनवार (40) और सतनाम नगर, अमेरी निवासी रामेश्वर भास्कर (53) शामिल हैं। दोनों लंबे समय तक सिम्स पुलिस चौकी में पदस्थ रहे हैं। इनमें से एक वर्तमान में भी वहीं कार्यरत था।
शव पहुंचते ही गिरोह को मिल जाती थी खबर
जांच में सामने आया कि दोनों नगर सैनिक हीरा खांडे गिरोह के लिए सूचना तंत्र का काम करते थे। जैसे ही किसी मृतक का शव पोस्टमार्टम के लिए सिम्स पहुंचता, दोनों इसकी जानकारी गिरोह के सदस्य महेंद्र मनहर तक पहुंचा देते थे। सूचना मिलते ही महेंद्र अस्पताल पहुंचकर मृतक के परिजनों से संपर्क करता और शासन की ओर से मिलने वाली आपदा सहायता राशि का लालच देकर मौत का कारण सर्पदंश बताने के लिए तैयार करता था।
कई मामलों में मौत किसी बीमारी, दुर्घटना या अन्य कारण से हुई थी, लेकिन दस्तावेजों में उसे सर्पदंश से मौत दर्शाया गया। इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर शासन से आर्थिक सहायता की राशि निकाल ली जाती थी। जांच में यह भी सामने आया कि सूचना देने और परिजनों को तैयार कराने में दोनों नगर सैनिकों की सक्रिय भूमिका थी।
सिम्स से शुरू होता था पूरा फर्जीवाड़ा
पुलिस जांच के मुताबिक पूरे रैकेट की शुरुआत सिम्स अस्पताल से होती थी। पोस्टमार्टम के लिए शव पहुंचते ही गिरोह को सूचना दे दी जाती थी। फिर गिरोह का सदस्य अस्पताल पहुंचकर परिजनों को लाखों रुपये की सरकारी सहायता का लालच देता और उन्हें मौत का कारण सर्पदंश बताने के लिए राजी करता। इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी सहायता राशि का दावा किया जाता था। पुलिस का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में सूचना देने वाले कुछ कर्मचारी भी गिरोह की मदद कर रहे थे। दो नगर सैनिकों की गिरफ्तारी इसी कड़ी का हिस्सा है।
डॉक्टर, वकील, बाबू… अब नगर सैनिक भी सलाखों के पीछे
सर्पदंश फर्जीवाड़े में गिरफ्तारियों का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे पहले पुलिस डॉक्टर, अधिवक्ता, तहसील कार्यालय और एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। जांच में फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कूटरचित दस्तावेज और सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी कर शासन की सहायता राशि निकालने का बड़ा खेल सामने आया था।
जांच के दौरान कई मामलों में मर्ग नंबर तक फर्जी मिले, जबकि जिन लोगों के नाम पर सहायता राशि निकाली गई, उनके नाम और पते भी संदिग्ध पाए गए। पुलिस का मानना है कि यह कोई छोटा–मोटा फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि लंबे समय से सक्रिय एक संगठित रैकेट था, जिसमें हर सदस्य की भूमिका पहले से तय थी।
रिमांड में खुलेंगे कई और राज, बढ़ सकती हैं गिरफ्तारियां
पुलिस को उम्मीद है कि दोनों नगर सैनिकों से रिमांड के दौरान पूछताछ में इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कई और नाम सामने आएंगे। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाएंगी कि सूचना देने के बदले उन्हें कितना फायदा मिलता था, किन-किन मामलों में उन्होंने भूमिका निभाई और अस्पताल, राजस्व विभाग तथा अन्य सरकारी कार्यालयों के कितने कर्मचारी इस नेटवर्क का हिस्सा थे।
अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ और जुटाए जा रहे साक्ष्यों के आधार पर अन्य संदिग्धों को भी तलब किया जाएगा। नए तथ्य सामने आने पर इस बहुचर्चित सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़े में और गिरफ्तारियां होना तय माना जा रहा है।

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