CG News :विश्व आदिवासी दिवस पर भाजपा सरकारों की चुप्पी के विरोध में आदिवासी कांग्रेस की प्रेस कांफ्रेंस

9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समाज के लिए केवल एक दिवस नहीं, बल्कि हमारी पहचान, संस्कृति, परंपरा, अधिकार और सम्मान का प्रतीक है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर आदिवासी समाज को देश के प्रधानमंत्री, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, सांसदों एवं अन्य जनप्रतिनिधियों की ओर से अपेक्षित शुभकामना संदेश नहीं मिलने को लेकर आदिवासी समाज में व्यापक नाराजगी और आक्रोश है।
इसी आक्रोश और आदिवासी समाज की भावनाओं को मजबूती से सामने रखने के लिए मध्य प्रदेश आदिवासी कांग्रेस द्वारा इंदिरा भवन, पीसीसी कार्यालय, भोपाल में प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की गई।

प्रेस कांफ्रेंस में आदिवासी कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब चुनाव के समय आदिवासी समाज का वोट महत्वपूर्ण होता है, जब आरक्षित सीटों से चुनाव जीतकर जनप्रतिनिधि विधानसभा और संसद तक पहुंचते हैं, तब विश्व आदिवासी दिवस जैसे महत्वपूर्ण दिन पर उसी समाज की पहचान, संस्कृति और भावनाओं को सम्मान देने में चुप्पी क्यों?
आदिवासी समाज केवल चुनाव के समय याद किए जाने वाला समाज नहीं है। देश के संविधान ने आदिवासी समाज को अधिकार, प्रतिनिधित्व और सम्मान दिया है। इसलिए 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों और जनप्रतिनिधियों से आदिवासी समाज सम्मानजनक सहभागिता और शुभकामना संदेश की अपेक्षा रखता है।
आदिवासी कांग्रेस ने कहा कि 9 अगस्त को बधाई देना महज औपचारिकता नहीं, बल्कि देश के करोड़ों आदिवासियों की पहचान, संस्कृति और अस्तित्व के प्रति सम्मान का प्रतीक है। इस दिन आदिवासी समाज को नजरअंदाज करना उसकी भावनाओं की अनदेखी के रूप में देखा जा रहा है।

प्रेस कांफ्रेंस में प्रमुख रूप से—
- श्रीमती अर्चना पोर्ते जी, मध्य प्रदेश प्रभारी एवं राष्ट्रीय समन्वयक, अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस
- श्री सुनील उइके जी, विधायक, जुन्नारदेव एवं राष्ट्रीय समन्वयक, आदिवासी कांग्रेस
- श्री रामू टेकाम जी, प्रदेश अध्यक्ष, आदिवासी कांग्रेस, मध्य प्रदेश
- श्रीमती चंद्रा सरवटे जी, प्रदेश अध्यक्ष, आदिवासी महिला विंग
- श्री प्रवीण धालपुरे जी, पीसीसी प्रवक्ता, मध्य प्रदेश
- श्री प्रकाश ठाकुर जी, प्रदेश उपाध्यक्ष, आदिवासी कांग्रेस
- श्री अशोक डाबर जी, प्रदेश महामंत्री, आदिवासी कांग्रेस
- सहित आदिवासी कांग्रेस के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

इस अवसर पर आदिवासी कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज अपने सम्मान, अधिकार, प्रतिनिधित्व और पहचान के सवाल पर अब चुप नहीं रहेगा। आदिवासी समाज की आवाज़ को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से हर मंच पर मजबूती से उठाया जाएगा।
आदिवासी समाज सम्मान चाहता है, उपेक्षा नहीं।
आदिवासी समाज प्रतिनिधित्व चाहता है, केवल चुनावी उपयोग नहीं।
जय आदिवासी! जय जोहार!

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