CG Election News:- नगर पंचायत बम्हनीडीह का चुनाव ई व्हीं एम से, व्ही व्ही पी ए टी नहीं मिलने से चुनाव की पारदर्शिता पर प्रश्न चिन्ह,

CG Election News:-बम्हनीडीह नगर पंचायत चुनाव में ईवीएम से मतदान होगा, लेकिन VVPAT नहीं मिलेगा। इसी कारण पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एसडीएम पवन कोसमा के अनुसार नगरीय निकाय चुनावों में पहले से ही VVPAT का उपयोग नहीं होता है।
रिपोर्टर – राजेश्वर तिवारी
JanjgirChampa जांजगीर–चांपा,31 भी, 2026/ नवगठित नगर पंचायत बम्हनीडीह के अध्यक्ष और पार्षदों का पहला चुनाव विशेष प्रकार की ई व्ही एम से कराया जा रहा है। इस ई व्ही एम में मतदान करने के बाद मतदाताओं को व्ही व्ही पी ए टी पर्ची नहीं मिलेगी।
लिहाजा मतदाता को यह तो पता रहेगा कि उसने अपना वोट किस उम्मीदवार को दिया है लेकिन व्ही व्ही पी ए टी पर्ची नहीं मिलने से यह सुनिश्चित नहीं हो पाएगा कि उसका मत उसी उम्मीदवार को मिला है जिसे उसने वोट दिया है।
ऐसी स्थिति में इस चुनाव की पारदर्शिता पर प्रश्न चिन्ह लग गया है।
जिस उम्मीदवार को मत दिया गया उसे मिला कि नहीं यह जानना मतदाताओं का संवैधानिक अधिकार है।
महज़ करीब चार हजार मतदाताओं की संख्या वाली नगर पंचायत बम्हनीडीह का चुनाव ई व्ही एम से कराने की क्या आवश्यकता है?
बैलेट पेपर से यह चुनाव कराया जाता तो ज्यादा विश्वसनीय और पारदर्शी होता।
पहले से ही ईव्हीएम से चुनाव कराने और इस मशीन को विश्वसनीय नहीं माना जाता रहा है।
अन्य राज्यों में जहां स्थानीय चुनाव बैलेट पेपर से हो रहे हैं वहीं छत्तीसगढ़ में ई व्ही एम का उपयोग किया जा रहा है वह भी अपारदर्शी रुप में।
इससे इस चुनाव की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगाया जा रहा है।
बम्हनीडीह नगर पंचायत चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर एस डी एम चांपा पवन कोसमा ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में ई व्ही एम की सीलिंग और सत्यापन की कार्रवाई के दौरान बताया गया कि इस चुनाव में प्रयुक्त ई व्ही एम से मतदाताओं को व्ही व्ही पी ए टी पर्ची नहीं मिलेगी।
इस बीच चांपा एसडीएम एवं रिटर्निंग ऑफिसर पवन कोसमा ने स्पष्ट किया है कि नगरीय निकाय चुनाव में VVPAT का उपयोग पहले भी नहीं किया जाता रहा है। यानी यह कोई नई व्यवस्था नहीं है, बल्कि पूर्व से चली आ रही प्रक्रिया ही इस चुनाव में भी लागू की गई है।
मशीनों की सीलिंग और सत्यापन की प्रक्रिया भी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में पूरी कर ली गई है।
अब देखना होगा कि यह चुनाव प्रक्रिया तकनीकी व्यवस्था के रूप में स्वीकार की जाती है या फिर पारदर्शिता को लेकर उठते सवालों को और बल मिलता है।
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