छत्तीसगढ़ पी एस सी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय का बड़ा शिकंजा… पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी 14 दिन के लिए जेल भेजे गए,

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित पी एस सी भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने शिकंजा और कस दिया है। पूर्व छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष टामन सोनवानी को विशेष अदालत में पेश करने के बाद कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। अब जांच सिर्फ भर्ती में कथित गड़बड़ियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग, करोड़ों के लेन-देन और मनी ट्रेल की पड़ताल होगी। जांच एजेंसी जल्द ही कई अधिकारियों और अन्य लोगों को नोटिस भेजकर पूछताछ कर सकती है
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित भर्ती घोटालों में शामिल भर्ती घोटाला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो की कार्रवाई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय भी पूरे मामले में आर्थिक लेन-देन और कथित मनी लॉन्ड्रिंग की परतें खोलने में जुट गया है।
विशेष अदालत में पेशी के बाद पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
अब पैसों के खेल की होगी पड़ताल
ई डी अब यह पता लगाने में जुटी है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के दौरान पैसों का लेन-देन कैसे हुआ, किसके जरिए हुआ और आखिर इसका लाभ किस-किस तक पहुंचा। एजेंसी की जांच का फोकस पूरे मनी ट्रेल पर है। जांच में जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी, उन्हें जल्द नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।
सी बी आई पहले ही कर चुकी है गिरफ्तारी
इससे पहले ने इसी मामले में पूर्व छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष टामन सोनवानी और रायपुर के एक कारोबारी को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं और प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी समेत अन्य राजपत्रित पदों पर चयनित कराने के लिए अवैध तरीके अपनाए गए।
सरकारी आवास से प्रश्नपत्र देने का आरोप
सी बी आई की जांच में दावा किया गया है कि परीक्षा का प्रश्नपत्र कथित तौर पर टामन सोनवानी ने अपने सरकारी आवास पर कुछ अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराया था। इसके बाद उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर के माध्यम से वह प्रश्नपत्र रायपुर के एक कारोबारी तक पहुंचा।
जांच एजेंसी के अनुसार, कारोबारी के बेटे और बहू ने उसी कथित प्रश्नपत्र के आधार पर तैयारी की और बाद में डिप्टी कलेक्टर पद पर चयनित हुए। हालांकि इन आरोपों की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
171 पदों की भर्ती से उठा था विवाद
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने वर्ष 2021 की राज्य सेवा परीक्षा के तहत 171 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था ।
13 फरवरी 2022 को प्रारंभिक परीक्षा हुई, जिसमें 2,565 अभ्यर्थी सफल हुए। इसके बाद 26, 27, 28 और 29 मई 2022 को मुख्य परीक्षा आयोजित हुई, जिसमें 509 अभ्यर्थी पास हुए। इंटरव्यू के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की अंतिम चयन सूची जारी की गई।
इसी चयन सूची के बाद भर्ती प्रक्रिया में पक्षपात, पेपर लीक और प्रभावशाली परिवारों के अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप लगे। मामला तूल पकड़ने पर राज्य सरकार ने जांच सी बी आई को सौंप दी।
भर्ती घोटाले का पूरा मामला
यह मामला 2020 से 2022 के बीच हुई छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आरोप है कि परीक्षा और इंटरव्यू में पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित कराया गया। योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर अपने करीबी लोगों को नियुक्त कराने का खेल खेला गया।
सी बी आई ने जांच के दौरान कई दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जब्त किए हैं। अब ई डी उसी मामले के वित्तीय पहलुओं की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित भर्ती घोटाले के पीछे पैसों का नेटवर्क कैसे काम कर रहा था।
पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी के जेल पहुंचने के बाद अब निगाहें ई डी की अगली कार्रवाई पर टिक गई हैं। जांच एजेंसी की मनी ट्रेल जांच में यदि नए नाम सामने आते हैं, तो कई अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य संदिग्धों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजे जा सकते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग भर्ती घोटाले की जांच अभी और कई बड़े खुलासे कर सकती है।

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