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बरगी डैम हादसा: डूबते सवालों के बीच सिस्टम खामोश, मानवाधिकार समिति ने खोली जांच की परतें

बरगी डैम हादसा: डूबते सवालों के बीच सिस्टम खामोश, मानवाधिकार समिति ने खोली जांच की परतें

बरगी डैम हादसा: डूबते सवालों के बीच सिस्टम खामोश, दुर्घटना की जांच पर मानवाधिकार समिति के गंभीर आरोप, उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज

30 अप्रैल 2026 को हुई कथित नाव दुर्घटना के बाद अब प्रशासनिक व्यवस्था, टिकट प्रणाली और सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

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जबलपुर जिले के बरगी डैम में 30 अप्रैल 2026 को हुई कथित नाव दुर्घटना के मामले ने अब गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का रूप ले लिया है। अखिल भारतीय मानव अधिकार समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस घटना को लेकर मौके पर पहुंचकर जांच की और कई स्तरों पर अनियमितताओं और लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

समिति का यह प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय पांडे के नेतृत्व में 2 मई 2026 को बरगी डैम पहुंचा, जहां उन्होंने जिला प्रशासन के अधिकारियों और प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच दल में सतीश चंद्र, गगन मिश्रा, दीपक राजपूत, पवन जैन और राकेश बेन भी शामिल रहे।

ग्रामीणों के बयान और मौके की स्थिति पर सवाल

जांच के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय ग्रामीणों से संवाद कर घटनाक्रम की जानकारी जुटाई। ग्रामीणों के अनुसार, घटना स्थल पर परिस्थितियां सामान्य नहीं थीं और कई स्तरों पर अव्यवस्था तथा सुरक्षा प्रबंधन में कमी देखी गई।

समिति का दावा है कि मौके पर केंद्रीय एजेंसियों की टीम भी जांच में सक्रिय थी, लेकिन कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर पारदर्शिता की कमी और स्पष्ट जवाबों का अभाव सामने आया।

प्रशासनिक व्यवस्था और “दिखावे” के आरोप

मानव अधिकार समिति ने आरोप लगाया कि घटना से एक दिन पहले मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान पूरा प्रशासनिक अमला और मंत्रीगण मौजूद थे, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग थी। समिति के अनुसार, उस समय सहायता और संवेदना का प्रदर्शन तो किया गया, लेकिन वास्तविक प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान नहीं हो सका।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि कई पीड़ित परिवारों की स्थिति अत्यंत दर्दनाक थी और मौके पर भावनात्मक दृश्य देखने को मिले, जिसने घटना की गंभीरता को और बढ़ा दिया।

टिकट व्यवस्था और ओवरलोडिंग पर गंभीर आरोप

जांच में सबसे बड़ा सवाल नाव संचालन व्यवस्था को लेकर उठाया गया है। समिति ने आरोप लगाया कि जिस नाव की क्षमता लगभग 80 यात्रियों की बताई जाती है, उसमें क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाए जाने की आशंका है।

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ग्रामीणों के अनुसार, कई यात्रियों से बिना टिकट अतिरिक्त राशि वसूली गई, जिसमें ठेकेदारों और कुछ प्रशासनिक स्तर के लोगों की मिलीभगत की आशंका जताई गई है। समिति ने कहा कि यदि ये आरोप सत्य हैं, तो यह सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक निगरानी की गंभीर विफलता को दर्शाता है।

पुराने मामलों से तुलना और सिस्टम पर सवाल

मानव अधिकार समिति ने इस घटना की तुलना पूर्व में भोपाल में हुई नाव दुर्घटनाओं से करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने आना व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है। समिति का कहना है कि कई बार सुरक्षा नियमों की अनदेखी और आर्थिक लाभ के लिए जोखिम उठाए जाते हैं, जिसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ता है।

उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग

अखिल भारतीय मानव अधिकार समिति ने इस पूरे मामले की जांच के लिए प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और राज्यपाल से हस्तक्षेप कर एक स्वतंत्र जांच आयोग गठित करने की मांग की है।

साथ ही समिति ने राज्य सरकार से पीड़ित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता और पुनर्वास देने की अपील की है। समिति ने जल संसाधन मंत्री सहित जिम्मेदार अधिकारियों के इस्तीफे की भी मांग उठाई है।

शोक संवेदना और चेतावनीस

मिति ने इस हादसे में जान गंवाने वाले सभी लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है और कहा है कि इस तरह की घटनाएं केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि यदि सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र में सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा भी हो सकती हैं।

बरगी डैम नाव दुर्घटना अब केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही, सुरक्षा मानकों और पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवालों का केंद्र बन गई है। मानव अधिकार समिति की जांच ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है, जिससे अब उच्च स्तरीय जांच की मांग और तेज हो गई है।

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SURENDRA MISHRA

एक समर्पित पत्रकार के रूप में वे जनता तक सच्ची और निष्पक्ष खबर पहुँचाने के लिए लगातार जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग करते हैं।

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