CG News:- संलग्नीकरण खत्म करने का आदेश… पर सिस्टम में ‘सेटिंग’ जारी? सीएमएचओ की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
औपचारिकता निभाने के लिए जारी हुआ आदेश? जमीनी हकीकत से उलट दिख रही कार्रवाई सीएमएचओ पर उठ रहे सीधे सवाल

कागजों में सख्ती, जमीनी स्तर पर ढिलाई का आरोप
सीएमएचओ कार्यालय खुद नियमों के घेरे में, कर्मचारियों में बढ़ता असंतोष
CGNews:- मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के 16 मार्च को जारी किए गए आदेश में संलग्नीकरण खत्म करने के साफ निर्देश दिए गए, लेकिन डेढ़ महीने बाद भी कई कर्मचारी अब भी संलग्न बताए जा रहे हैं।आरोप है कि कार्रवाई चयनात्मक रही—कुछ को हटाया गया, जबकि कई प्रभाव के दम पर यथावत हैं।
CMHO कोरबा….?
संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं छत्तीसगढ़ द्वारा जारी पत्र क्रमांक संचा//2026/30 दिनांक 13 मार्च 2026 तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कोरबा के 16 मार्च 2026 के आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि जिले में सभी प्रकार के संलग्नीकरण तत्काल प्रभाव से समाप्त किए जाएं और संबंधित कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजा जाए।
आदेश में यह भी कहा गया था कि सभी खंड चिकित्सा अधिकारी—पताढ़ी, करतला, कटघोरा, पाली और पोड़ीउपरोड़ा—तीन दिवस के भीतर संलग्नीकरण समाप्त कर प्रमाण पत्र प्रस्तुत करें। लेकिन आदेश जारी होने के डेढ़ महीने बाद भी इसके क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

चयनात्मक कार्रवाई के आरोप
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, आदेश का पालन एक समान तरीके से नहीं किया गया। कई कर्मचारियों को तत्काल रिलीव कर उनके मूल स्थानों पर भेज दिया गया, जबकि कुछ कर्मचारियों को अब भी अन्य कार्यालयों में संलग्न रखा गया है। आरोप है कि यह छूट प्रभाव, पहुंच और कथित आर्थिक लेनदेन के आधार पर दी गई है।
इस कथित पक्षपातपूर्ण कार्रवाई ने विभागीय निष्पक्षता और पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। कर्मचारियों के बीच असंतोष बढ़ रहा है और भेदभाव की भावना खुलकर सामने आ रही है।
सीएमएचओ कार्यालय ही कटघरे में
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जहां एक ओर ब्लॉक स्तर पर सख्ती के निर्देश दिए गए, वहीं दूसरी ओर खुद सीएमएचओ कार्यालय में ही दर्जनभर से अधिक चिकित्सकीय और गैर-चिकित्सकीय स्टाफ अब भी संलग्न बताए जा रहे हैं।
जिसमे बजरंग लाल पटेल (सहायक ग्रेड-3), मुकेश प्रजापति (फार्मासिस्ट), धर्मेन्द्र गौरहा (सुपरवाइजर), रेशम कुरें (सुपरवाइजर), डॉ. नरेन्द्र जायसवाल (सलाहकार), प्रतिमा तंवर और मो. इरफान खान (सचिवीय सहायक) सहित डॉ. कुमार पुष्पेश को पीएचसी तथा अजित रात्रे को जीएमसी कोरबा में पदस्थ किया गया है, लेकिन वे भी सीएमएचओ कार्यालय में ही कार्यरत बताए जा रहे हैं। वहीं रीता गुप्ता को शहरी क्षेत्र सीएचसी दीपका में पदस्थ किया गया है, परंतु उनकी वास्तविक तैनाती भी कार्यालय में ही बनी हुई है। कई कर्मचारियों को ब्लॉक कार्यालयों में पदस्थ किए जाने के आदेश हैं, लेकिन इनका पालन नहीं हो रहा है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब आदेश जारी करने वाला कार्यालय ही नियमों का पालन नहीं कर रहा, तो नीचे तक सख्ती कैसे सुनिश्चित होगी?
औपचारिकता बनकर रह गया आदेश?
वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि संलग्नीकरण समाप्त करने का आदेश केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह गया है।
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